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विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026: PM मोदी से युवाओं ने साझा किए सीमावर्ती गांवों के अनुभव

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विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026: PM मोदी से युवाओं ने साझा किए सीमावर्ती गांवों के अनुभव

सारांश

विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 में माई भारत स्वयंसेवकों ने PM मोदी को सीमावर्ती हिमालयी गांवों के अनुभव सुनाए। दिव्यांशु जोशी ने कहा — जेन जी का मतलब राष्ट्र प्रथम है। निकिता ने धार गांव की महिला सरपंच की कहानी सुनाई। मोदी ने दिवाली 2016 में चांगो गांव की अपनी यात्रा याद की।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के प्रतिभागियों से संवाद किया।
माई भारत स्वयंसेवक दिव्यांशु जोशी ने कहा — जेन जी का अर्थ है राष्ट्र प्रथम ; सीमावर्ती गांवों के अनुभवों की सार रिपोर्ट शीघ्र PM को सौंपी जाएगी।
एलएलबी छात्रा निकिता ने धार गांव की यात्रा का अनुभव साझा किया — महिला सरपंच घर, खेती और नौकरी एक साथ संभाल रही थी।
PM मोदी ने बताया कि दिवाली 2016 में वे सीमा से लगे चांगो गांव गए थे।
युवाओं के अनुभवों का दस्तावेजीकरण डायरी के रूप में किया गया, जिसे विस्तृत रिपोर्ट में संकलित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के प्रतिभागियों से सीधा संवाद किया। इस संवाद में 'माई भारत' के स्वयंसेवकों ने देश के सीमावर्ती गांवों में बिताए अपने अनुभव साझा किए और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे।

युवाओं का संकल्प: राष्ट्र प्रथम

दिव्यांशु जोशी ने समस्त माई भारत स्वयंसेवकों की ओर से प्रधानमंत्री को विश्वास दिलाया कि जेनरेशन-Z विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए पूर्णतः समर्पित है। उन्होंने कहा, 'हमारे लिए जेन जी का मतलब केवल एक पीढ़ी नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण, चरित्र-निर्माण, सेवा और नवाचार है। यानी जेन जी का अर्थ है — राष्ट्र प्रथम।'

दिव्यांशु ने यह भी बताया कि सीमावर्ती गांवों की यात्रा के दौरान सभी युवाओं ने अपने अनुभवों का दस्तावेजीकरण किया और उन्हें डायरी में दर्ज किया। इन सभी अनुभवों को एक विस्तृत सार रिपोर्ट के रूप में संकलित कर शीघ्र ही प्रधानमंत्री के साथ साझा किया जाएगा।

हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों से निकिता का अनुभव

एलएलबी की छात्रा निकिता ने सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्रों की अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एक युवा महिला के रूप में दुर्गम पहाड़ी इलाकों की यात्रा उनके लिए नई और चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

निकिता ने कहा, 'मैं वहाँ मेहमान नहीं रही, बल्कि परिवार का हिस्सा बन गई। लोगों ने मुझे अपनी बेटी की तरह अपनाया। मुझे भारत की उन बेटियों पर गर्व है जो निडर होकर देश के सबसे दूरस्थ हिमालयी क्षेत्रों तक पहुँच रही हैं और नए अनुभव लेकर लौट रही हैं। यह केवल सड़क संपर्क में बदलाव नहीं, बल्कि समाज की सोच में भी परिवर्तन का प्रतीक है।'

धार गांव के दौरे के दौरान निकिता ने महिला सरपंच, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, महिला किसानों, गांव के बुजुर्गों और बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि महिला प्रधान घर की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ खेती और नौकरी भी संभाल रही थी।

PM मोदी ने साझा किया चांगो गांव का अनुभव

निकिता के अनुभवों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'निकिता जी, आपको शायद पता होगा कि मैं हर दिवाली पर सीमा पर तैनात हमारे जवानों के बीच जाता हूँ। संयोग से दिवाली 2016 में मैं भी सीमा से लगे चांगो गांव गया था।' मोदी की यह टिप्पणी सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रति उनके व्यक्तिगत जुड़ाव को दर्शाती है।

विकसित भारत में युवाओं की भूमिका

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने युवाओं के अनुभवों की सराहना की और विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रही है। गौरतलब है कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएँ, आजीविका के अवसर और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है। माई भारत स्वयंसेवकों की यह पहल उस दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि माई भारत स्वयंसेवकों की डायरी और सार रिपोर्ट नीति-निर्माण में कितनी जगह पाती है। सीमावर्ती गांवों में युवाओं की उपस्थिति सराहनीय है, पर यह भी देखना होगा कि इन अनुभवों का ठोस परिणाम — बुनियादी ढाँचे में सुधार, रोज़गार, कनेक्टिविटी — ज़मीन पर कब और कैसे दिखता है। जेन जी की 'राष्ट्र प्रथम' भावना को संस्थागत ढाँचे का समर्थन मिले, तभी यह एक पीढ़ी की पहचान बन सकती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 क्या है?
यह केंद्र सरकार का एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएँ, आजीविका के अवसर और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। 27 जुलाई 2026 को PM मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए इस कार्यक्रम के माई भारत स्वयंसेवकों से सीधा संवाद किया।
माई भारत स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम में क्या किया?
माई भारत स्वयंसेवकों ने सीमावर्ती हिमालयी गांवों की यात्रा की और अपने अनुभवों को डायरी में दर्ज किया। इन अनुभवों को एक विस्तृत सार रिपोर्ट के रूप में संकलित कर शीघ्र ही प्रधानमंत्री के साथ साझा किया जाएगा।
दिव्यांशु जोशी ने 'जेन जी का मतलब राष्ट्र प्रथम' से क्या आशय रखा?
दिव्यांशु जोशी ने कहा कि उनकी पीढ़ी के लिए जेनरेशन-Z का अर्थ केवल एक आयु-वर्ग नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण, चरित्र-निर्माण, सेवा और नवाचार है। उनका संदेश था कि यह पीढ़ी विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए समर्पित है।
PM मोदी ने चांगो गांव का ज़िक्र क्यों किया?
निकिता के हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों के अनुभव सुनकर PM मोदी ने बताया कि दिवाली 2016 में वे स्वयं सीमा से लगे चांगो गांव गए थे। यह उल्लेख सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रति उनके व्यक्तिगत जुड़ाव को रेखांकित करता है।
निकिता ने धार गांव की महिला सरपंच के बारे में क्या बताया?
निकिता ने बताया कि धार गांव की महिला सरपंच घर की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ खेती और नौकरी भी एक साथ संभाल रही थी। उन्होंने इसे समाज की सोच में बदलाव का प्रतीक बताया और कहा कि ऐसी निडर बेटियाँ नए भारत की पहचान हैं।
राष्ट्र प्रेस
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