मिजोरम पुलिस ने ₹2.91 करोड़ की हेरोइन के साथ मणिपुर के तस्कर को पकड़ा, साबुन के डिब्बों में छिपाई थी ड्रग्स
सारांश
मुख्य बातें
मिजोरम पुलिस ने 21 अक्टूबर 2026 की रात सैतुअल जिले के केइफांग क्षेत्र में रैंडम चेकिंग के दौरान मणिपुर के एक कथित नशा तस्कर को गिरफ्तार किया और उसकी गाड़ी से 1.457 किलोग्राम हेरोइन बरामद की, जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹2.914 करोड़ बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, नशीला पदार्थ साबुन के डिब्बों में छिपाकर मिजोरम की राजधानी आइजोल तक पहुँचाया जा रहा था।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य पुलिस की एक विशेष टीम ने मंगलवार रात केइफांग में कुआलमावी के पास एक सफेद मारुति सुजुकी ब्रेजा को रोका। गाड़ी चला रहे थांगमिनलुन बैटे (24) पर अवैध नशीले पदार्थ ले जाने का संदेह था। बैटे मणिपुर के कांगपोकपी जिले का निवासी है।
स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में गाड़ी की विस्तृत तलाशी ली गई। पुलिस को 100 साबुन के डिब्बों में 1.457 किलोग्राम हेरोइन मिली। आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया और जाँच शुरू कर दी गई है।
जाँच का दायरा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह जाँच की जा रही है कि यह नशीला पदार्थ कहाँ से लाया गया था, इसे कहाँ पहुँचाया जाना था और कौन-सा तस्करी नेटवर्क इसमें शामिल है। गौरतलब है कि इस तरह की तस्करी अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार से संचालित नेटवर्कों से जुड़ी होती है।
पूर्वोत्तर और ड्रग तस्करी की चुनौती
मिजोरम और मणिपुर पूर्वोत्तर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के प्रमुख मार्ग बनते जा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह म्यांमार के साथ इन राज्यों की 910 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है — जिसका बड़ा हिस्सा बिना बाड़बंदी के है।
मिजोरम के छह और मणिपुर के पाँच जिलों की सीमाएँ म्यांमार से लगती हैं। इस क्षेत्र की निकटता 'गोल्डन ट्रायंगल' से है — जो म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के कुछ हिस्सों से मिलकर बना एक क्षेत्र है और विश्व के सबसे बड़े अवैध नशीले पदार्थ उत्पादन केंद्रों में से एक माना जाता है।
इस सीमावर्ती मार्ग से तस्करी की जाने वाली वस्तुओं में मेथामफेटामाइन गोलियाँ, हेरोइन, विदेशी सिगरेट, उर्वरक और अन्य प्रतिबंधित सामग्री शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई
दोनों पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा एजेंसियाँ ड्रग तस्करी से निपटने के लिए निरंतर अभियान चला रही हैं। उनका लक्ष्य उन नेटवर्कों को तोड़ना है जो अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से संचालित होते हैं और इस क्षेत्र के भीतर तस्करी के रास्तों को जीवित रखते हैं। यह गिरफ्तारी उन्हीं प्रयासों की एक कड़ी है।
अब देखना यह होगा कि बैटे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस नेटवर्क की और कड़ियाँ उजागर कर पाती है या नहीं।