पीओके में 37 दिनों से जारी अशांति पर मीरवाइज उमर फारूक ने जताया गहरा दुख, पाकिस्तान से बातचीत की अपील
सारांश
मुख्य बातें
कश्मीर के धर्मगुरु और अलगाववादी नेता मीरवाइज मौलाना उमर फारूक ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार जारी अशांति के दौरान आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। 15 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में उन्होंने विशेष रूप से रावलकोट और पुंछ (पाकिस्तान-अधिकृत क्षेत्रों) में हुई मौतों का उल्लेख किया।
मीरवाइज का बयान
मीरवाइज ने एक्स पर लिखा, 'एलओसी के दूसरी ओर खासकर रावलकोट और पुंछ में जारी अशांति के दौरान आम लोगों और पुलिसकर्मियों की मौत की खबरों से मुझे गहरा दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं पीड़ित परिवारों और इन घटनाओं से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं।'
उन्होंने पाकिस्तान में रह रहे जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक व राजनीतिक दर्जे को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी चिंता ज़ाहिर की। उनके अनुसार, 'पहचान, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर संवेदनशीलता, बातचीत और लोगों के भरोसे की ज़रूरत होती है।'
सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों का हवाला
मीरवाइज ने यह भी कहा कि एलओसी के दोनों ओर मौजूद सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ते इस बात की याद दिलाते हैं कि जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से में होने वाली घटनाओं का असर दूसरे हिस्से और दुनिया भर में रह रहे कश्मीरी समुदाय पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का एलओसी के उस पार रहने वाले लोगों के सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक और राजनीतिक विकास से लंबे समय से जुड़ाव रहा है।
पाकिस्तान सरकार से अपील
मीरवाइज ने पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन से अपील की कि वे बातचीत, संयम और आपसी संपर्क को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा, 'टकराव की जगह बातचीत और आपसी समझ के ज़रिए मतभेदों को सुलझाएं और मानवाधिकारों के साथ-साथ लोगों की जान की सुरक्षा को सबसे अधिक महत्व दें।' उन्होंने विरोध कर रहे सभी पक्षों से समझदारी और ज़िम्मेदारी से काम लेने की भी अपील की।
पीओके में अशांति का 37वाँ दिन
पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में जारी अशांति मंगलवार को लगातार 37वें दिन भी बनी रही। रावलकोट में हज़ारों लोग प्रदर्शन के लिए जुटे। इस दौरान जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तान पर इस इलाके पर जबरन कब्ज़ा करने का आरोप लगाया और इस्लामाबाद के उस दीर्घकालिक दावे को खारिज किया कि यह इलाका पाकिस्तान का हिस्सा है। उन्होंने पीओके को 'विवादित इलाका' मानने से इनकार करते हुए कहा, 'यह कोई विवादित इलाका नहीं है। यह कब्ज़े वाला इलाका है और इस पर जबरन कब्ज़ा किया गया है।'
गौरतलब है कि यह अशांति ऐसे समय में आई है जब पीओके में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक दर्जे को लेकर तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। मीरवाइज ने एलओसी के दोनों ओर रहने वाले जम्मू-कश्मीर के सभी लोगों के लिए स्थायी शांति और इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की प्रार्थना के साथ अपना बयान समाप्त किया।