नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव में भाजपा की जीत पर पवन सिंह बोले — हारते ही विपक्ष को याद आती है 'वोट चोरी'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद पार्टी के विधायक पवन सिंह ने 9 अक्टूबर 2026 को खुशी जताई और विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों पर तीखा कटाक्ष किया। उनका कहना था कि हार की हताशा में विपक्ष हर बार यही 'प्रोपैगेंडा' दोहराता है।
जीत पर भाजपा की प्रतिक्रिया
विधायक पवन सिंह ने भाटपाड़ा में मीडिया से बात करते हुए कहा, 'हमारे पार्टी के उम्मीदवार दोनों जगहों से जीत गए, उनकी इस जीत के लिए बहुत-बहुत बधाई। आने वाले समय में हम लोग विधानसभा में मिलेंगे और बातें करेंगे।' उन्होंने कहा कि विधानसभा में आगे की रणनीति मिलकर तय की जाएगी और 'बंगाल के लोगों के लिए अच्छा संदेश है, तभी तो भाजपा जीत रही है।'
पवन सिंह ने यह भी कहा कि पिछली सरकारों ने 34 वर्षों में जो काम नहीं किया, उसे मौजूदा सरकार बहुत कम समय में सुधारने में जुटी है। उनके अनुसार, डेढ़ साल के भीतर उन खामियों को दूर किया जाएगा जिसके बाद व्यवस्था सुचारु रूप से काम करेगी।
विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार
उपचुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए पवन सिंह ने कहा कि जीत की उम्मीद पहले से ही थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'जीतने के बाद फिर से सभी को एक चीज सुनने को मिलेगी कि हम लोगों ने वोट चोरी की है। जहाँ विपक्ष हारता है, वो पहले से इस तरह का प्रोपैगेंडा शुरू कर देता है।' उनका कहना था कि हार की हताशा को विपक्ष इसी तरह व्यक्त करता है।
धांधली के आरोपों पर पवन सिंह ने सीधा पलटवार किया — 'फिर तो मैं भी यह कह सकता हूँ कि जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार थी, वो जब भी जीतती थी, तो क्या वो चोरी करती थी? वो तो फिर बड़े पैमाने पर चोरी करती होगी।' यह बयान उन्होंने TMC के कथित दबाव और चुनावी आरोपों के संदर्भ में दिया।
अल्पसंख्यक मतदाताओं के जुड़ाव का दावा
पवन सिंह ने यह भी दावा किया कि चुनाव अभियान के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के लोग खुद भाजपा से जुड़ने की इच्छा जता रहे थे। उन्होंने कहा कि इन लोगों को पहले यह डर दिखाया गया था कि भाजपा की सरकार बनने पर उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
हालाँकि, उनके अनुसार, सरकार बदलने के चार-पाँच महीनों में इन मतदाताओं ने स्वयं महसूस किया कि सरकार सभी वर्गों के लिए काम करना चाहती है, जिससे उनकी सोच में बदलाव आया और उन्होंने भाजपा को मौका देने का निर्णय लिया।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील और प्रतीकात्मक सीट रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा की सत्ता में वापसी हुई है और उपचुनाव नई सरकार के लिए जनमत का पहला बड़ा परीक्षण थे। इन दोनों सीटों पर जीत भाजपा नेतृत्व के लिए राजनीतिक मजबूती का संदेश है। पार्टी अब विधानसभा में अपनी रणनीति और आगे की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने की तैयारी में है।