19 अक्टूबर 2026
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परिसीमन विवाद: रिजिजू का खड़गे को करारा जवाब, कहा — '16 मार्च से कई बार हो चुका है परामर्श'

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परिसीमन विवाद: रिजिजू का खड़गे को करारा जवाब, कहा — '16 मार्च से कई बार हो चुका है परामर्श'

सारांश

परिसीमन संशोधन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की कांग्रेस की माँग को रिजिजू ने खारिज करते हुए कहा कि सरकार मार्च से ही लगातार परामर्श कर रही है — DMK, SP, NCP समेत कई दल पहले ही शामिल। अब विपक्ष से रचनात्मक भूमिका की अपेक्षा।

मुख्य बातें

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने 19 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जवाबी पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक की माँग को अस्वीकार किया।
सरकार ने 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को लिखित परामर्श किया और व्यक्तिगत बातचीत भी की।
मानसून सत्र में रिजिजू ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात कर सहयोग माँगा था।
बार बार अनुरोध के बावजूद कांग्रेस ने चर्चा की कोई तारीख नहीं दी; सरकार ने DMK, SP, NCP, BJD समेत कई दलों से अलग परामर्श किया।
रिजिजू ने संसद 64 दिन से स्थगित न होने के आरोप को खारिज करते हुए 1963 से 2008 तक के ऐतिहासिक उदाहरण दिए।

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने 19 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर परिसीमन संविधान संशोधन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की माँग को सिरे से खारिज कर दिया। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 से लगातार विपक्षी दलों से परामर्श करती रही है, और अब रचनात्मक सहयोग की ज़रूरत है — बाधा की नहीं।

विवाद की पृष्ठभूमि

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर माँग की थी कि परिसीमन संशोधन विधेयक पर विचार से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। इसी के जवाब में संसदीय कार्यमंत्री ने विस्तृत पत्र जारी कर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। यह तकरार ऐसे समय में सामने आई है जब संसद के मौजूदा सत्र में विधेयक पारित कराने को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने सामने हैं।

संसद स्थगन पर सरकार की सफाई

रिजिजू ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि 64 दिन बीत चुके हैं और संसद को स्थगित नहीं किया गया। उन्होंने कहा, "कोई संवैधानिक जरूरत नहीं है कि सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद कितने समय में स्थगित किया जाए। सिर्फ इतने समय तक स्थगित न होना कोई संवैधानिक अनियमितता नहीं है।"

उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 में 49 दिन, 2013 में 49 दिन और 1963 में 41 दिन तक सदन स्थगित नहीं हुआ था। 2008 में लोकसभा विश्वास प्रस्ताव के लिए 21 22 जुलाई को बैठी, फिर स्थगित नहीं हुई और 17 अक्टूबर को पुनः आरंभ होकर 24 अक्टूबर को स्थगित हुई।

परामर्श के प्रयासों का ब्यौरा

रिजिजू ने अपने पत्र में दर्ज किया कि उन्होंने खड़गे को 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को लिखित रूप से पत्र भेजे। इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत बातचीत भी की गई। मानसून सत्र के दौरान वे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी मिले और सहयोग माँगा।

गौरतलब है कि बार बार अनुरोध के बावजूद कांग्रेस की ओर से चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी गई। इसके बाद सरकार ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), समाजवादी पार्टी (SP), वाईएसआरसीपी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), शिवसेना (UBT), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल (BJD) सहित कई दलों से अलग अलग परामर्श किया।

सरकार का विपक्ष से आह्वान

रिजिजू ने पत्र में लिखा, "ऐसे में समझ नहीं आता कि बार बार परामर्श की माँग क्यों की जा रही है, जबकि सरकार पहले ही लगातार प्रयास कर चुकी है। अब विपक्ष से रचनात्मक सहयोग की आवश्यकता है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस महत्वपूर्ण कानूनों के रास्ते में बाधा नहीं डालेगी।

आगे की राह

परिसीमन संशोधन विधेयक पर केंद्र और विपक्ष के बीच यह गतिरोध संसद के आगामी कार्यक्रम को सीधे प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वदलीय सहमति के बिना ऐसे संवेदनशील संवैधानिक संशोधन को पारित कराना राजनीतिक रूप से जटिल हो सकता है। अब सबकी नज़रें कांग्रेस की अगली प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐतिहासिक नज़ीरें, बहुदलीय परामर्श का ब्यौरा — लेकिन यह इस मूल सवाल का जवाब नहीं देता कि परिसीमन जैसे संवेदनशील संवैधानिक मुद्दे पर केवल प्रक्रियागत अनुपालन पर्याप्त है या नहीं। कांग्रेस का विरोध रणनीतिक भी हो सकता है, लेकिन यह तथ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि दक्षिणी राज्य — जो जनगणना आधारित परिसीमन में अपनी सीटें घटती देख रहे हैं — इस बिल को लेकर गहरी आशंका में हैं। सरकार ने DMK और BJD जैसे क्षेत्रीय दलों से परामर्श का उल्लेख किया है, लेकिन उन परामर्शों के नतीजे सार्वजनिक नहीं किए। वास्तविक सहमति और प्रक्रियागत सूचना में फर्क होता है — और यही फर्क इस विधेयक की संसदीय यात्रा तय करेगा।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिसीमन संविधान संशोधन विधेयक क्या है?
परिसीमन संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ पुनर्निर्धारित करने से संबंधित संवैधानिक संशोधन का प्रस्ताव है। यह विधेयक 2026 के संसद सत्र में चर्चा और मतदान के लिए सूचीबद्ध है तथा केंद्र विपक्ष विवाद का केंद्र बना हुआ है।
किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र क्यों लिखा?
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की माँग की थी। इसके जवाब में संसदीय कार्यमंत्री रिजिजू ने 19 अक्टूबर को पत्र लिखकर बताया कि सरकार मार्च 2026 से ही लगातार विपक्ष से परामर्श करती रही है।
सरकार ने किन किन दलों से परामर्श किया है?
रिजिजू के अनुसार कांग्रेस की ओर से चर्चा की तारीख न मिलने के बाद सरकार ने DMK, समाजवादी पार्टी, वाईएसआरसीपी, NCP, शिवसेना (UBT), AIMIM और BJD सहित कई दलों से अलग अलग परामर्श किया। इसके अलावा लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी मानसून सत्र के दौरान व्यक्तिगत बातचीत की गई।
क्या संसद का 64 दिन से स्थगित न होना संवैधानिक अनियमितता है?
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। उन्होंने 1963 से 2008 तक के कई उदाहरण देते हुए बताया कि 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 और 2013 में 49 49 दिन तक सदन स्थगित नहीं हुआ था।
अब इस विधेयक पर आगे क्या होगा?
सरकार ने कांग्रेस से रचनात्मक सहयोग की अपील की है और उम्मीद जताई है कि विपक्ष महत्वपूर्ण कानूनों में बाधा नहीं डालेगा। विधेयक की संसदीय प्रगति काफी हद तक कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों की अगली प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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