16 अक्टूबर 2026
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मिथुन रेड्डी पर कथित हमले की निष्पक्ष जांच की मांग, वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

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मिथुन रेड्डी पर कथित हमले की निष्पक्ष जांच की मांग, वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

सारांश

वाईएसआरसीपी सांसद पीवी मिथुन रेड्डी पर पुंगनूर में नामांकन के दौरान कथित पत्थरबाज़ी और पुलिस की हवाई फायरिंग — अब पार्टी ने यह मामला सीधे राष्ट्रपति तक पहुँचाया है। संविधान के अनुच्छेद 21 और 14 का हवाला देते हुए गुरुमूर्ति ने इसे महज़ राज्य स्तरीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संवैधानिक संकट बताया है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर पुंगनूर में कथित हमले की निष्पक्ष जांच की माँग की।
16 अक्टूबर 2026 को स्थानीय निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान पीवी मिथुन रेड्डी और उनके सुरक्षाकर्मियों पर कथित तौर पर पत्थर फेंके गए।
स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी; मिथुन रेड्डी और सुरक्षाकर्मी घायल बताए जा रहे हैं।
गुरुमूर्ति ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 14 का हवाला देते हुए संवैधानिक उल्लंघन की आशंका जताई।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रावधानों की प्रयोज्यता की जांच का आग्रह किया गया है।

वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के पुंगनूर में वाईएसआरसीपी लोकसभा नेता और सांसद पीवी मिथुन रेड्डी तथा उनके सुरक्षाकर्मियों पर कथित हमले की संवैधानिक जांच और उचित कार्रवाई की माँग की है। पत्र के अनुसार यह घटना 16 अक्टूबर 2026 को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान घटी। इस पत्र में निर्वाचित प्रतिनिधि की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

घटनाक्रम: क्या हुआ पुंगनूर में

पत्र में उल्लेख है कि मिथुन रेड्डी जब पुंगनूर में नामांकन दाखिल करने जा रहे थे, तब उनकी गाड़ी और अन्य वाहनों पर कथित तौर पर पत्थरबाज़ी की गई। इस हमले में मिथुन रेड्डी और उनके निजी सुरक्षा दल के सदस्य घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग तक करनी पड़ी।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया जारी है और राज्य में राजनीतिक तनाव का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी सांसद पर इस प्रकार के कथित हमले की घटना संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

संवैधानिक चिंताएँ: गुरुमूर्ति के तर्क

सांसद गुरुमूर्ति ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यदि यह घटना जांच में सिद्ध होती है, तो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा, अनुच्छेद 14 के तहत समानता और गैर-मनमाने व्यवहार के सिद्धांत, तथा उम्मीदवारों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की बिना भय के लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी की क्षमता से जुड़ी गंभीर चिंताएँ उत्पन्न होंगी।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि निष्पक्ष जांच से पूर्व किसी की आपराधिक जिम्मेदारी पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि आरोपों को न तो एकतरफा खारिज किया जाए और न ही चुनिंदा तरीके से जांच हो।

कानूनी प्रावधानों की जाँच का आग्रह

गुरुमूर्ति ने सक्षम जांच एजेंसी से भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों की प्रयोज्यता की जांच करने का अनुरोध किया है। इनमें स्वेच्छा से चोट पहुँचाना या गंभीर चोट पहुँचाना, जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्य, गैरकानूनी सभा और दंगा, संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाली शरारत, तथा आपराधिक धमकी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सटीक कानूनी धाराओं का निर्धारण जांच अधिकारी को तथ्यों के आधार पर स्वयं करना होगा — वे महज़ रूपरेखा सुझा रहे हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और इसका महत्त्व

यह ऐसे समय में आया है जब वाईएसआरसीपी और सत्तारूढ़ दल के बीच आंध्र प्रदेश में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ है। स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान विपक्षी नेताओं पर कथित हमले की शिकायतें लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर राष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाती हैं।

सांसद गुरुमूर्ति का राष्ट्रपति को पत्र इस मुद्दे को सर्वोच्च संवैधानिक स्तर तक ले जाने का प्रयास है, जो दर्शाता है कि पार्टी इसे राज्य स्तरीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय संवैधानिक मसले के रूप में देख रही है। आगे यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति कार्यालय इस पत्र पर क्या संज्ञान लेता है और जांच एजेंसियाँ किस दिशा में कदम उठाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुंगनूर में पीवी मिथुन रेड्डी पर कथित हमला कब और कैसे हुआ?
16 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के पुंगनूर में स्थानीय निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान वाईएसआरसीपी सांसद पीवी मिथुन रेड्डी के वाहन और अन्य गाड़ियों पर कथित तौर पर पत्थर फेंके गए। मिथुन रेड्डी और उनके सुरक्षाकर्मी घायल हो गए और पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी।
वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति को पत्र क्यों लिखा?
गुरुमूर्ति ने यह पत्र इसलिए लिखा क्योंकि वे चाहते हैं कि इस कथित हमले की शीघ्र और निष्पक्ष जांच हो। उनका तर्क है कि यह घटना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा) और अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन करती है, और इसे राष्ट्रीय संवैधानिक स्तर पर संज्ञान में लिया जाना चाहिए।
इस मामले में किन कानूनी धाराओं के तहत जांच की माँग की गई है?
गुरुमूर्ति ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के उन प्रावधानों की जांच का आग्रह किया है जो स्वेच्छा से चोट पहुँचाना, गैरकानूनी सभा और दंगा, संपत्ति को नुकसान, तथा आपराधिक धमकी से संबंधित हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सटीक धाराओं का निर्धारण जांच अधिकारी द्वारा तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
इस कथित हमले का आंध्र प्रदेश की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह घटना आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान राजनीतिक तनाव को उजागर करती है। वाईएसआरसीपी का राष्ट्रपति तक पहुँचना यह दर्शाता है कि विपक्षी दल राज्य सरकार पर भरोसा किए बिना केंद्रीय हस्तक्षेप चाहता है। यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाता है।
गुरुमूर्ति ने जांच में किन बिंदुओं को शामिल करने की माँग की है?
गुरुमूर्ति ने माँग की है कि जांच में हमले में शामिल लोगों की पहचान और भूमिका, घायलों की चोटों की प्रकृति, और पुलिस की घटनास्थल पर प्रतिक्रिया की विस्तृत समीक्षा की जाए। उन्होंने जोर दिया कि जांच न तो पक्षपाती हो और न ही चुनिंदा तरीके से की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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