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मध्य प्रदेश: मां ने चार छोटी बेटियों को कुएं में फेंककर आत्महत्या की

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मध्य प्रदेश: मां ने चार छोटी बेटियों को कुएं में फेंककर आत्महत्या की

सारांश

एक 30 वर्षीय महिला ने अपनी चार बेटियों को कुएं में फेंककर हत्या कर दी और फिर खुदकुशी कर ली। यह घटना मध्य प्रदेश के खमरिया गांव में हुई है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है।

मुख्य बातें

घटना ने मानसिक स्वास्थ्य संकट को उजागर किया।
स्थानीय समुदाय की जागरूकता की आवश्यकता।

भोपाल, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के केसली थाना क्षेत्र के खमरिया गांव में एक बेहद चौंकाने वाली घटना घटी है जिसने सभी को हिला कर रख दिया है। 30 वर्षीय महिला सविता लोधी ने अपनी चार नाबालिग बेटियों को गहरे कुएं में फेंककर उनकी हत्या कर दी। इसके तुरंत बाद, उसने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

गुरुवार को, सविता ने चारों बेटियों को गांव के हरपाल घोषी के खेत में स्थित एक कुएं में धक्का दे दिया।

सबसे बड़ी बेटी की उम्र मात्र सात वर्ष थी, जबकि बाकी तीन बेटियाँ उससे भी कम उम्र की थीं। कुएं की गहराई और उसमें भरे पानी के कारण चारों बच्चियों की डूबने से तुरंत मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, इस घटना के बाद सविता घर वापस आई और पास के एक पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी।

सूचना मिलने के बाद केसली थाना और टाडा चौकी की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बचाव अभियान चलाकर कुएं से चारों बच्चियों के शव निकाले। वहीं, पास में सविता का शव पेड़ से लटका हुआ पाया गया।

सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

साक्ष्य इकट्ठा करने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम भी बुलाई गई थी, जिसने कुएं और घर से सबूत जुटाए। जांच की निगरानी के लिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे।

पुलिस अब सविता के पति और ससुराल वालों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके।

हालांकि, पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अटकलें न लगाएं और कहा है कि मामले में मानसिक स्थिति, पारिवारिक हालात और बाहरी दबाव की गहनता से जांच की जाएगी।

स्थानीय समुदाय के नेताओं ने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल काउंसलिंग की व्यवस्था करने और ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई है, जहां ऐसी सुविधाएं अभी भी सीमित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों से लेकर गांवों तक मानसिक स्वास्थ्य का एक गंभीर संकट धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

तनाव, आर्थिक समस्याएं, अकेलापन और सामाजिक दबाव लोगों को मानसिक रूप से टूटने की कगार पर पहुंचा देते हैं और अक्सर उन्हें समय पर मदद नहीं मिल पाती।

दुर्भाग्यवश, कई बार परिवार और समाज को किसी की परेशानी का एहसास तब होता है जब कोई बड़ी त्रासदी घटित हो चुकी होती है।

ऐसे हादसों को रोकने के लिए काउंसलिंग सुविधाओं का विस्तार, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करना और खुलकर बातचीत को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों की ओर इशारा करती है। ऐसे मामलों की गहराई से जांच आवश्यक है ताकि भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस घटना की मुख्य वजह क्या थी?
पुलिस मानसिक स्थिति, पारिवारिक हालात और बाहरी दबाव की जांच कर रही है।
क्या पुलिस ने इस मामले में किसी को गिरफ्तार किया है?
अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन जांच जारी है।
स्थानीय समुदाय ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
स्थानीय नेताओं ने प्रभावित परिवारों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था करने की आवश्यकता बताई है।
राष्ट्र प्रेस
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