वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: रक्षा खडसे का लद्दाख सीमावर्ती गांवों में तीन दिवसीय दौरा संपन्न
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने 11 से 13 जून 2026 तक लद्दाख के रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का तीन दिवसीय दौरा पूरा किया। यह दौरा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य उत्तरी सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढाँचे, युवा सशक्तीकरण और समुदाय-आधारित विकास को गति देना है। इस दौरे ने सीमावर्ती इलाकों तक विकास की पहुँच सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
मुख्य घटनाक्रम
दौरे के पहले दिन 11 जून को मंत्री खडसे ने लेह स्थित प्रसिद्ध हॉल ऑफ फेम में देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का साहस, अनुशासन और देशभक्ति प्रत्येक नागरिक को प्रेरित करती है और राष्ट्र के संकल्प को दृढ़ करती है। उन्होंने सेना की बहादुरी, बलिदान और ऑपरेशनल उपलब्धियों को दर्शाने वाली प्रदर्शनियों का भी अवलोकन किया।
दूसरे दिन 12 जून को मंत्री ने सीमावर्ती गांव हेम्या का दौरा किया, जहाँ 'माई भारत' के तत्वावधान में उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों ने लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वाइब्रेंट विलेज पहल से जुड़े युवा प्रतिभागियों ने सीमावर्ती गांवों में विकास के अवसरों को लेकर अपने अनुभव और विचार साझा किए।
सुरक्षा बलों से संवाद
मंत्री खडसे ने आईटीबीपी कैंप का दौरा कर वहाँ तैनात अधिकारियों और जवानों से सीधा संवाद किया। हिमवीरों को संबोधित करते हुए उन्होंने देश के कुछ सबसे कठिन ऑपरेशनल परिस्थितियों में उनकी असाधारण सेवा और समर्पण की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आईटीबीपी की भूमिका केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बल विकास कार्यों में सहयोग, संपर्क सुलभ बनाने और सीमावर्ती समुदायों में विश्वास मजबूत करने में भी अहम योगदान देता है।
इस अवसर पर मंत्री ने डीआईजी आईटीबीपी ताशी नामग्याल, डिप्टी कमांडेंट प्रियंजन, गांव के सरपंच और स्थानीय कलाकारों को सामुदायिक विकास, युवा जुड़ाव और राष्ट्रीय एकीकरण में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया।
युवा सशक्तीकरण पर जोर
मंत्री ने गांव के सरपंच के निवास पर 'माई भारत' के स्वयंसेवकों, युवा प्रतिभागियों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों के साथ अनौपचारिक संवाद किया। इस चर्चा में युवा सशक्तीकरण, कौशल विकास, खेलों में भागीदारी और समुदाय-नेतृत्व वाले विकास के अवसरों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। गौरतलब है कि 'माई भारत' मंच दूर-दराज के सीमावर्ती इलाकों में युवाओं को राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए तेजी से सक्रिय हो रहा है।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव
दौरे के अंतिम दिन 13 जून को मंत्री खडसे ने पवित्र थिकसे मठ का दर्शन किया और सुबह की प्रार्थना में भाग लिया। उन्होंने मठवासी समुदाय के सदस्यों से भेंट की और देश की शांति, समृद्धि एवं निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की। यह यात्रा का वह पहलू था जिसने स्थानीय आस्था और संस्कृति के प्रति सरकार के सम्मान को दर्शाया।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य
मंत्री खडसे ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत के सीमावर्ती गांव देश के पहले गांव और विकास के द्वार के रूप में उभर रहे हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में युवाओं को खेल, कौशल विकास, सामुदायिक भागीदारी और राष्ट्र-निर्माण की पहल के माध्यम से सशक्त बनाना सरकार की मुख्य प्राथमिकता बनी हुई है।' उन्होंने आगे कहा कि 'माई भारत' और 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' जैसी पहलों के ज़रिए सीमावर्ती युवाओं को विकसित भारत-2047 के सपने से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।
यह तीन दिवसीय दौरा स्थानीय समुदाय, युवा संगठनों, प्रशासन और सुरक्षा बलों को एकजुट कर सीमावर्ती विकास के प्रति सरकार के समन्वित दृष्टिकोण का व्यावहारिक उदाहरण बना। आने वाले समय में इस कार्यक्रम के विस्तार और अन्य सीमावर्ती राज्यों में इसके अनुप्रयोग पर नज़र रहेगी।