मुंबई में मिट्टी कैफे का उद्घाटन: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा बोले — दिव्यांगों को चाहिए सम्मान और अवसर, सहानुभूति नहीं
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 17 अक्टूबर 2026 को मुंबई के बोरीवली स्थित ओबेरॉय स्काईसिटी मॉल में मिट्टी कैफे के नए आउटलेट का उद्घाटन किया और कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सही अवसर, प्रोत्साहन और सम्मान की ज़रूरत है। यह आउटलेट शारीरिक, बौद्धिक और मनोसामाजिक दिव्यांगता वाले वयस्कों द्वारा संचालित है — और समावेशी रोज़गार के एक जीवंत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
राज्यपाल का संदेश: कार्रवाई ज़रूरी, सहानुभूति नहीं काफी
राज्यपाल वर्मा ने उद्घाटन समारोह में स्पष्ट शब्दों में कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब दिव्यांग व्यक्तियों को उचित अवसर और पेशेवर सहायता मिलती है, तो वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम होते हैं।
उन्होंने कॉरपोरेट जगत से अपील की कि वे अपनी CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) पहलों का उपयोग दिव्यांग व्यक्तियों के लिए रोज़गार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने में करें। उनके अनुसार, व्यापारिक विकास और सामाजिक जिम्मेदारी को अलग नहीं, बल्कि एक साथ चलाना होगा।
मिट्टी कैफे की मौजूदगी और विस्तार
राज्यपाल ने जानकारी दी कि वर्तमान में राष्ट्रपति भवन, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा मुंबई, बेंगलुरु और नवी मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर मिट्टी कैफे के आउटलेट पहले से संचालित हैं। उन्होंने महाराष्ट्र लोक भवन में भी ऐसा कैफे खोलने की संभावना तलाशने का संकेत दिया।
राज्यपाल ने कैफे का पहला ऑर्डर स्वयं देकर टीम की पेशेवरता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल दिव्यांग व्यक्तियों को 'सहायता के लाभार्थी' के बजाय 'कुशल और उत्पादक योगदानकर्ता' के रूप में मान्यता दिलाती हैं, जो समाज की धारणा बदलने में सहायक है।
संस्थापक अलीना आलम की प्रेरणादायक यात्रा
मिट्टी कैफे की संस्थापक अलीना आलम ने बताया कि यह पहल 2017 में एक छोटी सी मेज़ और छाते से शुरू हुई थी। आज यह पूरे भारत में लगभग 80 स्थानों तक विस्तार पा चुकी है। इन कैफे ने अब तक 2 करोड़ से अधिक कप कॉफी परोसी है और आर्थिक रूप से कमज़ोर समुदायों को 80 लाख से अधिक भोजन वितरित किए हैं।
मिट्टी कैफे का मूल उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए समावेशन, सम्मान, रोज़गार और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना है — एक ऐसा मॉडल जो सामाजिक उद्यमिता और व्यावसायिक स्थिरता को एक साथ साधता है।
आम जनता और समाज पर असर
गौरतलब है कि भारत में दिव्यांग व्यक्तियों की रोज़गार दर अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। मिट्टी कैफे जैसे मॉडल न केवल रोज़गार देते हैं, बल्कि सामाजिक कलंक को भी चुनौती देते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब CSR निधियों के सही उपयोग और दिव्यांगजन सशक्तीकरण को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।
राज्यपाल वर्मा की उपस्थिति और महाराष्ट्र लोक भवन में विस्तार की संभावना इस पहल को सरकारी समर्थन के करीब ले जाती है — जो इसकी दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।