राज्यसभा में 'लुंगी वाला' विवाद: सांसद जॉन ब्रिटास की शिकायत पर सभापति राधाकृष्णन करेंगे सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा में बुधवार, 12 अगस्त को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई (एम) — के सांसद जॉन ब्रिटास ने सदन में गंभीर आरोप लगाया कि एक सदस्य ने उन्हें बार-बार 'लुंगी वाला' कहकर संबोधित किया। ब्रिटास ने इसे सदन की गरिमा और देश की सांस्कृतिक विविधता के प्रति अपमान बताया। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मामले का स्वयं निपटारा करने का आश्वासन देते हुए संबंधित सदस्यों को अपने कक्ष में बुलाने की घोषणा की।
सदन में क्या हुआ
ब्रिटास ने कहा, 'भारी मन से मैं यह मुद्दा उठा रहा हूं, क्योंकि यह इस सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और सम्मान का सवाल है। यह किसी एक दल का नहीं, बल्कि सभी दलों से जुड़ा मुद्दा है।' उनके अनुसार, जिस समय वह एक वैधानिक प्रस्ताव के प्रस्तावक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, उसी दौरान एक सदस्य ने उन्हें बार-बार 'लुंगी वाला, लुंगी वाला' कहकर टोका।
ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि वह एक गर्वित भारतीय, दक्षिण भारतीय और मलयाली हैं, और अपनी भाषा, संस्कृति, खान-पान एवं पहनावे पर उन्हें गर्व है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान देश की विविधता का सम्मान करता है और यही विविधता राष्ट्रीय एकता की नींव है।
सभापति की प्रतिक्रिया
जब ब्रिटास ने स्वयं को 'दक्षिण भारतीय' कहा, तो सभापति राधाकृष्णन ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में कोई दक्षिण या उत्तर भारतीय नहीं होता — 'हम सभी सिर्फ भारतीय हैं।' सभापति ने सदस्यों को नसीहत दी कि वे एक-दूसरे की भावनाओं और संवेदनाओं का सम्मान करें।
राधाकृष्णन ने कहा कि सदन में भाषण के दौरान असम्मानजनक और अशोभनीय टिप्पणियों के कई मामले उनके संज्ञान में आए हैं। उन्होंने कहा, 'माननीय सदस्यों को बहुत सावधान रहना चाहिए कि वे साथी सदस्यों की भावनाओं और संवेदनाओं को ठेस न पहुंचाएं। हमारी संस्कृति अनूठी है और यह विभिन्न क्षेत्रीय संस्कृतियों से मिलकर बनी है।'
संसदीय कार्य मंत्री का सुझाव
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभापति से अनुरोध किया कि संबंधित सदस्य को बुलाकर दोनों पक्षों की बात सुनी जाए और उसके बाद उचित निर्णय लिया जाए। रिजिजू ने कहा, 'आप संबंधित माननीय सदस्य को बुला सकते हैं और उनकी बात भी सुन सकते हैं। इसके बाद आप जो निर्णय उचित समझें, वह ले सकते हैं।'
विविधता और सदन की गरिमा का सवाल
ब्रिटास ने इस प्रसंग को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि सदन से विदाई के समय उनकी सबसे बड़ी सीख विविधता होगी। उन्होंने कहा, 'यही विविधता इस देश की एकता को एक अनूठे तरीके से कायम रखती है।' यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब संसद के मानसून सत्र में विभिन्न मुद्दों पर सदन का माहौल पहले से तनावपूर्ण रहा है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब संसद में किसी सदस्य की क्षेत्रीय पहचान या पहनावे को लेकर विवाद उठा हो। सभापति ने स्पष्ट किया कि वह संबंधित सदस्यों को जल्द ही अपने कक्ष में बुलाकर इस मामले का निपटारा करेंगे।