मिथुन रेड्डी पर कथित हमले की निष्पक्ष जांच की मांग, वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के पुंगनूर में वाईएसआरसीपी लोकसभा नेता और सांसद पीवी मिथुन रेड्डी तथा उनके सुरक्षाकर्मियों पर कथित हमले की संवैधानिक जांच और उचित कार्रवाई की माँग की है। पत्र के अनुसार यह घटना 16 अक्टूबर 2026 को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान घटी। इस पत्र में निर्वाचित प्रतिनिधि की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
घटनाक्रम: क्या हुआ पुंगनूर में
पत्र में उल्लेख है कि मिथुन रेड्डी जब पुंगनूर में नामांकन दाखिल करने जा रहे थे, तब उनकी गाड़ी और अन्य वाहनों पर कथित तौर पर पत्थरबाज़ी की गई। इस हमले में मिथुन रेड्डी और उनके निजी सुरक्षा दल के सदस्य घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग तक करनी पड़ी।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया जारी है और राज्य में राजनीतिक तनाव का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी सांसद पर इस प्रकार के कथित हमले की घटना संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
संवैधानिक चिंताएँ: गुरुमूर्ति के तर्क
सांसद गुरुमूर्ति ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यदि यह घटना जांच में सिद्ध होती है, तो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा, अनुच्छेद 14 के तहत समानता और गैर-मनमाने व्यवहार के सिद्धांत, तथा उम्मीदवारों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की बिना भय के लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी की क्षमता से जुड़ी गंभीर चिंताएँ उत्पन्न होंगी।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि निष्पक्ष जांच से पूर्व किसी की आपराधिक जिम्मेदारी पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि आरोपों को न तो एकतरफा खारिज किया जाए और न ही चुनिंदा तरीके से जांच हो।
कानूनी प्रावधानों की जाँच का आग्रह
गुरुमूर्ति ने सक्षम जांच एजेंसी से भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों की प्रयोज्यता की जांच करने का अनुरोध किया है। इनमें स्वेच्छा से चोट पहुँचाना या गंभीर चोट पहुँचाना, जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्य, गैरकानूनी सभा और दंगा, संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाली शरारत, तथा आपराधिक धमकी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सटीक कानूनी धाराओं का निर्धारण जांच अधिकारी को तथ्यों के आधार पर स्वयं करना होगा — वे महज़ रूपरेखा सुझा रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और इसका महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब वाईएसआरसीपी और सत्तारूढ़ दल के बीच आंध्र प्रदेश में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ है। स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान विपक्षी नेताओं पर कथित हमले की शिकायतें लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर राष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाती हैं।
सांसद गुरुमूर्ति का राष्ट्रपति को पत्र इस मुद्दे को सर्वोच्च संवैधानिक स्तर तक ले जाने का प्रयास है, जो दर्शाता है कि पार्टी इसे राज्य स्तरीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय संवैधानिक मसले के रूप में देख रही है। आगे यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति कार्यालय इस पत्र पर क्या संज्ञान लेता है और जांच एजेंसियाँ किस दिशा में कदम उठाती हैं।