नागपुर का इको-फ्रेंडली गुलाल: होली पर तीन पीढ़ियों की पारंपरिक कला
सारांश
Key Takeaways
- इको-फ्रेंडली गुलाल त्वचा और पर्यावरण के लिए सुरक्षित है।
- आदमने परिवार की पारंपरिक कला इस व्यवसाय का आधार है।
- गुलाल बनाने में प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है।
- इस बार गुलाल की कीमतें सस्ती हैं।
- प्राकृतिक विकल्पों की मांग बढ़ रही है।
नागपुर, २७ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। होली का त्योहार नजदीक आते ही देशभर में रंगों की दुकानों में हलचल तेज हो गई है। इस बार नागपुर का इको-फ्रेंडली गुलाल खासतौर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जो प्राकृतिक सामग्री से बना होने के कारण त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित है। विदर्भ और मध्य भारत के कई शहरों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
नागपुर के आदमने परिवार की पारंपरिक विरासत इस व्यवसाय की नींव है। परिवार की तीसरी पीढ़ी इस पारंपरिक गुलाल निर्माण को संभाल रही है।
रोशन आदमने ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया, "यह व्यवसाय हमारे दादाजी द्वारा स्थापित किया गया था। हम अरारोट को मुख्य सामग्री बनाते हैं। इसमें खाद्य ग्रेड और सुरक्षित रंगों का मिश्रण किया जाता है। किसी भी हानिकारक केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता। पानी और रंग मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसे धूप में सुखाकर मशीन से छानकर पैक किया जाता है। इससे हरा, नीला, लाल, पीला सहित कुल ७-८ आकर्षक रंग बनते हैं।"
रोशन ने आगे कहा, "हमारा उद्देश्य केवल व्यापार करना नहीं है। हम सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल रंगों से होली का उत्सव बिना किसी नुकसान के मनाने में सहायता करना चाहते हैं। यह गुलाल विदर्भ के अलावा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी सप्लाई किया जाता है। दूसरे राज्यों से डिमांड आने पर भी भेजा जाता है।"
उन्होंने कहा, "इस बार बाजार में गुलाल की कीमतें सस्ती हैं। शायद जीएसटी का असर है। ग्राहकों को अच्छी राहत मिली है और वे अधिक मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।"
प्राकृतिक गुलाल की बढ़ती लोकप्रियता का एक बड़ा कारण केमिकल युक्त रंगों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता है। लोग एलर्जी, आंखों में जलन और पर्यावरण प्रदूषण से बचने के लिए प्राकृतिक विकल्प चुन रहे हैं। नागपुर का यह इको-फ्रेंडली गुलाल न केवल सुरक्षित है, बल्कि त्योहार की रंगीन परंपरा को भी जीवित बनाए रखता है।
होली के अवसर पर बाजार में रंग-बिरंगे गुलाल की भरमार है। ग्राहक अब केमिकल-फ्री और बेहतर विकल्प की ओर बढ़ रहे हैं। आदमने परिवार जैसे पारंपरिक निर्माता इस मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उम्मीद है कि इस होली पर घर-घर में प्राकृतिक गुलाल की खुशबू और रंग बिखरेंगे, जो न केवल त्योहार को यादगार बनाएंगे, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य की भी रक्षा करेंगे।