16 अक्टूबर 2026
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परिसीमन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की माँग: खड़गे ने PM मोदी को लिखा चौथा पत्र

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परिसीमन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की माँग: खड़गे ने PM मोदी को लिखा चौथा पत्र

सारांश

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने परिसीमन विधेयक पर PM मोदी को चौथी बार पत्र लिखा है — अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के बाद अब सरकार दोबारा कोशिश कर सकती है। बिना सर्वदलीय सहमति के इसे पारित कराना फिर से मुश्किल होगा।

मुख्य बातें

मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 अक्टूबर 2026 को PM मोदी को परिसीमन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक के लिए चौथा पत्र लिखा।
मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को स्थगित होने के 64 दिन बाद भी संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं हुआ — खड़गे ने इसे 'अभूतपूर्व' बताया।
परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया था।
खड़गे ने 11 अप्रैल , 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी इसी माँग के साथ प्रधानमंत्री को पत्र लिखे थे।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि विधेयक को फिर से जल्दबाजी में पारित कराने का प्रयास नहीं होना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन विधेयक पर सरकार के प्रस्तावों को अंतिम रूप दिए जाने से पूर्व सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया। यह इस विषय पर उनका चौथा पत्र है, जो दर्शाता है कि विपक्ष परामर्श की माँग पर लगातार दबाव बनाए हुए है।

मुख्य घटनाक्रम

खड़गे ने पत्र में रेखांकित किया कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 64 दिन बीत जाने के बाद भी दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने इस स्थिति को 'अभूतपूर्व' करार दिया और कहा कि इससे संसदीय परंपराओं पर गंभीर सवाल उठते हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब खड़गे ने यह माँग उठाई हो। उन्होंने 11 अप्रैल 2026, 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक की माँग दोहराई थी। हर बार सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई।

अप्रैल 2026 की पृष्ठभूमि

खड़गे के अनुसार, परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को 14 अप्रैल 2026 की देर रात सार्वजनिक किया गया और मात्र दो दिन बाद 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। 17 अप्रैल को जब यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया, तो यह आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा और पारित नहीं हो सका। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने विपक्ष और क्षेत्रीय दलों को पर्याप्त विचार-विमर्श का अवसर दिए बिना विधेयक को जल्दबाजी में लाने का प्रयास किया था।

खड़गे की मुख्य माँगें

अपने ताज़ा पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से आग्रह किया कि सभी राजनीतिक दलों को प्रस्तावों पर विचार-विमर्श और संबंधित पक्षों से परामर्श के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि व्यापक प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को एक बार फिर जल्दबाजी में संसद में पारित कराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

आम जनता और राज्यों पर असर

परिसीमन प्रक्रिया का सीधा असर लोकसभा और विधानसभा सीटों के भौगोलिक पुनर्गठन पर पड़ता है, जो दक्षिण भारतीय राज्यों सहित कई राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय दल पहले से ही इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियाँ दर्ज करा चुके हैं।

क्या होगा आगे

सरकार की ओर से अभी तक खड़गे के किसी भी पत्र का औपचारिक जवाब नहीं आया है। संसद का अगला सत्र और परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने की संभावित समय-सीमा अभी अनिश्चित बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सर्वदलीय बैठक के बिना इस विधेयक को दो-तिहाई बहुमत मिलना फिर से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिसीमन विधेयक 2026 क्या है और यह क्यों विवादास्पद है?
परिसीमन विधेयक 2026 एक संविधान संशोधन विधेयक है जो लोकसभा और विधानसभा सीटों के भौगोलिक पुनर्गठन से जुड़ा है। यह विवादास्पद है क्योंकि दक्षिण भारतीय राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घट सकता है।
अप्रैल 2026 में परिसीमन विधेयक क्यों पारित नहीं हो सका?
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया। विपक्ष का आरोप था कि विधेयक 14 अप्रैल की देर रात सार्वजनिक किया गया और महज दो दिन में विशेष सत्र बुला लिया गया, जिससे पर्याप्त विचार-विमर्श का अवसर नहीं मिला।
खड़गे ने PM मोदी को कितनी बार पत्र लिखे हैं और क्या माँग की है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 11 अप्रैल, 16 जुलाई, 27 अगस्त और 16 अक्टूबर 2026 को — कुल चार बार — PM मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की है। सरकार ने अब तक किसी भी पत्र का सार्वजनिक जवाब नहीं दिया है।
संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान न होने पर खड़गे ने क्या कहा?
खड़गे ने कहा कि 13 अगस्त 2026 को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 64 दिन बाद भी दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ, जिसे उन्होंने 'अभूतपूर्व' स्थिति बताया। इससे संसदीय परंपराओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
परिसीमन विधेयक से किन राज्यों और नागरिकों पर असर पड़ेगा?
परिसीमन प्रक्रिया से लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्गठन होगा, जिसका सर्वाधिक असर दक्षिण भारतीय राज्यों — तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना — पर पड़ने की आशंका है। इन राज्यों की कम जनसंख्या वृद्धि दर के चलते उनके संसदीय प्रतिनिधित्व में कटौती हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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