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सीएम योगी का बड़ा फैसला: बाल श्रमिक विद्या योजना सभी 75 जनपदों में, 54,747 कामगार सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत

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सीएम योगी का बड़ा फैसला: बाल श्रमिक विद्या योजना सभी 75 जनपदों में, 54,747 कामगार सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत

सारांश

योगी सरकार ने श्रमिकों के लिए एक साथ कई मोर्चे खोले — बाल श्रम से मुक्त कराकर पढ़ाई से जोड़ना, सेवामित्र से स्थानीय रोजगार, और जर्मनी-जापान तक वैश्विक अवसर। 75 जनपदों में योजना विस्तार और 3,74,776 युवाओं को एक वर्ष में रोजगार — यह सिर्फ घोषणाएं नहीं, आंकड़े बोलते हैं।

मुख्य बातें

बाल श्रमिक विद्या योजना को 20 जनपदों से बढ़ाकर सभी 75 जनपदों में लागू करने का आदेश; 8 से 18 वर्ष के कामकाजी बच्चों को आर्थिक सहायता सहित विद्यालय में प्रवेश।
सेवामित्र पोर्टल पर वर्तमान में 54,747 कुशल कामगार , 5,049 सेवामित्र और 1,097 सेवा प्रदाता पंजीकृत।
प्रदेश में 32,583 कारखाने पंजीकृत; 2025-26 में अकेले 4,860 नए पंजीकरण ।
उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के माध्यम से 27,555 युवाओं का चयन, जिनमें 2,300 विदेश रोजगार हेतु।
2025-26 में 3,030 रोजगार मेलों से 3,74,776 अभ्यर्थियों को अवसर; 4,873 काउंसलिंग कार्यक्रमों में 6,80,469 युवा शामिल।
कानपुर में 200 क्षमता वाला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास प्रस्तावित; जर्मनी, जापान, स्लोवाक गणराज्य में रोजगार हेतु भाषा प्रशिक्षण समझौते।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 23 मई 2026 को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक में श्रमिक कल्याण, कौशल विकास और रोजगार सृजन को लेकर कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने बाल श्रमिक विद्या योजना को मौजूदा 20 जनपदों से विस्तारित कर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में लागू करने का आदेश दिया और कहा कि कोई भी बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।

बाल श्रमिक विद्या योजना का विस्तार

वर्ष 2020 में शुरू की गई इस योजना के तहत 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर आर्थिक सहायता दी जाती है। अब तक यह केवल 20 जनपदों में संचालित थी। मुख्यमंत्री ने नए प्रावधानों के साथ इसे 75 जनपदों में लागू करने के निर्देश दिए और अधिकारियों को बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया प्रभावी बनाने को कहा। निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए गए।

सेवामित्र व्यवस्था को और सशक्त बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने 'सेवामित्र व्यवस्था' को रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताया। वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल या कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 1,097 सेवा प्रदाता, 5,049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं। उन्होंने सरकारी विभागों में भी आवश्यकतानुसार इस व्यवस्था के उपयोग को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

श्रमिक सुविधा केंद्र और कानपुर प्रशिक्षण संस्थान

मुख्यमंत्री ने सभी औद्योगिक शहरों में प्रस्तावित 'लेबर अड्डों' को केवल एकत्रीकरण स्थल नहीं, बल्कि श्रमिक सहायता एवं सुविधा केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। कानपुर के विष्णुपुरी स्थित भूमि पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान प्रस्तावित है, जहाँ कारपेंटरी, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, प्लंबर, पेंटर और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन सहित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेनाझाबर स्थित भूमि पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला छात्रावास भी प्रस्तावित है।

कारखाना पंजीकरण और संस्थागत सुधार

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 32,583 कारखाने पंजीकृत हो चुके हैं। मार्च 2017 तक यह संख्या 14,176 थी, जबकि अप्रैल 2017 के बाद 18,407 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अकेले 4,860 कारखानों का पंजीकरण किया गया। श्रम विभाग को बीआरएपी सुधारों के क्रियान्वयन में 'टॉप अचीवर' के रूप में मान्यता मिली है और उद्योग समागम 2025 में श्रम क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया।

