PM मोदी 26 जुलाई को विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के 400+ युवा प्रतिभागियों से करेंगे संवाद
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 जुलाई 2026 को शाम 4:30 बजे IST वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के प्रतिभागियों से सीधा संवाद करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई है। यह कार्यक्रम 'माई भारत' (MY Bharat) मंच के ज़रिए संचालित है और इसका मूल उद्देश्य भारत के सीमावर्ती गाँवों को 'विकसित भारत' की यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाना है।
कार्यक्रम की संरचना और दायरा
विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 का आयोजन दो चरणों में 4 से 30 जून 2026 के बीच किया गया। इसमें लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 सीमावर्ती गाँवों को शामिल किया गया। देशभर के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक युवाओं का चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से हुआ, जिसमें 3 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया।
प्रतिभागियों की ज़मीनी गतिविधियाँ
कार्यक्रम के दौरान युवा प्रतिभागियों ने सीमावर्ती समुदायों के साथ रहकर अनेक गतिविधियों में हिस्सा लिया — जिनमें स्वच्छता अभियान, सरकारी योजनाओं पर जागरूकता अभियान, युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, वृक्षारोपण, मिनी मॉडल पंचायत सिमुलेशन, स्थानीय कारीगरों से मुलाकात और रणनीतिक महत्व के संस्थानों के दौरे शामिल थे। PMO के अनुसार, इस अनुभव ने प्रतिभागियों को सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य, सांस्कृतिक विरासत और विकासात्मक आकांक्षाओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराया।
सरकार का दृष्टिकोण
PMO ने स्पष्ट किया है कि यह पहल प्रधानमंत्री मोदी के उस व्यापक विज़न का हिस्सा है जिसके तहत सीमावर्ती गाँवों को 'देश के पहले गाँव' मानकर उन्हें राष्ट्र-निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे और सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दे रही है। गौरतलब है कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम मूल रूप से 2023 में शुरू किया गया था और अब इसका विस्तारित संस्करण युवाओं को सीधे इस प्रक्रिया से जोड़ रहा है।
आगे क्या
प्रधानमंत्री के साथ इस संवाद में युवा प्रतिभागी अपने ज़मीनी अनुभव साझा करेंगे। इससे न केवल नीति-निर्माण को फीडबैक मिलने की उम्मीद है, बल्कि सीमावर्ती गाँवों के रणनीतिक और विकासात्मक महत्व को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी। यह कार्यक्रम 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में सीमावर्ती समुदायों को सक्रिय भूमिका देने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।