26 अक्टूबर 2026
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वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव में एसईसी पर जांच की मांग

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वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव में एसईसी पर जांच की मांग

सारांश

वाईएसआरसीपी सांसद डॉ. मडिला गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति और राज्यपाल को पत्र लिखकर आंध्र प्रदेश के निकाय चुनावों में एसईसी की कथित विफलताओं की जांच माँगी। 222 वार्डों में नामांकन न हो पाने और 1,345 उम्मीदवारों को बाधाओं का सामना करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने न्यायिक निगरानी और केंद्रीय बल तैनाती की अपील की।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी सांसद डॉ.
मडिला गुरुमूर्ति ने 26 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और राज्यपाल एस.
अब्दुल नजीर को पत्र लिखा।
आरोप है कि 7 नगर पालिकाओं के 222 वार्डों में वाईएसआरसीपी का एक भी नामांकन दाखिल नहीं हो सका।
1,345 एमपीटीसी और जेडपीटीसी उम्मीदवारों को कथित तौर पर नामांकन में बाधाओं का सामना करना पड़ा।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद नामांकन समय-सीमा केवल चार शहरी निकायों में बढ़ाई गई।
जांच की माँग में सीसीटीवी फुटेज , पुलिस रिपोर्ट, नामांकन रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती शामिल है।
कदाचार प्रमाणित होने पर राज्य चुनाव आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों पर संवैधानिक कार्रवाई की माँग।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के तिरुपति सांसद डॉ. मडिला गुरुमूर्ति ने 26 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर को पत्र लिखकर राज्य में जारी नगरपालिका, मंडल परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र (एमपीटीसी) और जिला परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र (जेडपीटीसी) चुनावों के दौरान राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) की कथित 'विफलताओं' की स्वतंत्र जांच कराने की माँग की है। पत्र में कई गंभीर अनियमितताओं का विवरण दिया गया है, जो कथित तौर पर निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया को बाधित करने वाली हैं।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

डॉ. गुरुमूर्ति ने अपनी शिकायत में कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। इनमें कथित हिंसा, विपक्षी उम्मीदवारों को डराना-धमकाना, नामांकन पत्रों को नष्ट करना, पुलिस का पक्षपातपूर्ण दखल और चुनाव अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित न करना शामिल है।

उन्होंने पुंगनूर, पुलिवेंदुला, कडप्पा, प्रोद्दतूर, मैदुकुर, बडवेल, रायचोटी और तिरुपति सहित कई स्थानों पर कथित घटनाओं का हवाला दिया। इसके अलावा राजमपेट के सांसद पी.वी. मिथुन रेड्डी पर हमले, वाहनों को जलाने, विपक्षी नेताओं को नजरबंद करने और नामांकन दाखिल करने की कोशिश कर रहे उम्मीदवारों को रोकने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

नामांकन प्रक्रिया पर सवाल

सांसद ने बताया कि रिपोर्टों के अनुसार सात नगर पालिकाओं के 222 वार्डों में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का कोई नामांकन दाखिल नहीं हो सका, क्योंकि कथित तौर पर उम्मीदवारों को भरने से रोका गया। इसके अतिरिक्त, 1,345 एमपीटीसी और जेडपीटीसी उम्मीदवारों को नामांकन के दौरान बाधाओं का सामना करना पड़ा।

गुरुमूर्ति ने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग को शिकायतों की जांच करने और पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। हालांकि, नामांकन की समय-सीमा केवल चार शहरी स्थानीय निकायों में ही बढ़ाई गई, जबकि अन्य प्रभावित नगर पालिकाओं को कोई राहत नहीं मिली।

जांच की माँग और साक्ष्य संरक्षण

सांसद ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से एसईसी के कामकाज की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया, जिसमें शिकायतों पर आयोग की प्रतिक्रिया, पुलिस की तैनाती, नामांकन में अनियमितताएं और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन शामिल हो। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज, नामांकन रिकॉर्ड, पुलिस रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने की भी माँग की।

इसके अतिरिक्त, डॉ. गुरुमूर्ति ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती, प्रभावित उम्मीदवारों को पुनः नामांकन का अवसर देने और स्वतंत्र न्यायिक निगरानी की माँग भी की।

संवैधानिक कार्रवाई की अपील

डॉ. गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से अनुरोध किया कि यदि स्वतंत्र जांच में कदाचार या गंभीर चूक प्रमाणित होती है, तो राज्य चुनाव आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध उचित संवैधानिक कार्रवाई की जाए। यह शिकायत ऐसे समय में आई है जब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय और राज्यपाल भवन की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

345 उम्मीदवारों की बाधाएं यदि तथ्यात्मक हैं, तो यह चुनाव आयोग की संरचनात्मक विफलता को दर्शाता है, न कि छिटपुट अव्यवस्था को। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आंशिक पालन का मुद्दा विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सिमट जाती है, जबकि असली मुद्दा यह है कि स्थानीय निकाय चुनावों में प्रतिस्पर्धा की अनुपस्थिति लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. मडिला गुरुमूर्ति ने राष्ट्रपति को पत्र क्यों लिखा?
वाईएसआरसीपी सांसद डॉ. मडिला गुरुमूर्ति ने आंध्र प्रदेश के निकाय चुनावों में राज्य चुनाव आयोग की कथित विफलताओं की स्वतंत्र जांच कराने की माँग के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और राज्यपाल को पत्र लिखा। उनका आरोप है कि हिंसा, डराना-धमकाना और नामांकन बाधाओं के कारण निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया बाधित हुई।
आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव में नामांकन बाधा के क्या आरोप हैं?
आरोप है कि 7 नगर पालिकाओं के 222 वार्डों में वाईएसआरसीपी का एक भी नामांकन दाखिल नहीं हो सका। इसके अलावा 1,345 एमपीटीसी और जेडपीटीसी उम्मीदवारों को भी नामांकन प्रक्रिया के दौरान कथित बाधाओं का सामना करना पड़ा।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या निर्देश दिए थे?
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग को शिकायतों की जांच करने और पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया था। हालांकि, नामांकन समय-सीमा केवल चार शहरी स्थानीय निकायों में बढ़ाई गई, कई अन्य प्रभावित नगर पालिकाओं को राहत नहीं मिली।
सांसद ने जांच में किन पहलुओं को शामिल करने की माँग की है?
डॉ. गुरुमूर्ति ने एसईसी की शिकायतों पर प्रतिक्रिया, पुलिस तैनाती, नामांकन अनियमितताएं और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन की जांच माँगी है। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज, नामांकन रिकॉर्ड और पुलिस रिपोर्ट सुरक्षित रखने, केंद्रीय सुरक्षा बल तैनाती और स्वतंत्र न्यायिक निगरानी की भी माँग की।
यदि कदाचार सिद्ध हो तो क्या कार्रवाई की माँग की गई है?
सांसद ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से अनुरोध किया है कि जांच में कदाचार प्रमाणित होने पर राज्य चुनाव आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध उचित संवैधानिक कार्रवाई की जाए। प्रभावित उम्मीदवारों को पुनः नामांकन का अवसर देने की माँग भी की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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