1 अक्टूबर 2026
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नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 लॉन्च: 50 लाख नए कनेक्शन का लक्ष्य, हरदीप पुरी ने किया शुभारंभ

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नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 लॉन्च: 50 लाख नए कनेक्शन का लक्ष्य, हरदीप पुरी ने किया शुभारंभ

सारांश

सरकार ने पीएनजी ड्राइव 3.0 के ज़रिए एलपीजी से पाइप्ड गैस की ओर देश को तेज़ी से ले जाने की कोशिश की है — 50 लाख नए कनेक्शन और 40 लाख निष्क्रिय कनेक्शन सक्रिय करने का लक्ष्य, पर असली चुनौती ग्रामीण इलाकों में ज़मीनी अमल की है।

मुख्य बातें

हरदीप सिंह पुरी ने 1 अक्टूबर 2026 को नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 का शुभारंभ किया।
अभियान 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक चलेगा; लक्ष्य — 50 लाख नए घरेलू कनेक्शन, 40 लाख निष्क्रिय कनेक्शन सक्रिय, 50 लाख नए पंजीकरण।
देशभर में 6,87,966 इंच-किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क तैयार; 1.30 करोड़ अतिरिक्त कनेक्शन देने की क्षमता मौजूद।
पीएनजी ड्राइव 2.0 में दैनिक कनेक्शन दर में 43% और बिलिंग उपभोक्ताओं में 166% की वृद्धि दर्ज हुई थी।
पीएनजीआरबी ने 34,233 किलोमीटर पाइपलाइन को मंजूरी दी; जून 2025 तक 25,429 किलोमीटर चालू, 10,459 किलोमीटर निर्माणाधीन।
भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की मौजूदा हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाना सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1 अक्टूबर 2026 को नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 का औपचारिक शुभारंभ किया, जिसका मुख्य उद्देश्य देशभर में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की पहुँच को तेज़ी से विस्तारित करना और भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा लगभग 6 प्रतिशत से आगे ले जाना है। यह अभियान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर शुरू किया गया।

अभियान की समयसीमा और भागीदार

पीएनजी ड्राइव 3.0 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक चलाया जाएगा। इस राष्ट्रव्यापी अभियान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, पीएनजीआरबी, सिटी गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियाँ, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियाँ और अन्य प्रमुख हितधारक सक्रिय भूमिका निभाएँगे। यह सहयोगात्मक ढाँचा अभियान की व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है।

मुख्य लक्ष्य और कार्ययोजना

सरकार ने इस अभियान के तहत तीन स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं — 50 लाख नए घरेलू पीएनजी कनेक्शन जोड़ना, 40 लाख निष्क्रिय कनेक्शनों को सक्रिय उपभोक्ताओं में परिवर्तित करना, और 50 लाख नए पीएनजी पंजीकरण हासिल करना। मंत्री पुरी ने स्पष्ट किया कि इस अभियान में एलपीजी से पीएनजी की ओर उपभोक्ताओं को स्थानांतरित करने, मौजूदा गैस अवसंरचना का अधिकतम दोहन करने, और अर्ध-शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार पर विशेष ज़ोर रहेगा।

गौरतलब है कि देशभर में अब तक 6,87,966 इंच-किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया जा चुका है, जिसके आधार पर लगभग 1.30 करोड़ अतिरिक्त पीएनजी कनेक्शन देने की क्षमता पहले से मौजूद है।

पीएनजी ड्राइव 2.0 की उपलब्धियाँ

इससे पहले चलाए गए पीएनजी ड्राइव 2.0 के तहत 12.10 लाख कनेक्शन, 13.37 लाख बिल्ड कनेक्शन और 15.31 लाख घरेलू पीएनजी पंजीकरण हासिल किए गए थे। उस अभियान के दौरान दैनिक घरेलू पीएनजी कनेक्शन जोड़ने की दर में 43 प्रतिशत और बिलिंग उपभोक्ताओं की संख्या में 166 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी — एक ऐसा आधार जिस पर ड्राइव 3.0 की महत्वाकांक्षी योजनाएँ टिकी हैं।

