मनसुख मांडविया लद्दाख के फोब्रंग पहुंचे, युवाओं से बोले — विकसित भारत 2047 के सबसे बड़े भागीदार बनें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 28 जून 2025 को लद्दाख के चांगथांग जिले के सुदूर सीमावर्ती गांव फोब्रंग का दौरा किया और विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीवीपी) के प्रतिभागियों से सीधा संवाद किया। यह दौरा 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना को देश के सबसे दूरस्थ कोनों तक पहुंचाने की केंद्र सरकार की रणनीति का हिस्सा है।
कार्यक्रम का आयोजन और उपस्थिति
फोब्रंग के कम्युनिटी हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में एमवाई भारत लद्दाख की राज्य निदेशक ताजामुल आरा, चांगथांग के उपायुक्त नीतीश राजोरा, भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के अधिकारी, नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाली एक रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई।
मांडविया का युवाओं को संदेश
मांडविया ने युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की 'विकसित भारत-2047' परिकल्पना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत के युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं और स्वतंत्रता शताब्दी वर्ष तक देश को एक विकसित राष्ट्र में बदलने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने बताया कि देश का लक्ष्य गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से एक लाख युवा नेताओं को तैयार करना है, जो सेवा, नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का नेतृत्व करेंगे। मांडविया ने सभी युवाओं से 'माई भारत पोर्टल' पर पंजीकरण कराने और राष्ट्र निर्माण की पहलों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि 32 करोड़ से अधिक युवा पहले ही इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
संजय सेठ की बात — सीमावर्ती गांव हैं 'पहले गांव'
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने वीवीवीपी जैसे कार्यक्रमों की परिकल्पना के लिए प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के सीमावर्ती गांव देश के अंतिम नहीं बल्कि पहले गांव हैं, जो राष्ट्र की शक्ति, साहस और पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सेठ ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और सेवा का संदेश अपने-अपने राज्यों में ले जाएं और अधिक से अधिक युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करने तथा उनके विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करें।
प्रतिभागियों के अनुभव और पर्यावरण पहल
कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने फोब्रंग के स्थानीय समुदायों के साथ रहने और संवाद करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इस कार्यक्रम को एक परिवर्तनकारी यात्रा बताया, जिसने उनकी देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
राष्ट्रव्यापी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत कम्युनिटी हॉल के बाहर एक पौधरोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें मंत्रियों, अधिकारियों, प्रतिभागियों और स्थानीय निवासियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता जताई।
आगे की राह
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने को प्राथमिकता दे रही है। वीवीवीपी जैसे कार्यक्रम भविष्य में देश के अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी विस्तारित किए जाने की संभावना है, जिससे युवाओं और सीमावर्ती समुदायों के बीच भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव और गहरा होगा।