31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

CM योगी का निर्देश: मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाएं, ₹3025.49 करोड़ का बजट मंजूर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
CM योगी का निर्देश: मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाएं, ₹3025.49 करोड़ का बजट मंजूर

सारांश

CM योगी आदित्यनाथ ने 172वीं मंडी परिषद बैठक में किसानों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाने का आदेश दिया। ₹3025.49 करोड़ का बजट, दुर्घटना सहायता योजनाओं का 2030 तक विस्तार और PPP मॉडल पर मंडी आधुनिकीकरण — यह बैठक UP कृषि नीति की दिशा तय करती है।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाकर अधिक मेधावी किसान-पुत्रों को लाभ देने के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की 172वीं बैठक में 2026-27 के लिए ₹3025.49 करोड़ का बजट स्वीकृत।
मंडी समितियों की आय 2024-25 के ₹1991.33 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹2305.80 करोड़ — 15.79% की वृद्धि।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना और खेत-खलिहान अग्निकांड सहायता योजना की अवधि 30 जून 2030 तक बढ़ाई गई; बजट में ₹30 करोड़ का प्रावधान।
पूर्व स्वीकृत निर्माण कार्यों के लिए ₹1212.02 करोड़ का अलग प्रावधान; मंडियों को ई-नाम से जोड़ने और PPP मॉडल पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के निर्देश।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 जुलाई 2026 को किसानों के मेधावी बच्चों के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का विस्तार करने के स्पष्ट निर्देश दिए, जिससे अधिकाधिक पात्र विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा सकें। यह निर्देश उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के संचालक मंडल की 172वीं बैठक में दिए गए, जिसकी अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री ने की। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए ₹3025.49 करोड़ के बजट सहित किसान कल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई।

मंडियों के आधुनिकीकरण पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में प्रदेश की मंडियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मंडियों में पेयजल, स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था सहित सभी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि किसानों को पारदर्शी और सुविधाजनक विपणन माहौल मिल सके। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश की मंडी समितियों की आय वर्ष 2024-25 के ₹1991.33 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹2305.80 करोड़ हो गई है — यानी 15.79 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि।

PPP मॉडल और ई-नाम से जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने मंडी स्थलों पर PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल पर कृषि उपज प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। इसके लिए नियमों को अधिक व्यावहारिक और निवेश-अनुकूल बनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हों। साथ ही अधिकाधिक मंडियों को ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) प्लेटफॉर्म से जोड़ने और प्रत्येक जनपद में ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

बजट और वित्तीय प्रावधान

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के संशोधित आय-व्यय अनुमान तथा 2026-27 के बजट को मंजूरी दी गई। वर्ष 2026-27 के लिए ₹2228.59 करोड़ की अनुमानित प्राप्तियों और ₹3025.49 करोड़ के व्यय प्रावधान को स्वीकृति मिली। बजट में मंडी स्थलों के निर्माण, संपर्क मार्गों, ग्रामीण हाट, किसान बाजार, गोवंश आश्रय स्थलों और छात्रावास निर्माण के लिए पर्याप्त राशि निर्धारित की गई है। पूर्व से स्वीकृत निर्माण कार्यों को गति देने के लिए ₹1212.02 करोड़ का अलग प्रावधान भी किया गया है।

किसान दुर्घटना सहायता योजनाओं का विस्तार

संचालक मंडल ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना तथा मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड दुर्घटना सहायता योजना की अवधि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2030 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इन दोनों योजनाओं के संचालन के लिए 2026-27 के बजट में ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है कि इन योजनाओं से दुर्घटना या अग्निकांड जैसी आपात स्थितियों में किसानों और उनके परिवारों को समयबद्ध आर्थिक सहायता मिलती है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री ने मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत दलहन और तिलहन की खरीद व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं को ब्याजमुक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से अधिकाधिक किसानों को जोड़ने के निर्देश दिए। पिछली बोर्ड बैठक के निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरा करने पर विशेष बल दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'दायरा बढ़ाने' का अर्थ कितने अतिरिक्त छात्रों तक पहुंच और कितनी राशि की वृद्धि है — यह स्पष्ट नहीं किया गया। मंडी समितियों की आय में 15.79% की वृद्धि उत्साहजनक है, परंतु PPP मॉडल पर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के प्रस्ताव पहले भी आते रहे हैं और जमीनी क्रियान्वयन की गति धीमी रही है। ₹3025.49 करोड़ के बजट में ₹1212.02 करोड़ पुराने कार्यों के लिए है — यह संकेत देता है कि पिछली बैठकों के निर्णय अभी भी लंबित हैं। बिना समयबद्ध जवाबदेही ढांचे के, ये घोषणाएं महज संकल्प बनकर रह सकती हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना क्या है और इसका दायरा क्यों बढ़ाया जा रहा है?
मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना उत्तर प्रदेश सरकार की वह योजना है जो किसानों के मेधावी बच्चों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देती है। CM योगी आदित्यनाथ ने 31 जुलाई 2026 को मंडी परिषद की 172वीं बैठक में इसका दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि अधिक पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
UP मंडी परिषद के 2026-27 के बजट में क्या-क्या शामिल है?
वर्ष 2026-27 के बजट में ₹3025.49 करोड़ का व्यय प्रावधान है, जबकि अनुमानित प्राप्तियां ₹2228.59 करोड़ हैं। इसमें मंडी निर्माण, संपर्क मार्ग, ग्रामीण हाट, किसान बाजार, गोवंश आश्रय स्थल, छात्रावास और पुराने निर्माण कार्यों के लिए ₹1212.02 करोड़ का अलग प्रावधान शामिल है।
कृषक दुर्घटना सहायता योजना की अवधि कब तक बढ़ाई गई है?
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना और मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड दुर्घटना सहायता योजना, दोनों की अवधि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2030 तक बढ़ा दी गई है। इन योजनाओं के लिए 2026-27 के बजट में ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
UP की मंडियों को ई-नाम से जोड़ने का क्या उद्देश्य है?
ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो किसानों को उनकी उपज की ऑनलाइन बिक्री और बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करता है। CM योगी ने अधिकाधिक मंडियों को इससे जोड़ने के निर्देश दिए हैं, जिससे पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी विपणन व्यवस्था सुनिश्चित होगी।
PPP मॉडल पर मंडियों में प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने से किसानों को क्या फायदा होगा?
PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल पर मंडी स्थलों में कृषि उपज प्रसंस्करण इकाइयां लगाने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले