राज्यसभा में पूर्वोत्तर के छात्रों पर हिंसा और भेदभाव के मुद्दे पर गहरी चिंता
सारांश
Key Takeaways
- हिंसा और भेदभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
- राज्यसभा में नबाम रेविआ ने मुद्दा उठाया।
- पूर्वोत्तर के छात्रों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव की घटनाएं हुईं।
- कड़े कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
- समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा में पूर्वोत्तर के छात्रों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और भेदभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। भाजपा के राज्यसभा सांसद नबाम रेविआ ने इस मुद्दे को उठाया और दिल्ली तथा देहरादून में घटित घटनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि 2014 में दिल्ली के लाजपत नगर में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नीडो तानिया की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हाल ही में देहरादून में एक अन्य छात्र एंजेल चकमा की भी हत्या की गई।
इस घटना के बाद, इस विषय ने एक बार फिर गंभीरता से ध्यान आकर्षित किया। रेविआ ने कहा कि मालवीय नगर में अरुणाचल प्रदेश की तीन छात्राओं के साथ नस्लीय भेदभाव का मामला सामने आया था। ये छात्राएं संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। उन्हें गलत तरीके से ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली बताकर अपमानित किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई लड़की ब्यूटी पार्लर में काम करती है, तो ऐसा करने में क्या गलत है? उन्होंने पूर्वोत्तर के लोगों के भिन्न शारीरिक स्वरूप के कारण होने वाले भेदभाव और भ्रांतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह के नस्लीय पूर्वाग्रह समाज में असुरक्षा और अलगाव की भावना को बढ़ाते हैं।
उन्होंने बताया कि नीडो तानिया मामले के बाद, सांसद एम.पी. बेजबरुआ की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी थी, लेकिन इस पर कार्रवाई का क्या हुआ, इस पर सरकार से जवाब मांगा। साथ ही, नस्लीय भेदभाव को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस मुद्दे के समाधान के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं।
इन सुझावों में शामिल हैं: एनसीईआरटी और सीबीएसई की किताबों में पूर्वोत्तर भारत के बारे में जानकारी प्रदान करना, पुलिस और अन्य सेवाओं में पूर्वोत्तर के युवाओं की भर्ती बढ़ाना, अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करना, नस्लीय भेदभाव से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा करना और पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाना। यह मामला केवल पूर्वोत्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने भी इस विषय पर सहमति जताई और कहा कि सदन इस बात पर नबाम रेविआ से सहमत है।