मंडला में रतनजोत के बीज खाने से 7 बच्चे बीमार, जिला अस्पताल में इलाज जारी — हालत स्थिर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मंडला जिले के सेमीकोल गाँव में 3 से 6 वर्ष की आयु के सात मासूम बच्चे जहरीले रतनजोत के बीज खाने के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। 12 अक्टूबर 2026 को रविवार की शाम इन सभी बच्चों को मंडला जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति अब स्थिर है।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह दुर्घटना
बच्चों की माँ सुनीता यादव ने बताया कि रविवार को छुट्टी होने के कारण गाँव के सात बच्चे — जिनमें उनके खुद के दो बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) और पड़ोस के पाँच बच्चे शामिल थे — बजरंगबली मंदिर के सामने खेल रहे थे। मंदिर के पास ही एक रतनजोत का पेड़ लगा हुआ है। खेलते-खेलते बच्चों ने इस पेड़ के बीज खा लिए।
घर लौटने के बाद सभी बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू की। सुनीता ने बताया, 'बच्चे घर आकर कहने लगे कि पेट में दर्द हो रहा है। वे लगातार उल्टी कर रहे थे और दस्त भी शुरू हो गई थी। जब हमने देखा तो तुरंत समझ गए कि उन्होंने पेड़ के पास से कुछ खा लिया है।' परिजन तत्काल सातों बच्चों को लेकर मंडला जिला अस्पताल पहुँचे।
चिकित्सकों की प्रतिक्रिया और उपचार
जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. गौरव कुमार मरकाम ने बताया कि रविवार शाम करीब 5:30 बजे IST सातों बच्चों को अस्पताल लाया गया। उन्होंने कहा कि सभी का तत्काल प्राथमिक उपचार आरंभ किया गया, आवश्यक दवाएँ एवं IV बोतल (ड्रिप) दी गई। डॉ. मरकाम के अनुसार, अभी सभी बच्चों की स्थिति स्थिर है और उन्हें खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
परिजनों की आपबीती
एक अन्य अभिभावक मनोज कुमार ने बताया कि वे धान की कटाई के सिलसिले में खेत में गए हुए थे। जब उन्हें बच्चों की तबियत बिगड़ने की सूचना मिली, तो वे काम छोड़कर तुरंत घर पहुँचे। मनोज ने बताया, 'जब बच्चे उल्टी कर रहे थे तो उल्टी में बीज के टुकड़े निकले, तब हमें पता चला कि उन्होंने रतनजोत के बीज खाए हैं।'
रतनजोत: क्यों है यह इतना खतरनाक
रतनजोत (वानस्पतिक नाम: Jatropha curcas) एक तेज़ी से फैलने वाला झाड़ीदार पेड़ है, जिसके बीजों में करसिन (curcin) और फोरबोल एस्टर जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं। यह पेड़ ग्रामीण भारत में बायोडीज़ल स्रोत के रूप में बड़े पैमाने पर लगाया गया था, लेकिन इसके चमकीले और आकर्षक बीज छोटे बच्चों को खाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, मात्र एक-दो बीजों का सेवन भी बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसे गंभीर लक्षण उत्पन्न कर सकता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल सातों बच्चे मंडला जिला अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में हैं। परिजनों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें छुट्टी मिल सकेगी। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों और मंदिर-परिसरों के पास उगे जहरीले पेड़-पौधों की पहचान एवं उनके उचित प्रबंधन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है।