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मुद्रा योजना से पूनम शर्मा की बदली तकदीर: ₹2.5 लाख के लोन से खड़ा किया 5 दुकानों का साम्राज्य

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मुद्रा योजना से पूनम शर्मा की बदली तकदीर: ₹2.5 लाख के लोन से खड़ा किया 5 दुकानों का साम्राज्य

सारांश

ऊना से मनाली तक का सफर — पूनम शर्मा ने ₹2.5 लाख के मुद्रा लोन से सब्ज़ी की एक दुकान शुरू की और आज 5 दुकानों की मालकिन बन चुकी हैं। सालाना कमाई ₹15 लाख तक और 6 लोगों को रोज़गार — यह है मुद्रा योजना की ज़मीनी हकीकत।

मुख्य बातें

पूनम शर्मा ने मनाली में ₹2.5 लाख के मुद्रा ऋण से एक सब्ज़ी की दुकान से व्यवसाय शुरू किया।
क्रमशः ₹5 लाख और ₹10 लाख के अतिरिक्त ऋण लेकर कारोबार को 5 दुकानों तक विस्तारित किया।
वार्षिक आमदनी शुरुआती ₹2–2.5 लाख से बढ़कर अब ₹10–15 लाख हो गई है।
पूनम ने अपने प्रतिष्ठान में 6 लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार दिया है।
'ज्वालाजी मार्ट' नाम से खोला गया मार्ट उनके उद्यमशीलता के सफर की परिणति है।
पूनम मूलतः ऊना जिले , हिमाचल प्रदेश की निवासी हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की लाभार्थी पूनम शर्मा ने हिमाचल प्रदेश के मनाली में महज ₹2.5 लाख के बैंक ऋण से अपना छोटा-सा व्यवसाय शुरू किया और आज वे 5 दुकानों की स्वामिनी बन चुकी हैं। ऊना जिले की मूल निवासी पूनम न केवल एक सफल उद्यमी के रूप में उभरी हैं, बल्कि उन्होंने अपने कारोबार के ज़रिए 5 लोगों को रोज़गार भी दिया है — जो केंद्र सरकार की इस कल्याणकारी योजना की ज़मीनी सफलता की एक जीवंत मिसाल है।

कैसे हुई शुरुआत

पूनम शर्मा ने बताया कि उनके पति पहले किसी और की सब्ज़ी मंडी में और फिर एक दुकान पर काम करते थे। जब वे ऊना से मनाली आईं, तो उन्होंने दूसरों के लिए काम करने की बजाय अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद दंपती ने एक छोटी सब्ज़ी की दुकान से अपने उद्यम की नींव रखी।

मुद्रा योजना बनी गेमचेंजर

पूनम के अनुसार, करीब 8 साल तक सब्ज़ी और राशन की दुकान चलाने के बाद उन्होंने 2012-13 में बैंक से ऋण लेने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2014-15 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने इस योजना के अंतर्गत बैंक से ₹2.5 लाख का ऋण लिया। इस पूंजी से कारोबार में विस्तार हुआ और उन्होंने 300 मीटर की दूरी पर दो और दुकानें खोलीं।

पहला ऋण चुकाने के बाद पूनम ने दोबारा ₹5 लाख का और फिर ₹10 लाख का ऋण लिया। इस तरह चरणबद्ध ऋण और अनुशासित पुनर्भुगतान की बदौलत उनका कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया और उन्होंने 'ज्वालाजी मार्ट' नाम से अपना प्रतिष्ठान खोला।

आमदनी में कई गुना इज़ाफा

पूनम ने बताया कि शुरुआत में सालाना ₹2 लाख से ₹2.5 लाख की आमदनी होती थी। मुद्रा योजना का लाभ मिलने और कारोबार बढ़ने के बाद अब उनकी वार्षिक कमाई ₹10 लाख से ₹15 लाख तक पहुँच गई है। उन्होंने अपनी दुकानों पर 5 युवकों और 1 महिला को बिलिंग के काम पर नियुक्त किया है, यानी कुल 6 लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार दिया है।

आम जनता के लिए संदेश

पूनम शर्मा का कहना है कि जो लोग जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें सरकार की ऐसी योजनाओं का लाभ ज़रूर उठाना चाहिए और बैंक ऋण की मदद से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर मुद्रा योजना का लाभ नहीं मिलता, तो शायद सब्ज़ी की दुकान ही चल पाती।'

क्या है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) केंद्र सरकार की एक प्रमुख वित्तीय समावेश पहल है, जिसके तहत छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों को ₹10 लाख तक का संपार्श्विक-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है। पूनम शर्मा जैसी लाखों महिला उद्यमियों की सफलता यह दर्शाती है कि यह योजना न केवल व्यक्तिगत समृद्धि, बल्कि स्थानीय रोज़गार सृजन में भी प्रभावी भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में पूनम का इरादा अपने कारोबार को और विस्तार देने का है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक ज़रूरी सवाल भी उठाती है — मुद्रा योजना के करोड़ों खातों में से कितनों की यात्रा वास्तव में इस मुकाम तक पहुँच पाती है? योजना के आँकड़े ऋण वितरण की संख्या तो बताते हैं, पर उद्यम की दीर्घकालिक सफलता और रोज़गार सृजन का सत्यापन अभी भी कमज़ोर कड़ी है। पूनम जैसी उद्यमी की सफलता के पीछे व्यक्तिगत दृढ़ता उतनी ही बड़ी भूमिका निभाती है जितनी सरकारी योजना — और नीति-निर्माताओं को यह समझना होगा कि ऋण तक पहुँच के साथ-साथ कौशल विकास और बाज़ार संपर्क भी समान रूप से ज़रूरी हैं।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना क्या है और इससे कैसे लोन मिलता है?
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को ₹10 लाख तक का संपार्श्विक-मुक्त ऋण बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के ज़रिए दिया जाता है। इसे शिशु, किशोर और तरुण — तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
पूनम शर्मा ने मुद्रा योजना से कितना लोन लिया और कारोबार कितना बढ़ा?
पूनम शर्मा ने 2014-15 में पहले ₹2.5 लाख, फिर ₹5 लाख और बाद में ₹10 लाख का मुद्रा ऋण लिया। इस पूंजी की मदद से उनका कारोबार एक सब्ज़ी की दुकान से बढ़कर मनाली में 5 दुकानों तक पहुँच गया।
पूनम शर्मा की वार्षिक कमाई कितनी हो गई है?
शुरुआत में पूनम की सालाना कमाई ₹2 से ₹2.5 लाख थी, जो अब बढ़कर ₹10 लाख से ₹15 लाख तक पहुँच गई है। यह वृद्धि मुद्रा योजना के तहत लिए गए ऋणों और कारोबार के क्रमिक विस्तार का परिणाम है।
पूनम शर्मा ने कितने लोगों को रोज़गार दिया है?
पूनम शर्मा ने अपनी दुकानों में कुल 6 लोगों को रोज़गार दिया है — 5 युवक और 1 महिला जो बिलिंग का काम संभालती हैं। यह स्थानीय रोज़गार सृजन में मुद्रा योजना की भूमिका को रेखांकित करता है।
मुद्रा योजना से लाभ उठाने के लिए क्या करना होगा?
मुद्रा योजना का लाभ लेने के लिए नज़दीकी बैंक, माइक्रो-फाइनेंस संस्था या NBFC से संपर्क किया जा सकता है। आवेदन के लिए व्यवसाय का विवरण, पहचान पत्र और पते का प्रमाण आवश्यक होता है; कोई संपार्श्विक नहीं माँगा जाता।
राष्ट्र प्रेस
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