12 अगस्त 2026
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'लुंगीवाला' विवाद: राज्यसभा में सुष्मिता देव का स्पष्टीकरण — वेशभूषा पर कोई टिप्पणी नहीं की

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'लुंगीवाला' विवाद: राज्यसभा में सुष्मिता देव का स्पष्टीकरण — वेशभूषा पर कोई टिप्पणी नहीं की

सारांश

राज्यसभा में 'लुंगीवाला' कहे जाने की शिकायत पर BJP सांसद सुष्मिता देव ने स्पष्ट किया कि उन्होंने वेशभूषा पर कोई टिप्पणी नहीं की। असम से आने वाली देव ने सांस्कृतिक एकता पर जोर दिया, जबकि जेपी नड्डा ने दोनों सांसदों को बातचीत के लिए अपने कक्ष में आमंत्रित किया।

मुख्य बातें

सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने राज्यसभा में आरोप लगाया कि एक सदस्य ने उन्हें कथित तौर पर 'लुंगीवाला' कहकर संबोधित किया।
BJP सांसद सुष्मिता देव ने सदन में स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी व्यक्ति, राज्य, संस्कृति या वेशभूषा पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की।
देव ने कहा कि वह असम की बंगाली हैं और पूर्वोत्तर की विविध वेशभूषा से भलीभाँति परिचित हैं।
सदन के नेता जेपी नड्डा ने दोनों सांसदों को अपने कक्ष में बुलाकर गलतफहमी दूर करने की पेशकश की।
ब्रिटास ने इस मुद्दे को सदन की गरिमा और प्रतिष्ठा से जुड़ा बताया, न कि केवल व्यक्तिगत मामला।

राज्यसभा में 12 अगस्त 2026 को उस समय तनाव का माहौल बन गया जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि सदन में एक सदस्य ने उन्हें कथित तौर पर 'लुंगीवाला' कहकर संबोधित किया। इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद सुष्मिता देव ने सदन में स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी व्यक्ति, राज्य या वहाँ की संस्कृति व वेशभूषा पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की। सदन के नेता जेपी नड्डा ने दोनों सदस्यों को अपने कक्ष में बुलाकर आपसी गलतफहमी दूर करने का सुझाव दिया।

विवाद की पृष्ठभूमि

सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि वह भारी मन से यह बात सामने रख रहे हैं। उनके अनुसार, यह विषय केवल उनका व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, "यह किसी एक दल का नहीं, बल्कि सभी दलों से जुड़ा मुद्दा है।" ब्रिटास की इस आपत्ति ने सदन में हलचल मचा दी।

सुष्मिता देव का स्पष्टीकरण

BJP सांसद सुष्मिता देव ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि वह यह तथ्य रिकॉर्ड पर रखना चाहती हैं कि सदन से ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए कि कोई सदस्य भारत को सांस्कृतिक या धार्मिक आधार पर विभाजित करना चाहता है। उन्होंने कहा, "मैं स्वयं असम से आती हूँ। मैं असम की बंगाली हूँ। मैंने पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों को देखा है, जहाँ हम अलग-अलग तरह की पोशाक और वेशभूषा पहनते हैं, इसलिए न तो मैंने और न ही किसी सदस्य ने कभी किसी राज्य की वेशभूषा पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की है।"

देव ने यह भी कहा कि यदि ब्रिटास को लगता है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से बातचीत करनी चाहिए, तो वह उसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने जोड़ा, "मैं केरल, पूर्वोत्तर और कर्नाटक के लोगों से प्रेम करती हूँ।" उनके अनुसार, इस पूरे मामले को किसी क्षेत्र, भाषा, संस्कृति या वेशभूषा के बीच विभाजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

नड्डा की मध्यस्थता की पेशकश

राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने दोनों सांसदों को अपने कक्ष में आमंत्रित करते हुए कहा, "दोनों सदस्य अगर मेरे कक्ष में आ जाएंगे तो आपस में जो भ्रम और गलतफहमी हुई है, उसे हम स्पष्ट कर सकेंगे और आप दोनों के बीच अच्छे और सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित हो सकेंगे।" नड्डा ने सदन में सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

व्यापक संदर्भ और सदन की गरिमा

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव पहले से बना हुआ है। गौरतलब है कि वेशभूषा या क्षेत्रीय पहचान से जुड़ी टिप्पणियाँ सदन में पहले भी विवाद का कारण बनी हैं। इस प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि संसदीय चर्चाओं में भाषाई और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का किस हद तक ध्यान रखा जाता है। दोनों पक्षों की बात सदन के रिकॉर्ड पर आने के बाद अब नड्डा की मध्यस्थता से इस विवाद के सुलझने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में यह संसदीय शिष्टाचार और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति के बीच की खाई को उजागर करता है। सुष्मिता देव का स्पष्टीकरण भले ही तथ्यात्मक हो, लेकिन यह सवाल बना रहता है कि 'लुंगीवाला' शब्द का प्रयोग किसने और किस संदर्भ में किया — जिसकी जाँच सदन ने औपचारिक रूप से नहीं की। नड्डा की मध्यस्थता की पेशकश सौहार्द की दृष्टि से सराहनीय है, परंतु यह विवाद को रिकॉर्ड पर सुलझाने की बजाय कक्ष की चारदीवारी में समेटने का प्रयास भी है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि संसद में क्षेत्रीय या सांस्कृतिक पहचान पर की गई टिप्पणियाँ अक्सर बिना जवाबदेही के दब जाती हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यसभा में 'लुंगीवाला' विवाद क्या है?
सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में आरोप लगाया कि एक सदस्य ने उन्हें कथित तौर पर 'लुंगीवाला' कहकर संबोधित किया। उन्होंने इसे सदन की गरिमा और प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बताया।
सुष्मिता देव ने राज्यसभा में क्या स्पष्ट किया?
BJP सांसद सुष्मिता देव ने सदन में कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति, राज्य, संस्कृति या वेशभूषा पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं असम की हैं और पूर्वोत्तर की विविधता का सम्मान करती हैं।
जेपी नड्डा ने इस विवाद पर क्या कहा?
राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने दोनों सांसदों — जॉन ब्रिटास और सुष्मिता देव — को अपने कक्ष में आमंत्रित किया ताकि आपसी भ्रम और गलतफहमी दूर की जा सके। उन्होंने सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर दिया।
जॉन ब्रिटास ने यह मुद्दा क्यों उठाया?
ब्रिटास ने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और सम्मान का सवाल है। उनके अनुसार, यह मुद्दा सभी दलों से जुड़ा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इस विवाद का आगे क्या होगा?
जेपी नड्डा की मध्यस्थता की पेशकश के बाद दोनों सांसदों के बीच बातचीत की संभावना है। सुष्मिता देव ने भी ब्रिटास से व्यक्तिगत बातचीत के लिए तत्परता जताई है, जिससे इस विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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