मुद्रा योजना से बदली किस्मत: हजारीबाग के धनेश्वर साव ने ₹5 लाख के लोन से खड़ी कीं तीन दुकानें
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ₹5 लाख का ऋण लेकर झारखंड के हजारीबाग जिले के एक छोटे व्यापारी ने अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल ली। कटकमदाग प्रखंड के पकरार गांव निवासी धनेश्वर साव आज हजारीबाग की सब्जी मंडी और मेन रोड पर तीन दुकानों के मालिक हैं — और उनकी यह यात्रा उन लाखों छोटे उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है जो बिना पूंजी के आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। केंद्र सरकार की इस योजना के 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
मुद्रा योजना से मिली नई शुरुआत
धनेश्वर साव ने 2017 में बैंक ऑफ इंडिया से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत ₹5 लाख का ऋण लिया। उस समय उनके पास एक छोटी सी दुकान थी और कारोबार बढ़ाने के लिए न पूंजी थी, न कोई गारंटी। बिना किसी जमानत के मिले इस ऋण ने उनके सामने एक नया रास्ता खोल दिया।
धनेश्वर साव के अनुसार, 'इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बिना किसी गारंटी के ऋण मिल जाता है। छोटे व्यापारियों के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि पहले पूंजी और गारंटी के अभाव में कारोबार बढ़ाना काफी मुश्किल होता था।' उन्होंने समय पर पूरा ऋण चुकाकर बैंक का भरोसा भी बनाए रखा।
एक दुकान से तीन दुकानों तक का सफर
आज धनेश्वर साव हजारीबाग की सब्जी मंडी और मेन रोड पर तीन दुकानों का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं। कभी साइकिल से दुकान जाने वाले धनेश्वर अब अपनी कार से कारोबार पर पहुँचते हैं। उन्होंने अपना पक्का मकान बनाया, परिवार को बेहतर जीवनस्तर दिया और तीन बेटियों की शादी धूमधाम से संपन्न की।
उनकी इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार मुद्रा योजना को आत्मनिर्भर भारत अभियान की रीढ़ के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी मोहम्मद शाहिद ने बताया कि वे धनेश्वर साव को पिछले 40-45 वर्षों से जानते हैं। उनके अनुसार, 'पहले धनेश्वर साव एक छोटी सी दुकान चलाते थे, लेकिन मुद्रा योजना से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है।' शाहिद ने इसे छोटे लोगों को आगे बढ़ाने वाली योजना बताया।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 2015 में शुरू की गई थी और इसके तहत शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000 से ₹5 लाख) और तरुण (₹5 लाख से ₹10 लाख) श्रेणियों में बिना गारंटी ऋण दिया जाता है। देशभर में हजारों छोटे व्यापारी, कारीगर और उद्यमी इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।
आम जनता पर असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह योजना उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हुई है जो औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से दूर थे। छोटे व्यापारियों, उद्यमियों और कारीगरों को बिना जमानत के ऋण मिलने से उनके सामने स्वरोजगार के नए रास्ते खुले हैं।
धनेश्वर साव जैसे उदाहरण यह भी दर्शाते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ तब सबसे प्रभावशाली होता है जब लाभार्थी उसे अनुशासन और मेहनत के साथ इस्तेमाल करें। आने वाले समय में मुद्रा योजना के विस्तार और ऋण सीमा में संभावित बढ़ोतरी पर सरकार विचार कर रही है बताया जा रहा है।