परिसीमन विधेयक पर राजद सांसद मनोज झा का केंद्र पर हमला, सर्वदलीय बैठक की माँग
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने 20 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे पत्र — जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संशोधन विधेयकों पर सहयोग की अपील की गई — के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया। विपक्षी दलों ने इस पत्र को लेकर केंद्र की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
मनोज झा की माँग: सर्वदलीय बैठक हो
झा ने कहा कि उन्होंने रिजिजू का पत्र और उससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष का पत्र दोनों पढ़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे के दुश्मन नहीं होते। उन्होंने रिजिजू से सीधी अपील करते हुए कहा कि सरकार को अपना दायरा बढ़ाना होगा।
झा ने सवाल उठाया कि क्या यह बेहतर नहीं होता कि परिसीमन को लेकर लोगों के मन में जो आशंकाएँ हैं, उन्हें दूर करने के लिए संसद सत्र शुरू होने से पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाती, जिसमें सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होती। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारतीय राज्यों समेत कई दलों ने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर गहरी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।
PM मोदी पर निशाना: 'अहम मौकों पर गायब हो जाते हैं'
झा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर प्रधानमंत्री सदन से नदारद रहते हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री को सदन में उपस्थित रहना चाहिए ताकि सभी दलों के बीच खुला संवाद संभव हो सके।
मोहन भागवत के बयान पर पलटवार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर भी झा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें भागवत ने कथित तौर पर कहा था कि भारत में सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है और नेपाल व बांग्लादेश जैसी घटनाएँ स्वार्थ के लिए होती हैं।
झा ने कहा कि मोहन भागवत को बिल्कुल भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है — यह गांधी का देश है। उन्होंने कहा, 'शायद संघ इस बात को नहीं मानता, क्योंकि उनकी विचारधारा गांधी के खिलाफ रही है।' झा ने आगे जोड़ा कि फ्रांस और अल्बानिया के पास गांधी नहीं हैं, लेकिन भारत के पास गांधी हैं।
झा ने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि इन्हीं आदर्शों के आधार पर सत्ता की निरंकुशता को चुनौती दी जाती रहेगी। उन्होंने कहा कि भागवत अपने डर की तुलना अराजकता से न करें।
विजयदशमी संदेश और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं पर दुख
झा ने देशवासियों और बिहार के लोगों को विजयदशमी की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कोलकाता और ग्वालियर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के लिए संबल की कामना की। उनके अनुसार विजयदशमी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अंधेरा कभी स्थायी नहीं होता — उजाला ज़रूर आता है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि परिसीमन विधेयक को लेकर संसद के अगले सत्र में व्यापक राजनीतिक संघर्ष की संभावना है। विपक्षी दलों की सर्वदलीय बैठक की माँग यदि सरकार स्वीकार नहीं करती, तो सदन में गतिरोध और गहरा हो सकता है। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने के संकेत हैं।