क्या सोनाली बनर्जी भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर बनीं?

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क्या सोनाली बनर्जी भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर बनीं?

सारांश

सोनाली बनर्जी ने 27 अगस्त, 1999 को भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर बनकर सामाजिक बाधाओं को तोड़ने का अद्भुत कार्य किया। उनकी प्रेरणादायक यात्रा और संघर्ष ने न केवल उन्हें बल्कि अन्य महिलाओं को भी अपने सपनों के प्रति प्रेरित किया।

Key Takeaways

  • सामाजिक बाधाओं को पार करना संभव है।
  • महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
  • सोनाली का संघर्ष प्रेरणादायक है।
  • शिक्षा और महत्वाकांक्षा सफलता की कुंजी हैं।
  • महिलाओं के लिए नए अवसर खोलना आवश्यक है।

नई दिल्ली, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। सोनाली बनर्जी ने 27 अगस्त, 1999 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करते हुए भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर बनने का सम्मान प्राप्त किया। केवल 22 वर्ष की उम्र में, उन्होंने न केवल सामाजिक बाधाओं को पार किया, बल्कि पुरुष-प्रधान मरीन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

इलाहाबाद में जन्मी सोनाली को बचपन से ही समुद्र और जहाजों की दुनिया का गहरा आकर्षण था। उनके चाचा जो नौसेना में थे, उनकी प्रेरणा का स्रोत बने। उनकी रोमांचक कहानियों ने सोनाली के मन में समुद्री यात्राओं का सपना जगाया, जिसे उन्होंने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के माध्यम से पूरा किया।

सोनाली ने 1995 में कोलकाता के तरातला स्थित मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईआरआई) में प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। यह पहला अवसर था जब किसी महिला ने इस संस्थान में दाखिला लिया, जिससे प्रशासन के सामने आवास की समस्या उत्पन्न हुई। उस समय संस्थान में कोई महिला हॉस्टल नहीं था और पूरे परिसर में कोई महिला कर्मचारी भी नहीं थी। लंबे विचार-विमर्श के बाद, सोनाली को शिक्षकों के लिए निर्धारित खाली क्वार्टर में रहने की अनुमति दी गई। 1500 कैडेट्स में वह अकेली महिला थीं, और उन्हें पुरुष-प्रधान माहौल में अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी।

सोनाली ने हर सेमेस्टर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और 1999 में अपनी बी.ई. डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्हें छह महीने के प्री-सी प्रशिक्षण के लिए मोबिल शिपिंग कंपनी ने चुना। यह प्रशिक्षण उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण अनुभव था, क्योंकि शुरू में कोई भी शिपिंग कंपनी उन्हें प्रशिक्षु के रूप में स्वीकार नहीं करना चाहती थी। फिर भी, सोनाली ने हार नहीं मानी और श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, थाईलैंड, हॉन्गकॉन्ग, फिजी और खाड़ी देशों के बंदरगाहों पर प्रशिक्षण पूरा किया। 26 अगस्त, 2001 को, उन्होंने मोबिल शिपिंग कंपनी के जहाज के मशीन रूम की जिम्मेदारी संभालकर एक नया इतिहास रच दिया।

सोनाली की इस उपलब्धि ने भारत के समुद्री उद्योग में एक नया अध्याय जोड़ा। उन्होंने न केवल अपने लिए, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी इस क्षेत्र में अवसर खोले। उनकी सफलता ने कई युवतियों को प्रेरित किया कि वे अपने सपनों को साकार करने के लिए सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दें।

Point of View

बल्कि उन्होंने समाज में महिलाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

सोनाली बनर्जी कब पहली महिला मरीन इंजीनियर बनीं?
सोनाली बनर्जी ने 27 अगस्त, 1999 को भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर बनने का गौरव हासिल किया।
सोनाली बनर्जी का जन्मस्थान क्या है?
सोनाली बनर्जी का जन्म इलाहाबाद में हुआ था।
सोनाली ने किस संस्थान से अपनी शिक्षा प्राप्त की?
सोनाली ने मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईआरआई) से अपनी शिक्षा प्राप्त की।
सोनाली ने अपनी डिग्री कब पूरी की?
सोनाली ने 1999 में अपनी बी.ई. डिग्री पूरी की।
सोनाली ने अपने प्रशिक्षण के लिए किस कंपनी का चयन किया?
सोनाली को मोबिल शिपिंग कंपनी ने प्री-सी प्रशिक्षण के लिए चुना।