8 अक्टूबर 2026
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जीएसटी परिषद की सिफारिशों पर नैसकॉम ने जताई संतुष्टि, आईटी सेक्टर को मिलेगी राहत

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जीएसटी परिषद की सिफारिशों पर नैसकॉम ने जताई संतुष्टि, आईटी सेक्टर को मिलेगी राहत

सारांश

जीएसटी परिषद की सिफारिशें भारतीय आईटी उद्योग के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई हैं। विदेशी शाखाओं के ज़रिए सेवा निर्यात, आरएंडडी सेवाओं की पात्रता और कर्मचारी बीमा पर आईटीसी — इन तीनों मोर्चों पर वर्षों की अनिश्चितता समाप्त होने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

नैसकॉम ने 8 अक्टूबर 2026 को जीएसटी परिषद की सिफारिशों का स्वागत करते हुए इन्हें आईटी उद्योग की दीर्घकालिक चिंताओं का समाधान बताया।
विदेश में स्थित शाखाओं के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं को निर्यात की श्रेणी में लाने की सिफारिश से कर अनिश्चितता और मुकदमेबाज़ी घटने की उम्मीद।
इंजीनियरिंग आरएंडडी , जीसीसी और डीप-टेक स्टार्टअप्स को रिसर्च एवं टेस्टिंग सेवाओं पर आपूर्ति स्थल नियमों में बदलाव से फायदा मिलेगा।
ई-कॉमर्स के छोटे विक्रेताओं के लिए सरल अंतरराज्यीय पंजीकरण व्यवस्था का भी प्रस्ताव है।
कर्मचारी स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति देने की सिफारिश उद्योग की एक और लंबित माँग पूरी करती है।

नैसकॉम ने 8 अक्टूबर 2026 को कहा कि जीएसटी परिषद की ताज़ा सिफारिशों ने नई दिल्ली स्थित आईटी-आईटीईएस उद्योग की सेवा निर्यात, इनपुट टैक्स क्रेडिट, रिफंड और अनुपालन से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान किया है। नोटिस, अभियोजन और गिरफ्तारी की शक्तियों से संबंधित प्रस्ताव कर प्रवर्तन के प्रति एक संतुलित नज़रिए का संकेत देते हैं।

उद्योग की मुख्य प्रतिक्रिया

आईटी सॉफ्टवेयर क्षेत्र के शीर्ष व्यापारिक संगठन नैसकॉम ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'हम इन मुद्दों पर उद्योग के साथ केंद्र और राज्य सरकारों, वित्त मंत्रालय तथा सीबीआईसी की रचनात्मक भागीदारी की सराहना करते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब आईटी उद्योग लंबे समय से जीएसटी ढाँचे में कुछ संरचनात्मक बदलावों की माँग करता रहा है।

विदेशी शाखाओं के ज़रिए सेवाओं पर बड़ा बदलाव

नैसकॉम ने विशेष रूप से उस सिफारिश का स्वागत किया है जिसमें आईटी-आईटीईएस कंपनियों द्वारा विदेश में स्थित अपनी शाखाओं के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं को निर्यात की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है। मौजूदा कानून के अंतर्गत, भारतीय कार्यालय और उसकी विदेशी शाखा एक ही संस्था मानी जाती है, इसलिए उनके बीच होने वाली सेवाएँ निर्यात के रूप में मान्य नहीं होती थीं।

नैसकॉम के अनुसार, इस प्रतिबंध को हटाने की सिफारिश से कर संबंधी अनिश्चितता, मुकदमेबाज़ी और अनावश्यक कार्यशील पूंजी लागत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है — बशर्ते अन्य निर्यात शर्तें पूरी हों।

आरएंडडी और इंजीनियरिंग सेवाओं को राहत

जीएसटी परिषद ने विदेशी ग्राहकों के स्वामित्व वाले सामान पर भारत में की जाने वाली रिसर्च, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और इंजीनियरिंग सेवाओं के लिए आपूर्ति स्थल के नियमों में बदलाव की भी सिफारिश की है। अब तक ग्राहक के प्रोटोटाइप या सैंपल की भारत में भौतिक मौजूदगी के कारण ऐसी सेवाएँ निर्यात के रूप में योग्य नहीं मानी जाती थीं।

गौरतलब है कि प्रस्तावित बदलाव से इंजीनियरिंग आरएंडडी कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और डीप-टेक स्टार्टअप्स को सीधा फायदा मिल सकता है। इससे भारत को वैश्विक रिसर्च और इंजीनियरिंग का अधिक कार्य आकर्षित करने में भी सहायता मिलने की संभावना है।