गैस पाइपलाइन अवसंरचना का विस्तार

प्राकृतिक गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पीएनजीआरबी ने देशभर में लगभग 34,233 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी दी है, जिनमें कॉमन कैरियर, स्पर लाइन, टाई-इन कनेक्टिविटी और समर्पित पाइपलाइन शामिल हैं। जून 2025 तक इनमें से 25,429 किलोमीटर नेटवर्क चालू हो चुका था, जबकि 10,459 किलोमीटर पाइपलाइन विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'वन नेशन, वन गैस ग्रिड' के लक्ष्य की दिशा में प्रमुख ट्रंक पाइपलाइनों को मंजूरी देना, कम माँग वाले क्षेत्रों में वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराना, एकीकृत टैरिफ प्रणाली लागू करना, सीजीडी नेटवर्क का विस्तार और एलएनजी टर्मिनलों की स्थापना जैसे कदम उठा रही है।

आम जनता और उद्योग पर असर

सरकार के अनुसार, इस अभियान की सफलता से ग्रामीण क्षेत्रों, औद्योगिक क्लस्टरों और शहरों में स्वच्छ, भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी, पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता घटेगी और घरेलू जीवन अधिक सुविधाजनक बनेगा। औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर प्राकृतिक गैस मिलने से विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और रोज़गार सृजन को बल मिलेगा। इसके अतिरिक्त, सीएनजी और पीएनजी के बढ़ते उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी और पर्यावरणीय स्थिरता को मज़बूती मिलने की उम्मीद है।

अगले छह महीने यह तय करेंगे कि ड्राइव 3.0 अपने पूर्ववर्ती की तुलना में कहीं अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल कर पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में है, जहाँ बुनियादी ढाँचे की कमी और उपभोक्ता जागरूकता अब भी बड़ी बाधाएँ हैं। ड्राइव 2.0 की 166 प्रतिशत बिलिंग वृद्धि प्रभावशाली दिखती है, पर यह एक कम आधार पर थी — ड्राइव 3.0 को अब उस आधार को विस्तारित करना है। भारत की ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी वर्षों से 6 प्रतिशत के आसपास अटकी है; बिना मूल्य निर्धारण और वितरण सुधारों के, महज कनेक्शन संख्याएँ इस सुई को नहीं हिला सकतीं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 क्या है?
नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 केंद्र सरकार का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जो 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक चलेगा। इसका उद्देश्य देशभर में पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन बढ़ाना, निष्क्रिय कनेक्शनों को सक्रिय करना और एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी की ओर स्थानांतरित करना है।
पीएनजी ड्राइव 3.0 के तहत क्या लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं?
सरकार ने तीन प्रमुख लक्ष्य तय किए हैं — 50 लाख नए घरेलू पीएनजी कनेक्शन, 40 लाख निष्क्रिय कनेक्शनों को सक्रिय उपभोक्ताओं में बदलना और 50 लाख नए पीएनजी पंजीकरण। इसके अलावा अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार पर विशेष ज़ोर रहेगा।
पीएनजी ड्राइव 2.0 की तुलना में ड्राइव 3.0 कितना बड़ा है?
पीएनजी ड्राइव 2.0 के तहत 12.10 लाख कनेक्शन और 15.31 लाख घरेलू पंजीकरण हासिल हुए थे। ड्राइव 3.0 के लक्ष्य इससे कई गुना बड़े हैं — 50 लाख नए कनेक्शन और 50 लाख नए पंजीकरण — जो इस अभियान को अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी पीएनजी विस्तार अभियान बनाता है।
भारत में अभी कितना गैस पाइपलाइन नेटवर्क तैयार है?
पीएनजीआरबी ने देशभर में लगभग 34,233 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी दी है। जून 2025 तक इनमें से 25,429 किलोमीटर चालू हो चुका था और 10,459 किलोमीटर निर्माणाधीन है। इसके अलावा 6,87,966 इंच-किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क पहले से बिछा है जिससे 1.30 करोड़ अतिरिक्त कनेक्शन की क्षमता है।
पीएनजी कनेक्शन बढ़ने से आम घरों और उद्योगों को क्या फायदा होगा?
घरों में पीएनजी मिलने से एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता घटेगी, ईंधन अधिक सुविधाजनक और किफायती होगा, और वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी। औद्योगिक क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता से परिचालन लागत घटेगी, नया निवेश आकर्षित होगा और रोज़गार सृजन को बल मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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