क्या दिग्गज पत्रकार मार्क टुली का दिल्ली में निधन हो गया?

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क्या दिग्गज पत्रकार मार्क टुली का दिल्ली में निधन हो गया?

सारांश

दिल्ली में मार्क टुली का निधन एक युग का अंत है। 90 वर्ष की आयु में, उन्होंने भारतीय राजनीति और महत्वपूर्ण घटनाओं को अपनी लेखनी से जीवित रखा। आइए, जानें उनके जीवन और कार्यों के बारे में।

Key Takeaways

  • मार्क टुली का निधन 90 वर्ष की आयु में हुआ।
  • उन्होंने बीबीसी में 22 साल तक कार्य किया।
  • उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
  • उनकी कई प्रसिद्ध किताबें हैं।
  • उन्होंने भारतीय राजनीति पर महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग की थी।

नई दिल्ली, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक सर विलियम मार्क टुली का 90 वर्ष की आयु में रविवार को निधन हो गया। उन्हें दुनिया मार्क टुली के नाम से भी जानती थी। उन्होंने 20वीं सदी के अंतिम दशकों में भारत की राजनीति और महत्वपूर्ण घटनाओं पर कवरेज के लिए काफी प्रसिद्धि प्राप्त की थी।

मार्क टुली बीबीसी के पूर्व पत्रकार रहे हैं और उन्होंने अपने पूरे करियर में भारत और दक्षिण एशिया की रिपोर्टिंग की। उन्हें भारत और ब्रिटेन दोनों सरकारों द्वारा सम्मानित किया गया था। वे काफी समय से बीमार चल रहे थे और दक्षिण दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

मार्क टुली का जन्म 24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता के टॉलीगंज में एक समृद्ध ब्रिटिश कारोबारी परिवार में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक पढ़ाई भारत में की, जिसमें दार्जिलिंग के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई भी शामिल थी। नौ वर्ष की आयु में वे ब्रिटेन चले गए। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से धर्मशास्त्र की पढ़ाई की और शुरुआत में चर्च से जुड़ने की योजना बनाई, लेकिन बाद में यह विचार छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता को करियर चुना और 1964 में बीबीसी से जुड़े।

1965 में वे बीबीसी के भारत संवाददाता के रूप में लौटे। बाद में वे बीबीसी के नई दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख बने। अपने 22 साल के कार्यकाल में उन्होंने दक्षिण एशिया की लगभग सभी बड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग की। इनमें भारत-पाकिस्तान युद्ध, ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या, सिख विरोधी दंगे, भोपाल गैस त्रासदी, राजीव गांधी की हत्या और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसी घटनाएं शामिल हैं।

उन्होंने जुलाई 1994 में तत्कालीन महानिदेशक से विवाद के बाद बीबीसी छोड़ दिया। इसके बाद वे नई दिल्ली से स्वतंत्र पत्रकार और प्रसारक के रूप में काम करते रहे। हालांकि, उनका बीबीसी से जुड़ाव बना रहा और वे 2019 तक कुछ कार्यक्रमों में नजर आते रहे।

मार्क टुली एक प्रसिद्ध लेखक भी थे। उनकी प्रमुख किताबों में ‘अमृतसर: मिसेज गांधी की आखिरी लड़ाई’ (1985), ‘राज से राजीव: भारतीय स्वतंत्रता के 40 वर्ष’ (1988), ‘नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया’ (1988), ‘इंडिया इन स्लो मोशन’ (2002), ‘इंडियाज अनएंडिंग जर्नी’ (2008) और ‘इंडिया: द रोड अहेड’ (2011) शामिल हैं।

उनकी चर्चित काल्पनिक रचनाओं में ‘द हार्ट ऑफ इंडिया’ (1995) और ‘अपकंट्री टेल्स’ (2017) शामिल हैं।

मार्क टुली को 1985 में ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर बनाया गया था। भारत सरकार ने उन्हें 1992 में पद्म श्री और 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।

Point of View

बल्कि यह संपूर्ण देश के लिए एक दुखद क्षण है। उनकी रिपोर्टिंग ने कई महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर किया और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

मार्क टुली का योगदान क्या था?
मार्क टुली ने भारतीय राजनीति और महत्वपूर्ण घटनाओं को अपनी लेखनी से जीवित रखा।
उनकी प्रमुख किताबें कौन सी हैं?
उनकी प्रमुख किताबों में ‘अमृतसर: मिसेज गांधी की आखिरी लड़ाई’, ‘राज से राजीव: भारतीय स्वतंत्रता के 40 वर्ष’ शामिल हैं।
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