ई-कॉमर्स और छोटे विक्रेताओं के लिए सरलीकरण

ई-कॉमर्स के क्षेत्र में, दूसरे राज्यों में प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस का उपयोग करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए प्रस्तावित सरल पंजीकरण व्यवस्था का भी नैसकॉम ने स्वागत किया। इस बदलाव से छोटे कारोबारियों को हर राज्य में अलग परिसर स्थापित किए बिना अंतरराज्यीय ऑनलाइन कारोबार में भाग लेने की सुविधा मिलेगी।

इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिफंड में सुधार

नैसकॉम ने इनवर्टेड-ड्यू रिफंड को इनपुट सेवाओं तक बढ़ाने, प्लांट और मशीनरी के लिए रिफंड की पात्रता तथा रिफंड के तेज़ प्रसंस्करण के प्रस्ताव का भी स्वागत किया। इसके अलावा, कर्मचारी स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की अनुमति देने की सिफारिश से उद्योग की एक और दीर्घकालिक माँग पूरी होती दिख रही है। नैसकॉम के अनुसार, इन बदलावों से कारोबारी खर्चों में फंसे वैध टैक्स क्रेडिट की राशि घटाने में मदद मिलेगी। अब नज़रें इन सिफारिशों के आधिकारिक अधिसूचना और कानूनी क्रियान्वयन पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वर्षों से भारतीय आईटी कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नुकसान पहुँचाती रही हैं — खासकर तब जब जीसीसी और इंजीनियरिंग आरएंडडी के क्षेत्र में भारत, मेक्सिको और पोलैंड जैसे देशों से कड़ी टक्कर झेल रहा है। लेकिन असली परीक्षा अधिसूचना और क्रियान्वयन की होगी — जीएसटी में 'सिफारिश' और 'लागू कानून' के बीच की खाई कई बार उद्योग को निराश कर चुकी है। कर्मचारी बीमा पर आईटीसी की अनुमति एक सकारात्मक संकेत है, मगर यह देखना होगा कि रिफंड प्रसंस्करण की गति धरातल पर कितनी बदलती है, क्योंकि कागज़ी सुधार और व्यावहारिक राहत के बीच फासला अक्सर बड़ा रहा है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसटी परिषद की किन सिफारिशों पर नैसकॉम ने संतोष जताया है?
नैसकॉम ने सेवा निर्यात, इनपुट टैक्स क्रेडिट, रिफंड, अनुपालन और कर प्रवर्तन संतुलन से जुड़ी जीएसटी परिषद की सिफारिशों का स्वागत किया है। विशेष रूप से विदेशी शाखाओं के ज़रिए सेवा निर्यात की योग्यता, आरएंडडी सेवाओं पर आपूर्ति स्थल नियम, और कर्मचारी बीमा पर आईटीसी की अनुमति को महत्वपूर्ण बताया गया है।
विदेशी शाखाओं के माध्यम से सेवा निर्यात पर जीएसटी बदलाव का क्या मतलब है?
मौजूदा कानून में भारतीय कार्यालय और उसकी विदेशी शाखा एक ही संस्था मानी जाती है, इसलिए उनके बीच की सेवाएँ निर्यात नहीं मानी जाती थीं। परिषद की सिफारिश इस प्रतिबंध को हटाने की है, जिससे अन्य निर्यात शर्तें पूरी होने पर कर अनिश्चितता और मुकदमेबाज़ी कम होगी।
जीसीसी और इंजीनियरिंग आरएंडडी कंपनियों को क्या फायदा होगा?
विदेशी ग्राहकों के सामान पर भारत में की जाने वाली रिसर्च, टेस्टिंग और इंजीनियरिंग सेवाओं के लिए आपूर्ति स्थल नियमों में बदलाव की सिफारिश की गई है। इससे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, इंजीनियरिंग आरएंडडी फर्में और डीप-टेक स्टार्टअप्स इन सेवाओं को निर्यात के रूप में वर्गीकृत करा सकेंगे, जो पहले संभव नहीं था।
ई-कॉमर्स के छोटे विक्रेताओं के लिए क्या राहत प्रस्तावित है?
जीएसटी परिषद ने उन छोटे विक्रेताओं के लिए सरल पंजीकरण व्यवस्था की सिफारिश की है जो दूसरे राज्यों में प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस का उपयोग करते हैं। इससे उन्हें हर राज्य में अलग परिसर स्थापित किए बिना अंतरराज्यीय ऑनलाइन कारोबार करने की सुविधा मिलेगी।
कर्मचारी बीमा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की सिफारिश से क्या बदलेगा?
जीएसटी परिषद ने कर्मचारी स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति देने की सिफारिश की है। नैसकॉम के अनुसार, इससे कारोबारी खर्चों में फंसे वैध टैक्स क्रेडिट की राशि घटेगी और उद्योग की वर्षों पुरानी माँग पूरी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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