3 नवंबर 2026
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भारतीय नौसेना ने 48 घंटे के ऑपरेशन में जहाज 'अजिनी' मुक्त कराया, सोमालियाई लुटेरों से 20 बंधक बचाए

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भारतीय नौसेना ने 48 घंटे के ऑपरेशन में जहाज 'अजिनी' मुक्त कराया, सोमालियाई लुटेरों से 20 बंधक बचाए

सारांश

48 घंटे, 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर अरब सागर, नौसेना के मरीन कमांडो और वायुसेना का सी-17 — भारत ने सोमालियाई समुद्री लुटेरों को करारा जवाब देते हुए जहाज 'अजिनी' और उस पर सवार सभी 20 बंधकों को सकुशल छुड़ाया। यह ऑपरेशन हिंद महासागर में भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का ताज़ा प्रमाण है।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना ने 2 नवंबर 2026 को अरब सागर में 48 घंटे से अधिक चले ऑपरेशन में मछली पकड़ने वाले जहाज 'अजिनी' को सोमालियाई लुटेरों से मुक्त कराया।
जहाज पर सवार सभी 20 चालक दल के सदस्य सुरक्षित बचाए गए; किसी को चोट नहीं आई।
ऑपरेशन मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर अंजाम दिया गया; भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान ने कमांडो को तैनात किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना को बधाई देते हुए इसे भारत की उच्च परिचालन क्षमता का प्रमाण बताया।
लुटेरों ने जहाज को दूसरे व्यावसायिक जहाजों पर हमले के लिए 'मदर शिप' के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी।

भारतीय नौसेना ने 2 नवंबर 2026 को अरब सागर में 48 घंटे से अधिक समय तक चले एक सुनियोजित समुद्री अभियान में मछली पकड़ने वाले जहाज 'अजिनी' को सोमालियाई समुद्री लुटेरों के कब्जे से मुक्त कराया और उस पर सवार सभी 20 चालक दल के सदस्यों को सकुशल बचा लिया। यह ऑपरेशन मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर अंजाम दिया गया और इसमें किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई।

अपहरण की पृष्ठभूमि

पिछले महीने सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के निकट हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने 'अजिनी' को अगवा कर लिया था। खुफिया आकलन के अनुसार, आशंका थी कि लुटेरे इस जहाज को बड़े 'मदर शिप' की तरह इस्तेमाल करते हुए अरब सागर में अन्य व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर सकते हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया जब हिंद महासागर में समुद्री डकैती की घटनाओं में पुनः वृद्धि दर्ज की जा रही है।

ऑपरेशन का क्रम

भारतीय नौसेना ने तत्परता दिखाते हुए एक युद्धपोत और समुद्री निगरानी विमान को अभियान पर भेजा। दोनों ने मिलकर निरंतर निगरानी की और अगवा जहाज का सटीक ठिकाना चिह्नित किया। इसके बाद लुटेरों की आवाजाही रोकने के लिए गैर-घातक उपाय अपनाए गए और जहाज को घेर लिया गया।

अभियान को निर्णायक मोड़ देने के लिए भारतीय वायुसेना का सी-17 विमान भी मिशन में शामिल हुआ। विमान से सटीक हवाई आपूर्ति के ज़रिए नौसेना के मरीन कमांडो को अभियान स्थल तक पहुँचाया गया। कमांडो ने तेज़ और सुनियोजित रणनीति के साथ जहाज पर कार्रवाई की, हथियारबंद लुटेरों के खतरे को समाप्त किया और जहाज पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।

रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल अभियान के लिए भारतीय नौसेना को बधाई दी। उन्होंने कहा, 'समुद्री लुटेरों के कब्जे से जहाज और उसके सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित छुड़ाना भारतीय नौसेना की उच्च परिचालन क्षमता और किसी भी समुद्री खतरे का निर्णायक जवाब देने की तैयारी को दर्शाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना के समय पर मिले सहयोग ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रणनीतिक महत्व

यह ऑपरेशन नौसेना और वायुसेना के बीच उत्कृष्ट अंतर-सेवा समन्वय का उदाहरण है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में 'प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश' और भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद महासागर के प्रति भारत की प्रतिबद्धता अडिग है।

इस बचाव अभियान के साथ भारतीय नौसेना ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि समुद्री यात्रियों की सुरक्षा और महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक मंशा का स्पष्ट संदेश है। गौर करने वाली बात यह है कि नौसेना और वायुसेना का यह संयुक्त अभियान मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर अंजाम दिया गया — यह भारत की 'पावर प्रोजेक्शन' क्षमता का ठोस प्रमाण है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या भारत सोमालिया के आसपास के जलक्षेत्र में दीर्घकालिक निरोधक उपस्थिति बनाए रखने के लिए संसाधन और राजनयिक ढाँचा तैयार कर सकता है, क्योंकि एकल अभियान की सफलता के बाद भी इस क्षेत्र में समुद्री डकैती की पुनरावृत्ति का खतरा बना रहता है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय नौसेना ने जहाज 'अजिनी' को कैसे मुक्त कराया?
भारतीय नौसेना ने एक युद्धपोत और समुद्री निगरानी विमान की मदद से जहाज का पता लगाया, गैर-घातक उपायों से उसकी आवाजाही सीमित की और फिर वायुसेना के सी-17 विमान से मरीन कमांडो को तैनात किया। कमांडो ने सटीक कार्रवाई करते हुए लुटेरों को निष्क्रिय किया और जहाज पर नियंत्रण स्थापित किया।
जहाज 'अजिनी' का अपहरण कब और कहाँ हुआ था?
'अजिनी' को पिछले महीने सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने अगवा किया था। बचाव अभियान 2 नवंबर 2026 को मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर अरब सागर में पूरा हुआ।
इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना की क्या भूमिका थी?
भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान ने हवाई आपूर्ति अभियान के तहत नौसेना के मरीन कमांडो को सटीक रूप से अभियान स्थल तक पहुँचाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अंतर-सेवा समन्वय की विशेष सराहना की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभियान पर क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह सफलता भारतीय नौसेना की उच्च परिचालन क्षमता और समुद्री खतरों का निर्णायक जवाब देने की तैयारी को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के बहादुर जवानों ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और लोगों की जान बचाने के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध है।
यह ऑपरेशन हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह ऑपरेशन भारत की हिंद महासागर में 'प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश' की भूमिका को पुख्ता करता है। इसने यह भी रोका कि लुटेरे 'अजिनी' को 'मदर शिप' के रूप में इस्तेमाल करते हुए अन्य व्यावसायिक जहाजों पर हमले करें, जिससे एक बड़े समुद्री खतरे की संभावना टल गई।
राष्ट्र प्रेस
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