17 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुंबई में मिट्टी कैफे का उद्घाटन: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा बोले — दिव्यांगों को चाहिए सम्मान और अवसर, सहानुभूति नहीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुंबई में मिट्टी कैफे का उद्घाटन: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा बोले — दिव्यांगों को चाहिए सम्मान और अवसर, सहानुभूति नहीं

सारांश

एक छोटी मेज़ और छाते से शुरू हुई मिट्टी कैफे की यात्रा आज 80 आउटलेट तक पहुँच गई है। मुंबई में उद्घाटन पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा का संदेश साफ था — दिव्यांगों को दया नहीं, सम्मान और अवसर चाहिए। महाराष्ट्र लोक भवन में विस्तार की संभावना भी जताई गई।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 17 अक्टूबर 2026 को मुंबई के बोरीवली स्थित ओबेरॉय स्काईसिटी मॉल में मिट्टी कैफे के नए आउटलेट का उद्घाटन किया।
राज्यपाल ने कॉरपोरेट्स से CSR निधि का उपयोग दिव्यांग व्यक्तियों के रोज़गार और उद्यमिता के लिए करने का आग्रह किया।
मिट्टी कैफे 2017 में एक मेज़ से शुरू होकर अब देशभर में लगभग 80 स्थानों पर संचालित है।
कैफे ने 2 करोड़ से अधिक कप कॉफी परोसी और 80 लाख से अधिक भोजन ज़रूरतमंदों को दिए।
राज्यपाल ने महाराष्ट्र लोक भवन में भी ऐसा कैफे खोलने की संभावना तलाशने का संकेत दिया।

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 17 अक्टूबर 2026 को मुंबई के बोरीवली स्थित ओबेरॉय स्काईसिटी मॉल में मिट्टी कैफे के नए आउटलेट का उद्घाटन किया और कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सही अवसर, प्रोत्साहन और सम्मान की ज़रूरत है। यह आउटलेट शारीरिक, बौद्धिक और मनोसामाजिक दिव्यांगता वाले वयस्कों द्वारा संचालित है — और समावेशी रोज़गार के एक जीवंत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।

राज्यपाल का संदेश: कार्रवाई ज़रूरी, सहानुभूति नहीं काफी

राज्यपाल वर्मा ने उद्घाटन समारोह में स्पष्ट शब्दों में कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब दिव्यांग व्यक्तियों को उचित अवसर और पेशेवर सहायता मिलती है, तो वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम होते हैं।

उन्होंने कॉरपोरेट जगत से अपील की कि वे अपनी CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) पहलों का उपयोग दिव्यांग व्यक्तियों के लिए रोज़गार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने में करें। उनके अनुसार, व्यापारिक विकास और सामाजिक जिम्मेदारी को अलग नहीं, बल्कि एक साथ चलाना होगा।

मिट्टी कैफे की मौजूदगी और विस्तार

राज्यपाल ने जानकारी दी कि वर्तमान में राष्ट्रपति भवन, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा मुंबई, बेंगलुरु और नवी मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर मिट्टी कैफे के आउटलेट पहले से संचालित हैं। उन्होंने महाराष्ट्र लोक भवन में भी ऐसा कैफे खोलने की संभावना तलाशने का संकेत दिया।

राज्यपाल ने कैफे का पहला ऑर्डर स्वयं देकर टीम की पेशेवरता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल दिव्यांग व्यक्तियों को 'सहायता के लाभार्थी' के बजाय 'कुशल और उत्पादक योगदानकर्ता' के रूप में मान्यता दिलाती हैं, जो समाज की धारणा बदलने में सहायक है।

संस्थापक अलीना आलम की प्रेरणादायक यात्रा

मिट्टी कैफे की संस्थापक अलीना आलम ने बताया कि यह पहल 2017 में एक छोटी सी मेज़ और छाते से शुरू हुई थी। आज यह पूरे भारत में लगभग 80 स्थानों तक विस्तार पा चुकी है। इन कैफे ने अब तक 2 करोड़ से अधिक कप कॉफी परोसी है और आर्थिक रूप से कमज़ोर समुदायों को 80 लाख से अधिक भोजन वितरित किए हैं।

मिट्टी कैफे का मूल उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए समावेशन, सम्मान, रोज़गार और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना है — एक ऐसा मॉडल जो सामाजिक उद्यमिता और व्यावसायिक स्थिरता को एक साथ साधता है।

आम जनता और समाज पर असर

गौरतलब है कि भारत में दिव्यांग व्यक्तियों की रोज़गार दर अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। मिट्टी कैफे जैसे मॉडल न केवल रोज़गार देते हैं, बल्कि सामाजिक कलंक को भी चुनौती देते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब CSR निधियों के सही उपयोग और दिव्यांगजन सशक्तीकरण को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।

राज्यपाल वर्मा की उपस्थिति और महाराष्ट्र लोक भवन में विस्तार की संभावना इस पहल को सरकारी समर्थन के करीब ले जाती है — जो इसकी दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 80 आउटलेट और 2 करोड़ कप कॉफी के बावजूद दिव्यांग रोज़गार की राष्ट्रीय दर में कितना बदलाव आया है। राज्यपाल की CSR अपील सही दिशा में है, पर बिना नीतिगत बाध्यता के यह स्वैच्छिक बनी रहती है। महाराष्ट्र लोक भवन में विस्तार की संभावना सरकारी समर्थन का संकेत है — यदि यह वास्तव में लागू होती है, तो यह राज्य स्तर पर एक मज़बूत मिसाल बनेगी।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिट्टी कैफे क्या है और यह किसके द्वारा संचालित होता है?
मिट्टी कैफे एक सामाजिक उद्यम है जो शारीरिक, बौद्धिक और मनोसामाजिक दिव्यांगता वाले वयस्कों द्वारा संचालित किया जाता है। इसकी स्थापना 2017 में अलीना आलम ने एक छोटी मेज़ और छाते से की थी, जो आज भारत में लगभग 80 स्थानों तक फैल चुकी है।
मुंबई में मिट्टी कैफे का नया आउटलेट कहाँ खुला है?
नया आउटलेट मुंबई के बोरीवली स्थित ओबेरॉय स्काईसिटी मॉल में खुला है। इसका उद्घाटन 17 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने किया।
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मिट्टी कैफे के उद्घाटन पर क्या कहा?
राज्यपाल वर्मा ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए सहानुभूति नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। उन्होंने कॉरपोरेट्स से CSR निधि का उपयोग दिव्यांगजनों के रोज़गार के लिए करने की अपील की और महाराष्ट्र लोक भवन में भी ऐसा कैफे खोलने की संभावना जताई।
मिट्टी कैफे अब तक किन प्रमुख स्थानों पर मौजूद है?
मिट्टी कैफे के आउटलेट राष्ट्रपति भवन, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और मुंबई, बेंगलुरु तथा नवी मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पहले से संचालित हैं। अब मुंबई के बोरीवली में ओबेरॉय स्काईसिटी मॉल में नया आउटलेट जुड़ गया है।
मिट्टी कैफे ने अब तक क्या उपलब्धियाँ हासिल की हैं?
मिट्टी कैफे ने अब तक 2 करोड़ से अधिक कप कॉफी परोसी है और आर्थिक रूप से कमज़ोर समुदायों को 80 लाख से अधिक भोजन वितरित किए हैं। यह पहल दिव्यांगजनों के लिए समावेशन, सम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ कार्यरत है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले