PM मोदी का ब्लूमबर्ग फोरम में बड़ा बयान: भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 75 से बढ़कर 300 गीगावाट, विदेशी मुद्रा भंडार $700 अरब पार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक शक्ति संघर्ष के इस दौर में भारत एक अलग और स्वतंत्र राह पर चल रहा है। उन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती, ऊर्जा परिवर्तन और सुधारों की गति को वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की विश्वसनीयता का आधार बताया।
वैश्विक संकट और भारत का मिजाज
मोदी ने कहा, "दुनिया में पावर की इस भागदौड़ में भारत एक अलग मिजाज लेकर चल रहा है और इसका गवाह यह दशक भी है।" उन्होंने रेखांकित किया कि 21वीं सदी का यह दशक महामारी, युद्ध, व्यापार अवरोध, ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएँ और क्रिटिकल मिनरल्स की किल्लत जैसी अभूतपूर्व चुनौतियाँ लेकर आया है। उनके अनुसार दुनिया एक संकट से उबरने की कोशिश करती है कि दूसरा संकट दस्तक दे देता है।
उन्होंने कहा कि जिन चीजों ने कभी दुनिया को जोड़ा था — सप्लाई चेन, ऊर्जा, मिनरल्स, पेमेंट और तकनीक — वही आज दबाव और दबदबे के माध्यम बन चुकी हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकनीकी व ऊर्जा वर्चस्व को लेकर तनाव बढ़ रहा है।
ऊर्जा परिवर्तन: चार गुना क्षमता का दावा
मोदी ने कहा कि 2014 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 75 गीगावाट थी, जो आज बढ़कर लगभग 300 गीगावाट तक पहुँच गई है — यानी लगभग चार गुना की बढ़ोतरी। उन्होंने इस ऊर्जा परिवर्तन को नए आर्थिक अवसरों का स्रोत बताया।
गौरतलब है कि भारत ने अपने 2030 के लक्ष्य — 500 गीगावाट गैर जीवाश्म ऊर्जा क्षमता — की दिशा में इस प्रगति को वैश्विक जलवायु मंचों पर बार बार रेखांकित किया है। ब्लूमबर्ग फोरम में यह आँकड़ा भारत की हरित साख को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने पेश करने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
वैश्विक पहल और बहुपक्षीय नेतृत्व
प्रधानमंत्री ने उन वैश्विक पहलों की सूची गिनाई जो भारत ने प्रारंभ की हैं या जिनमें नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। इनमें अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI), द बिग कैट एलायंस, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) और मिशन लाइफ शामिल हैं। मोदी ने कहा कि इन सभी पहलों का मकसद 'हर किसी और जीवन के हर स्वरूप को फायदा' पहुँचाना है।
आर्थिक मजबूती और संरचनात्मक सुधार
मोदी ने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आज $700 अरब से अधिक है और देश का बैंकिंग सिस्टम कई अन्य देशों की तुलना में मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि इसी मजबूती के चलते भारत की सॉवरेन रेटिंग्स को अपग्रेड किया जा रहा है।
संरचनात्मक सुधारों का उल्लेख करते हुए मोदी ने GST को एक 'जटिल टैक्स जाल को राष्ट्रीय बाजार में बदलने' वाला कदम बताया। साथ ही उन्होंने दिवालियापन कानून, 29 लेबर कोड्स को 4 सरल कोड्स में समेटने और कारोबारी सुगमता से जुड़ी सैकड़ों बाधाओं को दूर करने का भी जिक्र किया।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और भ्रष्टाचार पर प्रहार
मोदी ने कहा कि तकनीक का उपयोग कर भारत ने लाभार्थियों के बैंक खातों तक सीधे सरकारी सहायता पहुँचाने की व्यवस्था बनाई है। उनके अनुसार इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है, नागरिकों की सुविधा बढ़ी है और सरकार व नागरिक के बीच एक सीधा संवाद स्थापित हुआ है।
यह ऐसे समय में आया है जब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से ₹30 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाई जाने का सरकारी दावा है। भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर — जिसमें UPI, आधार और DigiLocker शामिल हैं — को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। आगे यह देखना होगा कि भारत के इन वैश्विक दावों को व्यापार और निवेश के मोर्चे पर कितना ठोस समर्थन मिलता है।