पटना में 'नारी शक्ति फॉर विकसित भारत रन' का सफल आयोजन, महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया गया।
- पटना में 'नारी शक्ति फॉर विकसित भारत रन' का आयोजन हुआ।
- महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दौड़ का शुभारंभ किया।
- महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
पटना, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में ‘नारी शक्ति फॉर विकसित भारत रन’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हरी झंडी दिखाकर प्रारंभ किया।
इस दौड़ में शामिल एक महिला ने कहा कि वह महिला आरक्षण विधेयक के जरिए राजनीतिक रूप से सशक्त होने के लिए देश और बिहार की महिलाओं को बधाई देती हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पंचायतीराज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर सशक्त किया है। बिहार जीविका अभियान से भी महिलाएं सशक्त हुईं हैं। अब महिलाएं सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी सशक्त होंगी। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हम ऐसे नेता के साथ काम कर रहे हैं जो महिलाओं के उत्थान के लिए प्रयासरत हैं।
‘नारी शक्ति फॉर विकसित भारत रन’ में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि मातृ शक्ति को अधिकार मिलने वाला है। विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करने की योजना है। इसी के समर्थन में पटना की महिलाएं यहां आई हैं। इस मैराथन के जरिए हम सभी राजनीतिक दलों को यह संदेश देना चाहते हैं कि मातृ शक्ति का सम्मान करें और उनके अधिकारों का संरक्षण करें।
पटना की एक महिला ने कहा कि आधी आबादी को भागीदारी मिली है, लेकिन यह पहली बार है जब उन्हें पीएम मोदी के नेतृत्व में प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा महिलाओं की भलाई के लिए चिंतित रहे हैं।
कॉलेज ऑफ नर्सिंग एनएमसीएच की प्रधानाचार्य डॉ. संध्या सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संबंध में कहा कि सबसे पहले मैं नारी शक्ति का सम्मान करती हूं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी अभिवादन करती हूं। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने नारियों के लिए बहुत काम किया है।
मदन मोहन कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कविजा चौधरी ने बताया कि महिलाओं को मिलने वाला 33 प्रतिशत आरक्षण केवल अधिकार नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, समानता और अधिकार की बात करता है। नारी की कोई सीमा नहीं है, वह हर क्षेत्र में प्रगति कर रही है।