यूपी बोर्ड मेरिट में 138 छात्राएं आगे, सीएम योगी बोले — बेटों को बेटियों से सीखना चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 जून 2025 को लखनऊ के लोकभवन में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में कहा कि प्रदेश की बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में छात्राओं का दबदबा यह साबित करता है कि वे मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटियों की यह सफलता केवल परिवार की नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति की भी बुनियाद है।
मेरिट सूची के आंकड़े
समारोह में यूपी बोर्ड, संस्कृत शिक्षा परिषद, सीबीएसई और आईसीएसई के राज्य स्तरीय कुल 223 मेधावी विद्यार्थियों को ₹1 लाख नकद, टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सीएम योगी ने बताया कि इन 223 विद्यार्थियों में 138 छात्राएं और 85 छात्र हैं। हाईस्कूल की प्रदेश स्तरीय मेरिट सूची के 115 विद्यार्थियों में 81 छात्राएं और 34 छात्र हैं, जबकि इंटरमीडिएट की शीर्ष सूची में 14 छात्राएं और 9 छात्र शामिल हैं। इसके अलावा 11 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
सीएम का संदेश — बेटों के लिए प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि पहले यह माना जाता था कि छात्राएं घरेलू कामकाज में माता-पिता का हाथ बंटाती हैं, लेकिन अब परिणाम देखकर लगता है कि शायद लड़के झाड़ू-पोंछा और घरेलू कार्यों में अधिक व्यस्त हो गए हैं। उन्होंने इसे प्रेरणा का स्रोत बताते हुए कहा कि छात्रों को छात्राओं से यह सीखना चाहिए कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी उत्कृष्ट प्रदर्शन संभव है।
परीक्षा सुधार और पारदर्शिता
योगी ने कहा कि नौ वर्ष पहले ऐसी पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था की कल्पना भी कठिन थी — उस दौर में नकल और शिक्षा माफिया की चर्चा अधिक होती थी। आज उत्तर प्रदेश नकलविहीन, तकनीक-आधारित परीक्षा प्रणाली के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा विद्यार्थियों को भयभीत करने का नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करने का माध्यम होनी चाहिए। प्रॉक्सी अभ्यर्थियों और नकल माफिया के लिए अब कोई जगह नहीं बची है।
मंत्री गुलाब देवी का संबोधन
माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि लाखों विद्यार्थियों के बीच शीर्ष स्थान पाना असाधारण उपलब्धि है और यह सम्मान उनके उज्ज्वल भविष्य की नई शुरुआत है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें, विशेषकर हाईस्कूल की उम्र में जब मार्गदर्शन और संवाद सबसे अधिक जरूरी होता है। गुलाब देवी ने शिक्षकों की भूमिका को समाज-निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।
आगे की राह
यह सम्मान समारोह उत्तर प्रदेश में शैक्षिक सुधारों की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। आंकड़ों के अनुसार, छात्राओं की बढ़ती हिस्सेदारी न केवल लैंगिक समानता की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि राज्य की शिक्षा नीतियाँ जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी हैं। आने वाले वर्षों में इस प्रवृत्ति के और मजबूत होने की उम्मीद है।