रेजीनगर-नंदीग्राम में भाजपा की जीत पर TMC नेता कुणाल घोष का आरोप: 'आर्टिफिशियल और मैन्युफैक्चर्ड रिजल्ट'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग और प्रशासन पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। TMC के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने 9 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में कहा कि ये नतीजे जनता की राय नहीं, बल्कि 'वोट चोरी' का परिणाम हैं। घोष के अनुसार, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के नाम पर हज़ारों वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और पुलिस ने बूथों पर ताला लगाकर लोगों को मतदान से वंचित किया।
मुख्य आरोप और कुणाल घोष का बयान
कुणाल घोष ने कहा, 'यह कोई चुनाव ही नहीं हुआ, यह पूरा रिजल्ट ही फर्जी है। यह पूरी तरह से आर्टिफिशियल और मैन्युफैक्चर्ड रिजल्ट है। इसका जनता की राय से कोई संबंध नहीं है।' उन्होंने कहा कि TMC के एजेंटों को बूथ तक पहुँचने ही नहीं दिया गया और पार्टी कार्यकर्ताओं को धमकाया, गिरफ्तार किया तथा इलाके से हटा दिया गया। घोष के अनुसार, ममता बनर्जी के उम्मीदवारों से लेकर गठबंधन प्रत्याशियों तक सभी को दबाव में रखा गया।
मतदाता सूची और बूथ पर लगाए आरोप
घोष ने दावा किया कि चुनाव आयोग द्वारा तैयार मतदाता सूची में एसआईआर की आड़ में बड़ी संख्या में वैध वोटरों के नाम हटा दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि जब मतदाता बूथ पहुँचने की कोशिश करते थे, पुलिस ने कई जगहों पर बूथ बंद कर दिए और लोगों को वापस भगा दिया। TMC नेता के अनुसार, गाँव-गाँव में महिलाओं ने शिकायतें कीं कि उन्हें बूथ तक नहीं जाने दिया गया।
उम्मीदवारों पर असर और TMC का दावा
घोष ने कहा कि यदि निष्पक्ष चुनाव हुआ होता तो डोमकल में ममता बनर्जी और कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार विलाल हुसैन तथा रेजीनगर में TMC प्रत्याशी रबिउल आलम चौधरी की जीत के पूरे अवसर थे। उन्होंने कहा कि जनता के बीच BJP का भरोसा नहीं है और पार्टी को खुद यह विश्वास है कि सामान्य मतदान होने पर वह हार जाएगी — इसीलिए कथित तौर पर सामान्य ढंग से मतदान नहीं होने दिया जाता।
चुनाव आयोग पर निशाना
कुणाल घोष ने तीखे शब्दों में कहा कि इससे तो बेहतर है कि जिस दिन चुनाव की घोषणा हो, उसी दिन दोनों सीटें BJP के नाम घोषित कर दी जाएं। उन्होंने BJP नेता शुभेंदु अधिकारी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे पुलिस और प्रशासन के 'बैकअप' पर भरोसा रखकर ही इस तरह की बातें कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में किसी उपचुनाव के नतीजों के बाद मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हों — राज्य में विधानसभा चुनावों से लेकर उपचुनावों तक हिंसा और प्रशासनिक पक्षपात के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। आगे देखना होगा कि TMC इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग में याचिका दायर करती है या न्यायालय का दरवाजा खटखटाती है।