रिजिजू का खड़गे को पत्र: परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस से मांगा रचनात्मक सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 19 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक विस्तृत पत्र लिखकर परिसीमन संशोधन विधेयक पर सरकार के परामर्श प्रयासों का पूरा ब्यौरा दिया। पत्र में रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार ने विपक्ष — विशेष रूप से कांग्रेस — से बार-बार सहयोग मांगा, लेकिन पार्टी ने चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी।
पत्र लिखने की पृष्ठभूमि
16 अक्टूबर 2026 को खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन संशोधन पर संसद में विचार से पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की थी। इसी पत्र के जवाब में रिजिजू ने अपना पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से परामर्श के लिए पहले ही व्यापक प्रयास किए जा चुके हैं और इस तथ्य को 'रिकॉर्ड पर रखना' ज़रूरी है।
रिजिजू ने खड़गे के इस दावे का भी खंडन किया कि 13 अगस्त 2026 को अनिश्चित काल के लिए स्थगन के बाद 64 दिन बीतने के बावजूद सदन का सत्रावसान न होना संवैधानिक या प्रक्रियात्मक अनियमितता है।
सत्रावसान पर संवैधानिक स्पष्टीकरण
मंत्री ने पत्र में तर्क दिया कि संविधान में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है जो यह तय करे कि अनिश्चित काल के स्थगन के कितने दिनों के भीतर सत्रावसान अनिवार्य हो। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण भी दिए — 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 में 49 दिन, 2013 में 49 दिन और 1963 में 41 दिन बिना सत्रावसान के सदन चला।
उन्होंने 2008 का उदाहरण भी सामने रखा, जब 21-22 जुलाई को विश्वास प्रस्ताव पर बैठक के बाद सत्रावसान नहीं हुआ और 17 अक्टूबर 2008 को सदन की बैठक पुनः बुलाई गई — यानी उस बार 87 दिन तक सत्रावसान नहीं हुआ।
परामर्श के प्रयासों का ब्यौरा
रिजिजू ने पत्र में बताया कि उन्होंने खड़गे को 16 मार्च 2026, 26 मार्च 2026 और 12 अप्रैल 2026 को लिखित पत्र भेजे और व्यक्तिगत रूप से भी चर्चा की। इसके अतिरिक्त, मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी सीधी मुलाकात कर सहयोग माँगा गया।
कांग्रेस के बार-बार अनुत्तरित रहने के बाद सरकार ने अन्य दलों से संपर्क किया। इनमें द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), समाजवादी पार्टी (SP), वाईएसआरसीपी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), शिवसेना (UBT), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल (BJD) शामिल हैं।
रिजिजू की कांग्रेस से अपील
पत्र के अंत में रिजिजू ने कहा कि सरकार संसदीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सभी दलों की भागीदारी को महत्व देती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस 'रचनात्मक भूमिका निभाएगी और भविष्य में आने वाले महत्वपूर्ण कानूनों के रास्ते में बाधा नहीं डालेगी।'
गौरतलब है कि परिसीमन संशोधन विधेयक दक्षिणी राज्यों में विशेष रूप से संवेदनशील मुद्दा है, जहाँ विपक्षी दल इस आशंका से चिंतित हैं कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन से उनकी संसदीय सीटें घट सकती हैं। ऐसे में आगामी संसद सत्र में इस विधेयक का भाग्य काफी हद तक विपक्षी एकजुटता पर निर्भर करेगा।