रोजगार मिशन और वैश्विक अवसर

जुलाई 2025 में गठित 'उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन' को विदेश मंत्रालय से भर्ती एजेंसी का लाइसेंस प्राप्त हो चुका है। लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में आयोजित रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से 27,555 युवाओं का चयन हुआ, जिनमें 2,300 युवाओं का चयन विदेश में रोजगार हेतु हुआ। वर्ष 2025-26 में 3,030 रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रमों के माध्यम से 3,74,776 अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए, जबकि 4,873 करियर काउंसलिंग कार्यक्रमों में 6,80,469 युवाओं ने सहभागिता की। जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य सहित विभिन्न देशों में रोजगार की संभावनाएं चिन्हित की गई हैं और संबंधित भाषाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के लिए समझौते किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने रोजगार संगम पोर्टल में एआई आधारित सेवाओं, डिजिटल जॉब मैचिंग और ऑनलाइन काउंसलिंग प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए — जो प्रदेश के सेवायोजन तंत्र को भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

74,776 युवाओं को रोजगार और 32,583 कारखानों का पंजीकरण — लेकिन असली कसौटी यह है कि रोजगार मेलों में 'चयन' और वास्तविक दीर्घकालिक नियोजन के बीच का अंतर कितना है। बाल श्रमिक विद्या योजना का 75 जनपदों में विस्तार स्वागतयोग्य है, पर 2020 से 2026 तक केवल 20 जनपदों में सीमित रहना भी सवाल उठाता है कि क्रियान्वयन की गति पर्याप्त थी या नहीं। वैश्विक रोजगार की दिशा में जर्मनी और जापान से समझौते उत्साहजनक हैं, किंतु विदेश भेजे गए 2,300 युवाओं की संख्या प्रदेश की विशाल युवा आबादी के सापेक्ष अभी प्रारंभिक चरण में ही है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाल श्रमिक विद्या योजना क्या है और इसे 75 जनपदों में क्यों विस्तारित किया जा रहा है?
यह वर्ष 2020 में शुरू की गई योजना है जिसके तहत 8 से 18 वर्ष के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर आर्थिक सहायता दी जाती है। अब तक यह केवल 20 जनपदों में थी; सीएम योगी ने इसे सभी 75 जनपदों में लागू करने का आदेश दिया ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक मजबूरी से शिक्षा से वंचित न रहे।
सेवामित्र व्यवस्था क्या है और इससे कितने कामगार जुड़े हैं?
वर्ष 2021 से संचालित सेवामित्र व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल या कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 54,747 कुशल कामगार , 5,049 सेवामित्र और 1,097 सेवा प्रदाता पंजीकृत हैं।
उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन से युवाओं को कैसे फायदा हो रहा है?
जुलाई 2025 में गठित इस मिशन को विदेश मंत्रालय से भर्ती एजेंसी का लाइसेंस मिल चुका है। अब तक 27,555 युवाओं का चयन हुआ है, जिनमें 2,300 विदेश में रोजगार के लिए चुने गए हैं। जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य में रोजगार की संभावनाएं चिन्हित की गई हैं।
कानपुर में प्रस्तावित प्रशिक्षण संस्थान में क्या सुविधाएं होंगी?
विष्णुपुरी, कानपुर में 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान प्रस्तावित है जहाँ कारपेंटरी, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, प्लंबर, पेंटर और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेनाझाबर में 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला छात्रावास भी प्रस्तावित है।
उत्तर प्रदेश में कारखाना पंजीकरण की स्थिति क्या है?
प्रदेश में अब तक 32,583 कारखाने पंजीकृत हो चुके हैं। मार्च 2017 तक यह संख्या 14,176 थी और अप्रैल 2017 के बाद 18,407 नए कारखाने जुड़े। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अकेले 4,860 कारखानों का पंजीकरण किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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