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मन की बात के 138वें एपिसोड में PM मोदी बोले — जनगणना राष्ट्रीय दायित्व, 32 करोड़ परिवारों की जानकारी दर्ज

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मन की बात के 138वें एपिसोड में PM मोदी बोले — जनगणना राष्ट्रीय दायित्व, 32 करोड़ परिवारों की जानकारी दर्ज

सारांश

मन की बात के 138वें एपिसोड में PM मोदी ने जनगणना को 'राष्ट्रीय दायित्व' बताया — 32 करोड़ परिवारों की जानकारी दर्ज हो चुकी है और 2.60 करोड़ नागरिक मोबाइल से स्व-गणना कर चुके हैं। 2021 की स्थगित जनगणना के बाद यह अभियान नीति-निर्माण के लिए निर्णायक है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 27 सितंबर 2026 को 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में जनगणना की प्रगति साझा की।
जनगणना का पहला चरण लगभग पूरा; 32 करोड़ से अधिक परिवारों की जानकारी दर्ज।
2 करोड़ 60 लाख से अधिक नागरिकों ने मोबाइल के ज़रिए स्व-गणना पूरी की।
लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के दुर्गम इलाकों में भी जनगणना जारी।
ऑनलाइन पोर्टल हिंदी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध; प्रक्रिया में मात्र 15-20 मिनट लगते हैं।
मोदी ने 15 अगस्त 2026 को भी देशवासियों से जनगणना में भागीदारी का आग्रह किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में देशवासियों को सूचित किया कि भारत की जनगणना का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है और अब तक 32 करोड़ से अधिक परिवारों की जानकारी दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि जनगणना में भागीदारी सुनिश्चित करना हम सबका राष्ट्रीय दायित्व है।

पहले चरण की स्थिति

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'इन दिनों देश की एक बहुत बड़ी तस्वीर तैयार हो रही है। इस तस्वीर में आप भी हैं, आपका परिवार भी है और आपके अड़ोस-पड़ोस के लोग भी हैं।' उन्होंने बताया कि देश के सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में जनगणना का पहला चरण लगभग सम्पन्न हो चुका है।

अब तक 2 करोड़ 60 लाख से अधिक नागरिक मोबाइल के माध्यम से जनगणना पोर्टल पर स्व-गणना कर चुके हैं। यह आँकड़ा डिजिटल भागीदारी के लिहाज़ से उल्लेखनीय है।

दुर्गम क्षेत्रों में जनगणना

मोदी ने बताया कि लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के बर्फीले और दुर्गम इलाकों में भी जनगणना का कार्य जारी है। उन्होंने उत्तराखंड के चमोली ज़िले के माणा गाँव — जिसे देश का पहला गाँव कहा जाता है — का विशेष उल्लेख किया।

मोदी के अनुसार, माणा गाँव में जनगणना की शुरुआत 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत से हुई। इसके अलावा, उत्तरकाशी के बगोरी गाँव में होम स्टे संचालक हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज की, जो डिजिटल जनगणना की भावना का प्रतीक बनी।

ऑनलाइन स्व-गणना की प्रक्रिया

प्रधानमंत्री ने नागरिकों को ऑनलाइन जनगणना पोर्टल का उपयोग करने का तरीका समझाया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में मात्र 15 से 20 मिनट का समय लगता है और कोई दस्तावेज़ अपलोड नहीं करना होता। पोर्टल पर मोबाइल नंबर से लॉगिन करने के बाद स्थान व परिवार की जानकारी भरकर सबमिट किया जा सकता है।

सूचना सबमिट करने पर एक विशेष आईडी मिलती है, जिसे गणनाकर्मी के घर आने पर साझा किया जा सकता है। यह सुविधा हिंदी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध है।

15 अगस्त की अपील से जोड़

गौरतलब है कि मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से भी देशवासियों से जनगणना में भागीदारी का आग्रह किया था। 'मन की बात' में यह दूसरी बार है जब उन्होंने इस विषय को केंद्र में रखा, जो इस अभियान को सरकार की प्राथमिकता के रूप में रेखांकित करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब वर्ष 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण लंबे समय तक स्थगित रही थी। मौजूदा जनगणना नीति-निर्माण, कल्याण योजनाओं और निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन के लिए अनिवार्य आधार तैयार करेगी।

आगे क्या होगा

पहले चरण के पूरा होने के बाद दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें घर-घर जाकर जनगणनाकर्मी जानकारी सत्यापित करेंगे। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अभी से ऑनलाइन स्व-गणना कर अपनी आईडी तैयार रखें, ताकि सत्यापन प्रक्रिया सुगम हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि रणनीतिक दृष्टि से चतुर कदम है — लेकिन असली चुनौती तकनीकी या भावनात्मक नहीं, प्रशासनिक है। 2021 की जनगणना कोविड के बाद लंबे समय तक टलती रही, और उस देरी का असर योजनाओं के आँकड़ों पर पड़ा। 2.60 करोड़ की स्व-गणना प्रभावशाली लगती है, पर 140 करोड़ की आबादी के सापेक्ष यह अभी शुरुआत भर है। मुख्यधारा की कवरेज प्रेरक कहानियों पर टिकी है, जबकि असली सवाल यह है कि डेटा की गुणवत्ता और ग्रामीण भागीदारी को कैसे सुनिश्चित किया जाएगा — क्योंकि जनगणना के आँकड़े आने वाले दशक की कल्याण नीतियों और परिसीमन की बुनियाद बनेंगे।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत जनगणना 2026 का पहला चरण कहाँ तक पहुँचा है?
PM मोदी के अनुसार, जनगणना का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है और देश के सभी राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों में 32 करोड़ से अधिक परिवारों की जानकारी दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा 2 करोड़ 60 लाख से अधिक नागरिक मोबाइल के ज़रिए ऑनलाइन स्व-गणना पूरी कर चुके हैं।
जनगणना पोर्टल पर ऑनलाइन स्व-गणना कैसे करें?
जनगणना के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर मोबाइल नंबर से लॉगिन करें, अपना स्थान दर्ज करें, परिवार की जानकारी भरें और सबमिट करें। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 15 से 20 मिनट लगते हैं, कोई दस्तावेज़ अपलोड नहीं करना होता और पोर्टल हिंदी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध है।
मन की बात के 138वें एपिसोड में PM मोदी ने जनगणना पर क्या कहा?
27 सितंबर 2026 को प्रसारित मन की बात के 138वें एपिसोड में PM मोदी ने जनगणना को 'हम सबका राष्ट्रीय दायित्व' बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक की सही जानकारी देश के भविष्य की सही तस्वीर बनाने में मदद करती है।
जनगणना पोर्टल पर जानकारी देने के बाद क्या होता है?
जानकारी सबमिट करने पर नागरिक को एक विशेष आईडी मिलती है। जब गणनाकर्मी घर पर सत्यापन के लिए आएँ, तो यह आईडी बताने पर पहले से दर्ज जानकारी की पुष्टि हो जाती है और वह जनगणना का आधिकारिक हिस्सा बन जाती है।
क्या दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी जनगणना हो रही है?
हाँ, PM मोदी ने बताया कि लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों में भी जनगणना का कार्य जारी है। उत्तराखंड के माणा गाँव — जिसे देश का पहला गाँव कहा जाता है — से 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत के साथ इसकी शुरुआत हुई।
राष्ट्र प्रेस
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