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कैप्टन रितु कुमारी बनीं विदेशी जहाज की कमान संभालने वाली बिहार की पहली महिला, ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग में भी पहला रिकॉर्ड

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कैप्टन रितु कुमारी बनीं विदेशी जहाज की कमान संभालने वाली बिहार की पहली महिला, ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग में भी पहला रिकॉर्ड

सारांश

नवोदय विद्यालय, राजगीर से निकलकर मुंबई के टीएस चाणक्य तक, और फिर एक अंतर्राष्ट्रीय टैंकर की कमान तक — कैप्टन रितु कुमारी की यह यात्रा सिर्फ एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि उस दो प्रतिशत की दुनिया में दरवाज़ा खोलने की कोशिश है जहां महिलाओं की मौजूदगी आज भी नाममात्र की है।

मुख्य बातें

कैप्टन रितु कुमारी ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी की पहली महिला मास्टर बनीं।
वह टैंकर एमटी जग पवित्रा की कमान संभालने वाली बिहार की दूसरी और विदेशी जहाज पर बिहार की पहली महिला कैप्टन हैं।
समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अभी भी केवल दो प्रतिशत है।
उनकी शिक्षा नवोदय विद्यालय, राजगीर से शुरू होकर टीएस चाणक्य, मुंबई तक पहुंची, जहां उन्होंने बीएससी नॉटिकल साइंस की।
उनका चयन आईआईटी परिणाम के माध्यम से हुआ; उन्होंने अपना पूरा करियर टैंकर जहाजों पर बिताया।

कैप्टन रितु कुमारी ने मर्चेंट नेवी के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। वह ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी की पहली महिला मास्टर बनी हैं और टैंकर जहाज एमटी जग पवित्रा की कमान संभालने वाली बिहार की दूसरी महिला हैं। विदेश जाने वाले जहाजों की कमान संभालने के मामले में वह बिहार की पहली महिला कैप्टन हैं — एक ऐसी उपलब्धि जो समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की नगण्य उपस्थिति को देखते हुए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति

कैप्टन रितु ने कहा, 'भारत में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में काफी महिलाएं आ गई हैं, लेकिन बिहार से मैं दूसरी हूं। विदेश जाने वाले जहाजों में मैं बिहार की पहली महिला कैप्टन हूं।' उन्होंने बताया कि यदि पूरे समुद्री क्षेत्र की बात करें तो इसमें महिलाओं की भागीदारी केवल दो प्रतिशत है। कैप्टन और मुख्य अधिकारी जैसे शीर्ष पदों पर, और चीफ इंजीनियर व सेकंड इंजीनियर जैसे तकनीकी पदों पर अभी भी बहुत कम महिलाएं पहुंच पाई हैं।

करियर की शुरुआत: आनंद सर का 'सुपर-30' और आईआईटी का रास्ता

कैप्टन रितु ने बताया कि शुरुआत में उन्हें मर्चेंट नेवी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वह आनंद सर के यहां ट्यूशन पढ़ती थीं, जहां सुपर-30 बैच चलता था। वहीं सीनियर्स ने उन्हें बताया कि आईआईटी के अलावा भी करियर के विकल्प हैं, और यदि आईआईटी में रैंक पीछे भी आए तो यह एक अच्छा विकल्प है — जिसके लिए अलग से कोई परीक्षा नहीं देनी होती, चयन आईआईटी के परिणाम से ही होता है।

काउंसलिंग के समय उन्हें पता चला कि आईआईटी के माध्यम से तीन कॉलेजों में दाखिला होता था — दो मुंबई में और एक कोलकाता में। मुंबई में रहने की इच्छा के चलते उन्होंने टीएस चाणक्य, मुंबई को चुना, जहां बीएससी नॉटिकल साइंस का तीन वर्षीय पाठ्यक्रम उपलब्ध था।

कॉलेज जीवन और पहला जहाज

रितु ने बताया कि टीएस चाणक्य में पढ़ाई के साथ-साथ सुबह की पीटी, स्विमिंग, खेल, क्विज़ और नाटक जैसी गतिविधियां होती थीं — जो उन्होंने नवोदय विद्यालय, राजगीर में पढ़ते हुए भी की थीं। 'मुझे लगा कि यही वह करियर है जिसकी मैं तलाश कर रही थी, जिसमें किताबी पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा,' उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि वह स्कूल कैप्टन भी रही हैं।

