मुंबई: भुलेश्वर में 22 फीट की गणेश प्रतिमा गिरी, 2 की मौत — मंडल अध्यक्ष भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के भुलेश्वर में 23 अगस्त की देर रात गणेशोत्सव की तैयारियों के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब 'भुलेश्वर चा राजा' गणपति मंडल की 22 फीट ऊंची भगवान गणेश की प्रतिमा परिवहन के दौरान संतुलन बिगड़ने से गिर पड़ी। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और कम से कम पाँच अन्य घायल हो गए।
हादसे का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, शनिवार रात करीब 10:30 बजे यह विशाल प्रतिमा भायखला से भुलेश्वर स्थित पंडाल की ओर लाई जा रही थी। मंडप से मात्र 50 से 60 मीटर पहले प्रतिमा अचानक गिर गई और आसपास मौजूद लोग उसकी चपेट में आ गए। हादसे की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारी और मुंबई पुलिस मौके पर पहुँची और घायलों को नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मृतकों और घायलों की पहचान
अस्पताल में दो लोगों को मृत घोषित किया गया। मृतकों की पहचान 33 वर्षीय संकेत नेवशे और 30 वर्षीय बृजेश हेमंत जोशी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मृतकों में भुलेश्वर गणपति मंडल के अध्यक्ष भी शामिल हैं। घायलों में वैभव घेनांद (38 वर्ष), पवन चौरसिया (25 वर्ष), लावण्या गनेर (5 वर्ष), दिव्या गनेर (7 वर्ष) और कुणाल काशिद (26 वर्ष) शामिल हैं, जिनका अस्पताल में उपचार जारी है।
गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में गणेशोत्सव अत्यंत भव्य रूप से मनाया जाता है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर से आरंभ होगी। दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में घरों के साथ-साथ सार्वजनिक पंडालों में प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं और विसर्जन के लिए बड़े जुलूस निकाले जाते हैं। यह हादसा ऐसे समय में आया है जब उत्सव की तैयारियाँ अपने चरम पर हैं।
सुरक्षा पर उठे सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई में 10,600 सार्वजनिक गणेश मंडल हैं, किंतु इनमें से केवल 2,500 मंडलों ने ही दस दिवसीय उत्सव के लिए आधिकारिक अनुमति ली है। अनुमान है कि इस वर्ष पूरे महाराष्ट्र में लगभग 28 लाख गणेश प्रतिमाएँ स्थापित की जाएंगी। इस हादसे के बाद बड़ी प्रतिमाओं के परिवहन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
आगे क्या
मुंबई पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। प्रशासन से अपेक्षा है कि आगामी उत्सव के मद्देनज़र बड़ी प्रतिमाओं के परिवहन के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि इस तरह की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।