मुंबई वायु प्रदूषण: मंत्री आशीष शेलार का बीएमसी को पत्र, सप्ताह में एक दिन निर्माण कार्य बंद रखने का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री एवं मुंबई उपनगर के पालकमंत्री आशीष शेलार ने 26 अक्टूबर 2026 को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए व्यापक उपायों का सुझाव दिया है। शेलार ने प्रस्ताव रखा है कि बीएमसी क्षेत्र में सप्ताह में एक दिन सभी निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) गतिविधियाँ पूरी तरह बंद रखी जाएँ।
पत्र की पृष्ठभूमि और प्रेरणा
शेलार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की ओर से लगातार प्रदूषण संबंधी शिकायतें और सुझाव प्राप्त हो रहे हैं। गौरतलब है कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी मुंबई की खराब होती वायु गुणवत्ता पर चिंता जता चुका है।
शेलार ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2017-18 की तुलना में मुंबई में पीएम-10 प्रदूषण स्तर में लगभग 48 प्रतिशत की कमी आई है। हालाँकि उनका कहना है कि वायु गुणवत्ता में और सुधार के लिए अधिक व्यापक एवं सख्त उपायों की दरकार है।
मुख्य प्रस्ताव और सुझाव
शेलार ने दिल्ली की तर्ज पर मुंबई के लिए एक विशेष ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) तैयार करने की माँग की है, जिससे वायु गुणवत्ता खराब होने पर पूर्व निर्धारित उपाय तुरंत लागू किए जा सकें। उन्होंने प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों और प्रमुख यातायात मार्गों पर उपचारित पानी से सड़कों की धुलाई, नियमित जल छिड़काव, रात के समय मशीनीकृत सड़क सफाई, गड्ढों की तत्काल मरम्मत और खुदाई के बाद सड़कों की समयबद्ध बहाली की माँग भी रखी।
अधिक प्रदूषित क्षेत्रों और प्रमुख ट्रैफिक जंक्शनों पर एंटी-स्मॉग गन एवं मिस्ट स्प्रेयर तैनात करने का भी सुझाव दिया गया है। कचरा जलाने, डंपिंग ग्राउंड में आग लगने और निर्माण मलबे की अवैध डंपिंग जैसी घटनाओं की शिकायत के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन और सोशल मीडिया अकाउंट शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
परिवहन और उद्योग पर जोर
मंत्री ने मुंबई ट्रैफिक पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के संयुक्त अभियान चलाने का सुझाव दिया। इसके तहत प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जाँच बढ़ाने और वैध प्रमाणपत्र न रखने वाले भारी वाहनों के बीएमसी क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की माँग की गई है।
शेलार ने उद्योगों में कोयले की खपत पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के उद्योग ऊर्जा और ईंधन के लिए बड़ी मात्रा में कोयले का उपयोग करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योगों को हरित ईंधन अपनाने के लिए कम ब्याज वाले ऋण, कर रियायतें और ग्रीन एनर्जी फंड के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा लकड़ी और कोयले का उपयोग करने वाली शेष 87 बेकरियों को स्वच्छ ईंधन में परिवर्तित करने की आवश्यकता भी बताई गई।
जनभागीदारी और समन्वय का आह्वान
शेलार ने वायु प्रदूषण के विरुद्ध जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए बीएमसी के सभी 26 वार्डों में नागरिक समूहों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित सरकारी विभागों की बैठकें आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण की यह कार्रवाई केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की स्थानीय निकायों के साथ समन्वय बनाकर लागू की जानी चाहिए।
आगे की राह
इन सुझावों पर बीएमसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है। निर्माण स्थलों पर सेंसर आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली जल्द स्थापित करने और सार्वजनिक व निजी परिवहन के विद्युतीकरण को तेज करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएँ लाने की माँग भी की गई है। यह पत्र ऐसे समय आया है जब देश भर के कई महानगरों में सर्दियों से पहले वायु गुणवत्ता सूचकांक चिंताजनक स्तर पर पहुँच रहे हैं।