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मुद्रा योजना से बदली किस्मत: हजारीबाग के धनेश्वर साव ने ₹5 लाख के लोन से खड़ी कीं तीन दुकानें

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मुद्रा योजना से बदली किस्मत: हजारीबाग के धनेश्वर साव ने ₹5 लाख के लोन से खड़ी कीं तीन दुकानें

सारांश

₹5 लाख का एक ऋण और मेहनत का जज्बा — हजारीबाग के धनेश्वर साव की कहानी बताती है कि मुद्रा योजना सिर्फ कागजी वादा नहीं है। एक दुकान से तीन दुकानों तक, साइकिल से कार तक — और PM मोदी के हाथों सम्मान तक का यह सफर आत्मनिर्भर भारत की जमीनी तस्वीर है।

मुख्य बातें

धनेश्वर साव ने 2017 में बैंक ऑफ इंडिया से मुद्रा योजना के तहत ₹5 लाख का ऋण लिया।
आज वे हजारीबाग की सब्जी मंडी और मेन रोड पर तीन दुकानों का संचालन कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी उपलब्धि के लिए उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
धनेश्वर ने समय पर पूरा ऋण चुकाया और तीन बेटियों की शादी संपन्न की।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 2015 में शुरू हुई थी और अब इसके 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ₹5 लाख का ऋण लेकर झारखंड के हजारीबाग जिले के एक छोटे व्यापारी ने अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल ली। कटकमदाग प्रखंड के पकरार गांव निवासी धनेश्वर साव आज हजारीबाग की सब्जी मंडी और मेन रोड पर तीन दुकानों के मालिक हैं — और उनकी यह यात्रा उन लाखों छोटे उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है जो बिना पूंजी के आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। केंद्र सरकार की इस योजना के 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

मुद्रा योजना से मिली नई शुरुआत

धनेश्वर साव ने 2017 में बैंक ऑफ इंडिया से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत ₹5 लाख का ऋण लिया। उस समय उनके पास एक छोटी सी दुकान थी और कारोबार बढ़ाने के लिए न पूंजी थी, न कोई गारंटी। बिना किसी जमानत के मिले इस ऋण ने उनके सामने एक नया रास्ता खोल दिया।

धनेश्वर साव के अनुसार, 'इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बिना किसी गारंटी के ऋण मिल जाता है। छोटे व्यापारियों के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि पहले पूंजी और गारंटी के अभाव में कारोबार बढ़ाना काफी मुश्किल होता था।' उन्होंने समय पर पूरा ऋण चुकाकर बैंक का भरोसा भी बनाए रखा।

एक दुकान से तीन दुकानों तक का सफर

आज धनेश्वर साव हजारीबाग की सब्जी मंडी और मेन रोड पर तीन दुकानों का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं। कभी साइकिल से दुकान जाने वाले धनेश्वर अब अपनी कार से कारोबार पर पहुँचते हैं। उन्होंने अपना पक्का मकान बनाया, परिवार को बेहतर जीवनस्तर दिया और तीन बेटियों की शादी धूमधाम से संपन्न की।

उनकी इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार मुद्रा योजना को आत्मनिर्भर भारत अभियान की रीढ़ के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासी मोहम्मद शाहिद ने बताया कि वे धनेश्वर साव को पिछले 40-45 वर्षों से जानते हैं। उनके अनुसार, 'पहले धनेश्वर साव एक छोटी सी दुकान चलाते थे, लेकिन मुद्रा योजना से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है।' शाहिद ने इसे छोटे लोगों को आगे बढ़ाने वाली योजना बताया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 2015 में शुरू की गई थी और इसके तहत शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000 से ₹5 लाख) और तरुण (₹5 लाख से ₹10 लाख) श्रेणियों में बिना गारंटी ऋण दिया जाता है। देशभर में हजारों छोटे व्यापारी, कारीगर और उद्यमी इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।

आम जनता पर असर

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह योजना उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हुई है जो औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से दूर थे। छोटे व्यापारियों, उद्यमियों और कारीगरों को बिना जमानत के ऋण मिलने से उनके सामने स्वरोजगार के नए रास्ते खुले हैं।

धनेश्वर साव जैसे उदाहरण यह भी दर्शाते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ तब सबसे प्रभावशाली होता है जब लाभार्थी उसे अनुशासन और मेहनत के साथ इस्तेमाल करें। आने वाले समय में मुद्रा योजना के विस्तार और ऋण सीमा में संभावित बढ़ोतरी पर सरकार विचार कर रही है बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक व्यक्ति की सफलता है — योजना की समग्र प्रभावशीलता का पैमाना नहीं। मुद्रा योजना के तहत वितरित ऋणों की संख्या करोड़ों में है, परंतु एनपीए (NPA) दर और वास्तविक रोजगार सृजन के स्वतंत्र आँकड़े अभी भी बहस का विषय हैं। सफलता की कहानियाँ जरूरी हैं, पर नीति-मूल्यांकन के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक डेटा उतना ही जरूरी है। असली सवाल यह है कि ऐसे धनेश्वर कितने हैं — और कितने लाभार्थी ऋण चुकाने में असमर्थ रहे।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना क्या है और इसके तहत कितना लोन मिलता है?
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 2015 में शुरू की गई केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को बिना गारंटी ऋण दिया जाता है। इसमें शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000 से ₹5 लाख) और तरुण (₹5 लाख से ₹10 लाख) तीन श्रेणियाँ हैं।
धनेश्वर साव कौन हैं और उन्होंने मुद्रा योजना का लाभ कैसे उठाया?
धनेश्वर साव झारखंड के हजारीबाग जिले के कटकमदाग प्रखंड के पकरार गांव के निवासी हैं। उन्होंने 2017 में बैंक ऑफ इंडिया से मुद्रा योजना के तहत ₹5 लाख का ऋण लिया और आज हजारीबाग में तीन दुकानों के मालिक हैं।
क्या मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी लोन मिलता है?
हाँ, मुद्रा योजना की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें किसी गारंटी या जमानत की आवश्यकता नहीं होती। यही कारण है कि यह उन छोटे व्यापारियों के लिए उपयोगी है जिनके पास संपत्ति या जमानत नहीं है।
मुद्रा योजना को कितने साल हो चुके हैं और इसका क्या असर हुआ है?
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान देशभर में हजारों छोटे व्यापारियों, कारीगरों और उद्यमियों ने इस योजना का लाभ उठाकर अपना कारोबार स्थापित या विस्तारित किया है।
धनेश्वर साव को PM मोदी ने क्यों सम्मानित किया?
मुद्रा योजना का सफलतापूर्वक उपयोग करके अपने कारोबार को एक दुकान से तीन दुकानों तक विस्तारित करने और ऋण समय पर चुकाने की उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनेश्वर साव को सम्मानित किया। वे आत्मनिर्भर भारत अभियान के एक प्रेरक उदाहरण के रूप में पहचाने गए।
राष्ट्र प्रेस
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