मुनस्यारी में रेनबो ट्राउट पालन का नया युग, ₹2,299 करोड़ निवेश से हिमालयी राज्यों में आजीविका क्रांति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव अभिलक्ष लिखी ने 18 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में स्थित नामजला ट्राउट फार्म का दौरा किया और घोषणा की कि यह क्षेत्र गोरी गंगा की हिमनदीय जलधाराओं और अनुकूल जल तापमान के चलते देश में रेनबो ट्राउट मछली पालन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। उन्होंने इस दौरान स्थानीय मछली पालकों से सीधा संवाद किया और कोल्डवॉटर एक्वाकल्चर में हो रही प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।
मुनस्यारी क्यों बना आदर्श केंद्र
मुनस्यारी की भौगोलिक बनावट — ऊंचाई वाले हिमनदीय क्षेत्र, स्वच्छ जलधाराएं और ठंडा जल तापमान — रेनबो ट्राउट जैसी उच्च मूल्य प्रजातियों के लिए प्राकृतिक रूप से उपयुक्त है। आईसीएआर-डायरेक्टरेट ऑफ कोल्डवॉटर फिशरीज रिसर्च (DCFR), भीमताल ने यहाँ रेनबो ट्राउट की शुरुआत कराने के साथ-साथ बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन और किसान प्रशिक्षण में वैज्ञानिक सहयोग दिया है। यह संस्थान इस पूरे पहाड़ी जलकृषि मॉडल की रीढ़ बना हुआ है।
सचिव लिखी ने स्वायत्त सहकारिता नामजला ट्राउट फार्म के दौरे में स्थानीय सहकारी समितियों की अग्रणी भूमिका की सराहना की, जिन्होंने ट्राउट पालन को टिकाऊ आजीविका के रूप में अपनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पीएमएमएसवाई के तहत ऐतिहासिक निवेश
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत कोल्डवॉटर क्षेत्रों में ₹2,299 करोड़ से अधिक का निवेश किया है। इस निवेश के तहत देशभर में 5,600 से अधिक रेसवे, 54 हैचरियाँ, 293 कोल्ड स्टोरेज और 260 फीड मिलें स्वीकृत की गई हैं। केंद्र ने देशभर में 34 मत्स्य क्लस्टरों को अधिसूचित किया है, जिनमें पिथौरागढ़ को विशेष रूप से कोल्ड वॉटर फिशरीज क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है।
गौरतलब है कि पिछले एक दशक में ट्राउट उत्पादन छह गुना बढ़कर लगभग 5,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष पर पहुँच गया है — यह आँकड़ा इस क्षेत्र में हो रहे संरचनात्मक परिवर्तन को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
नेपाल को पहला निर्यात: ऐतिहासिक उपलब्धि
जून 2026 में उत्तराखंड ने पहली बार नेपाल को ट्राउट का अंतरराष्ट्रीय निर्यात कर एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया। सचिव लिखी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे हिमालयी जलकृषि के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए रास्ते खुले हैं। इसके अलावा उत्तराखंड सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत ITBP को भी ट्राउट की आपूर्ति की जा रही है, जिससे किसानों को एक संस्थागत और सुनिश्चित बाज़ार उपलब्ध हो रहा है।
उत्तराखंड की 'ट्राउट प्रोत्साहन योजना'
राज्य सरकार ने ₹170 करोड़ की लागत से 'ट्राउट प्रोत्साहन योजना' शुरू की है। इसके तहत 2028-29 तक 1,500 रेसवे, 100 मिनी हैचरियाँ और 600 कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित करने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड में ₹317 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है — जिनमें आधुनिक मछली बाज़ार, लैंडिंग सेंटर और सितारगंज में एक एकीकृत एक्वापार्क शामिल हैं।
सीमावर्ती गाँवों पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
सचिव लिखी के अनुसार, कोल्डवॉटर एक्वाकल्चर केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है — यह ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने, महाशीर जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण और सीमावर्ती गाँवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में कोल्डवॉटर मत्स्य पालन आजीविका विविधीकरण, पोषण सुरक्षा और निर्यात क्षमता के लिहाज से रणनीतिक महत्व रखता है। यह मॉडल अब हिमालयी क्षेत्रों के लिए एक प्रतिकृति-योग्य आजीविका खाका बनता दिख रहा है।