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जेपी नड्डा ने हिमाचल की ₹55,103 करोड़ की राजमार्ग व ₹15,624 करोड़ की किशाऊ परियोजना की समीक्षा की

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जेपी नड्डा ने हिमाचल की ₹55,103 करोड़ की राजमार्ग व ₹15,624 करोड़ की किशाऊ परियोजना की समीक्षा की

सारांश

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने शिमला में हिमाचल प्रदेश की ₹55,103 करोड़ की राजमार्ग परियोजनाओं और ₹15,624 करोड़ की किशाऊ परियोजना की समीक्षा की। राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद छह राज्यों के समझौते से किशाऊ परियोजना को नई रफ्तार मिली है — यह बैठक पहाड़ी राज्य में केंद्र के बड़े बुनियादी ढाँचा निवेश की दिशा तय करती है।

मुख्य बातें

जेपी नड्डा ने 9 अक्टूबर 2026 को शिमला में हिमाचल प्रदेश की प्रमुख विकास परियोजनाओं की समीक्षा की।
₹55,103 करोड़ की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ और ₹15,624 करोड़ की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना विशेष एजेंडे पर रहीं।
15 सितंबर 2026 को छह राज्यों के समझौते के बाद किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिला; केंद्र 90% लागत वहन करेगा।
परियोजना पूर्ण होने पर 97,000 हेक्टेयर को सिंचाई सुविधा और 1,476 मिलियन यूनिट जलविद्युत उत्पादन का अनुमान।
₹7,000 करोड़ की रेणुकाजी बाँध परियोजना और ₹1,800 करोड़ की लुहरी चरण-1 जलविद्युत परियोजना पर भी चर्चा हुई।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 9 अक्टूबर 2026 को शिमला में हिमाचल प्रदेश की प्रमुख बुनियादी ढाँचा और विकास परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। इस बैठक में ₹55,103 करोड़ की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं और ₹15,624 करोड़ की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर विशेष ध्यान दिया गया। हाल ही में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद किशाऊ परियोजना के कार्यान्वयन को नई गति मिली है।

समीक्षा बैठक का दायरा

बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग, ग्रामीण सड़कें, रेलवे संपर्क, स्वास्थ्य ढाँचा, जलविद्युत परियोजनाएँ, जल संसाधन और औद्योगिक विकास से जुड़ी योजनाओं की विस्तार से समीक्षा हुई। नड्डा ने परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, लंबित मुद्दों के शीघ्र समाधान और स्वीकृत धनराशि का वास्तविक लाभ जनता तक पहुँचाने पर विशेष बल दिया।

उन्होंने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि स्वीकृत धनराशि का प्रभावी उपयोग, समय पर प्रशासनिक निर्णय और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि जनहित की परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: नई गति

समीक्षा बैठक में ₹15,624 करोड़ की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना विशेष चर्चा का केंद्र रही। 15 सितंबर 2026 को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच हुए बहुपक्षीय समझौते ने इस लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर निर्मित होने वाली यह परियोजना जल भंडारण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा देगी।

राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद केंद्र सरकार इसकी लगभग 90 प्रतिशत लागत वहन करेगी, जबकि शेष व्यय भागीदार राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा। परियोजना के पूर्ण होने पर लगभग 97,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने और करीब 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन होने का अनुमान है।

अन्य प्रमुख परियोजनाएँ

समीक्षा के दौरान ₹7,000 करोड़ की रेणुकाजी बाँध परियोजना और ₹1,800 करोड़ की लुहरी चरण-1 जलविद्युत परियोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ये दोनों परियोजनाएँ राज्य की ऊर्जा और जल संसाधन आवश्यकताओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

बुनियादी ढाँचे का व्यापक महत्व

पहाड़ी राज्य में बुनियादी ढाँचे की भूमिका को रेखांकित करते हुए नड्डा ने कहा कि सड़क और रेल संपर्क केवल आवागमन तक सीमित नहीं है — यह मरीजों को अस्पताल तक पहुँचाने, किसानों और बागवानों को बाजार से जोड़ने, पर्यटन को प्रोत्साहन देने और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में भी अहम भूमिका निभाता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजनाओं में सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता और समयसीमा का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में भौगोलिक चुनौतियों के कारण बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ प्रायः विलंब और लागत-वृद्धि का सामना करती हैं।

केंद्र की प्रतिबद्धता

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में बेहतर संपर्क व्यवस्था, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आर्थिक अवसरों के सृजन के लिए निरंतर निवेश और सहयोग देने को प्रतिबद्ध है। समीक्षा बैठक के परिणामस्वरूप आगामी हफ्तों में संबंधित परियोजनाओं पर क्रियान्वयन की गति और तेज होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भूस्खलन और अंतर-राज्यीय समन्वय की चुनौतियाँ इन परियोजनाओं को बजट और समयसीमा दोनों से बाहर कर देती हैं। जब तक परियोजनाओं की प्रगति के लिए पारदर्शी निगरानी तंत्र स्थापित नहीं होता, ये बड़े आँकड़े कागज़ पर ही रह सकते हैं।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश में किन परियोजनाओं की समीक्षा की?
नड्डा ने ₹55,103 करोड़ की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं, ₹15,624 करोड़ की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना, ₹7,000 करोड़ की रेणुकाजी बाँध परियोजना और ₹1,800 करोड़ की लुहरी चरण-1 जलविद्युत परियोजना सहित राज्य की प्रमुख बुनियादी ढाँचा योजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा ग्रामीण सड़कें, रेलवे संपर्क, स्वास्थ्य ढाँचा और औद्योगिक विकास भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहे।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना क्या है और इसे राष्ट्रीय दर्जा क्यों मिला?
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टोंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर बनने वाली ₹15,624 करोड़ की परियोजना है, जो जल भंडारण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए बनाई जाएगी। 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों — हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली — के बीच हुए समझौते के बाद इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया, जिससे केंद्र सरकार लगभग 90% लागत वहन करेगी।
किशाऊ परियोजना पूर्ण होने पर क्या फायदे होंगे?
परियोजना पूर्ण होने पर लगभग 97,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी और करीब 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन होने का अनुमान है। यह कई राज्यों की कृषि और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी।
नड्डा ने राज्य सरकार को परियोजनाओं के संदर्भ में क्या निर्देश दिए?
नड्डा ने राज्य सरकार से स्वीकृत धनराशि का प्रभावी उपयोग, समय पर प्रशासनिक निर्णय और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजनाओं में सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता और समयसीमा का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश में बुनियादी ढाँचे का क्या महत्व है?
नड्डा के अनुसार, पहाड़ी राज्य में सड़क और रेल संपर्क केवल यातायात तक सीमित नहीं है — यह मरीजों को अस्पताल पहुँचाने, किसानों को बाजार से जोड़ने, पर्यटन और रोजगार बढ़ाने तथा आपदाओं में राहत कार्यों के लिए भी आवश्यक है। पहाड़ी भूगोल के कारण यहाँ बुनियादी ढाँचे की भूमिका मैदानी राज्यों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है।
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