तीन साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पहले जहाज पर नौकरी शुरू की। नाव के जरिए जहाज पर पहुंचने पर वह टैंकर जहाज की विशालता देखकर चकित रह गईं। उन्होंने कहा, 'जहाज पर चढ़ते समय थोड़ी घबराहट भी हुई, लेकिन यही सोचा कि जहां भी जाऊंगी, अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी।' गौरतलब है कि उन्होंने अपने पूरे करियर में केवल टैंकर जहाजों पर ही काम किया है।

बिहार और महिलाओं के लिए प्रेरणा

कैप्टन रितु की यह उपलब्धि ऐसे समय में और भी अहम हो जाती है जब बिहार में समुद्री करियर को लेकर जागरूकता अभी भी सीमित है। उन्होंने कहा कि उनके समय में तो जागरूकता बिल्कुल नहीं थी, और आज भी बहुत से लोगों को इसके बारे में पता नहीं है। यह यात्रा — नवोदय विद्यालय, राजगीर से लेकर एक अंतर्राष्ट्रीय टैंकर की कमान तक — बिहार की युवा महिलाओं के लिए एक सशक्त उदाहरण है कि परंपरागत करियर से परे भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां उनकी भागीदारी मात्र दो प्रतिशत है। यह तथ्य कि बिहार जैसे बड़े राज्य से विदेशी जहाजों पर वह पहली महिला कैप्टन हैं, यह दर्शाता है कि जागरूकता और अवसर की खाई अभी गहरी है। सुपर-30 के माहौल से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचना यह भी बताता है कि प्रतिभा की कमी नहीं — रास्ता दिखाने वाले कम हैं। समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी तब बढ़ेगी जब संस्थागत प्रयास, स्कूल स्तर पर जागरूकता और मेंटरशिप एक साथ आएं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैप्टन रितु कुमारी कौन हैं और उन्होंने क्या उपलब्धि हासिल की है?
कैप्टन रितु कुमारी ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी की पहली महिला मास्टर हैं और टैंकर एमटी जग पवित्रा की कमान संभालने वाली बिहार की दूसरी महिला हैं। विदेश जाने वाले जहाजों की कमान के मामले में वह बिहार की पहली महिला कैप्टन हैं।
मर्चेंट नेवी में महिलाओं की भागीदारी कितनी है?
कैप्टन रितु के अनुसार, पूरे समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी केवल दो प्रतिशत है। कैप्टन, मुख्य अधिकारी, चीफ इंजीनियर और सेकंड इंजीनियर जैसे शीर्ष व तकनीकी पदों पर महिलाओं की संख्या अभी भी बहुत कम है।
कैप्टन रितु कुमारी ने मर्चेंट नेवी में करियर कैसे शुरू किया?
उनका चयन आईआईटी परिणाम के माध्यम से हुआ, जिसकी जानकारी उन्हें आनंद सर के सुपर-30 बैच के सीनियर्स से मिली। उन्होंने मुंबई के टीएस चाणक्य संस्थान से बीएससी नॉटिकल साइंस की तीन साल की पढ़ाई की और फिर टैंकर जहाज पर अपना करियर शुरू किया।
कैप्टन रितु की शैक्षिक पृष्ठभूमि क्या है?
उन्होंने नवोदय विद्यालय, राजगीर से स्कूली शिक्षा पूरी की, जहां वह स्कूल कैप्टन भी रहीं। इसके बाद उन्होंने टीएस चाणक्य, मुंबई से बीएससी नॉटिकल साइंस किया। उनका पूरा करियर टैंकर जहाजों पर रहा है।
बिहार में समुद्री करियर को लेकर जागरूकता की क्या स्थिति है?
कैप्टन रितु के अनुसार, उनके समय में बिहार में मर्चेंट नेवी को लेकर जागरूकता बिल्कुल नहीं थी और आज भी बहुत से लोगों को इसके बारे में पता नहीं है। उनकी यात्रा बिहार की युवा महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है कि परंपरागत करियर से परे भी बड़े अवसर उपलब्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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