3 नवंबर 2026
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अमेरिकी मिडटर्म से पहले भारतीय मूल के उम्मीदवारों की अंतिम अपील: रिपब्लिकन का फोकस अपराध-महंगाई, डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को घेरा

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अमेरिकी मिडटर्म से पहले भारतीय मूल के उम्मीदवारों की अंतिम अपील: रिपब्लिकन का फोकस अपराध-महंगाई, डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को घेरा

सारांश

अमेरिकी मिडटर्म से एक दिन पहले भारतीय मूल के उम्मीदवार दो धाराओं में बँट गए — रिपब्लिकन रामास्वामी और कोमाटिरेड्डी ने अपराध व महंगाई को हथियार बनाया, तो डेमोक्रेट सुब्रमण्यम, खन्ना, सेठी और दांडिया ने ट्रंप नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। एक ही समुदाय, दो बिल्कुल अलग राजनीतिक चेहरे।

मुख्य बातें

विवेक रामास्वामी ने ओहियो में गवर्नर पद के लिए संपत्ति कर कटौती, कानून-व्यवस्था और बिजली बिल घटाने का वादा किया।
सरिता कोमाटिरेड्डी ने न्यूयॉर्क में अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स को अपराध और बेघर समस्या पर चुनौती दी।
वर्जीनिया के सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन के विरुद्ध जनता के लिए कांग्रेस चुनने का आह्वान किया।
कैलिफोर्निया के सांसद रो खन्ना ने ईरान युद्ध बजट को शून्य करने की वकालत की; ट्रंप ने उन्हें चार बार 'हल्का नेता' बताया।
टेक्सास से पूजा सेठी और फ्लोरिडा से पिया दांडिया ने क्रमशः नफरत-विरोध और बच्चों के भविष्य को मुद्दा बनाया।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से ठीक एक दिन पहले 3 नवंबर 2026 को भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने अपनी अंतिम चुनावी अपील पेश की। रिपब्लिकन खेमे ने अपराध, महंगाई और कानून-व्यवस्था को केंद्र में रखा, जबकि डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को मुख्य मुद्दा बनाया। दोनों दलों में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की यह बँटी हुई रणनीति अमेरिका के व्यापक राजनीतिक ध्रुवीकरण की साफ तस्वीर पेश करती है।

रिपब्लिकन उम्मीदवारों की रणनीति

ओहियो में रिपब्लिकन की ओर से गवर्नर पद के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने क्लीवलैंड में अपने राज्यव्यापी प्रचार अभियान का समापन किया। उन्होंने 'संपत्ति कर में तत्काल कटौती, सड़कों पर कानून का शासन बहाल करने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर बिजली के बिल कम करने' का वादा किया।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर रामास्वामी ने लिखा, 'यह दाएं और बाएं की लड़ाई नहीं है। यह सही और गलत के बीच का चुनाव है। यह सामान्य समझ और पागलपन के बीच का फैसला है।' टोलेडो में प्रचार के बाद उन्होंने यह भी कहा कि गवर्नर बनने पर ओहियो के लोगों के हित उनकी एकमात्र जिम्मेदारी होगी।

न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी ने अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स को चुनौती दी है। उन्होंने अंतिम प्रचार दौर में बफेलो, रोचेस्टर, सिरैक्यूज और बिंघमटन का दौरा कर लॉन्ग आइलैंड में अभियान समाप्त किया। कोमाटिरेड्डी ने अपराध, बेघर लोगों की समस्या और धोखाधड़ी के मामलों को लेकर मौजूदा अटॉर्नी जनरल को घेरा।

एक्स पर उन्होंने लिखा, 'लेटिटिया जेम्स के कार्यकाल में ये समस्याएं बढ़ी हैं और वह इनमें बदलाव नहीं करना चाहतीं।' भारतीय प्रवासियों की बेटी कोमाटिरेड्डी ने अपने अभियान में अमेरिकी सपने और आप्रवासी परिवारों के संघर्ष को भी जगह दी। उनकी टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'लोग इस देश में इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि मेहनत करके वे अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन बना सकते हैं।'

डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का ट्रंप-केंद्रित संदेश

वर्जीनिया से कांग्रेस सदस्य सुहास सुब्रमण्यम ने एक्स पर लिखा, 'कल हम ऐसी कांग्रेस चुनेंगे जो राष्ट्रपति के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए काम करेगी।' उनका यह संदेश सीधे ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर निशाना था।

कैलिफोर्निया के कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने प्रचार के अंतिम सप्ताहांत में ईरान के साथ जारी युद्ध का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स ईरान में युद्ध के लिए निर्धारित बजट को शून्य करने के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। खन्ना ने यह भी उल्लेख किया कि ट्रंप उन्हें चार बार 'हल्का नेता' कह चुके हैं।

नफरत और बच्चों के भविष्य पर जोर

टेक्सास के स्टेट हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पूजा सेठी ने भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नफरत के मुद्दे को अपने अंतिम संदेश का हिस्सा बनाया। उन्होंने लिखा, 'हम डराए नहीं जाएंगे, हम चुप नहीं रहेंगे। टेक्सास में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।'

फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने बच्चों के भविष्य को अपना चुनावी मुद्दा बनाया। उनके चुनाव क्षेत्र में बाहरी संगठनों की ओर से बड़े पैमाने पर चुनावी खर्च किया गया है। मतदान से एक दिन पहले उन्होंने लिखा कि बच्चों के योग्य भविष्य के लिए संघर्ष करने का अब केवल एक दिन बचा है।

भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों का व्यापक संदर्भ

भारतीय मूल के उम्मीदवारों की यह बँटी रणनीति अमेरिकी राजनीति में उनकी बढ़ती उपस्थिति और विविधता को दर्शाती है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय दोनों प्रमुख दलों में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। गौरतलब है कि ये उम्मीदवार एक ही समुदाय से आते हुए भी बिल्कुल अलग-अलग राजनीतिक एजेंडे के साथ मतदाताओं के सामने हैं।

चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि इनमें से कितने उम्मीदवार अपनी-अपनी रणनीति को मतों में बदलने में सफल रहे और अमेरिकी संसद में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व किस दिशा में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आत्म-विरोधाभास नहीं। दूसरी ओर, डेमोक्रेट खन्ना का ईरान-युद्ध बजट का मुद्दा उनके दल के भीतर भी असहज बहस छेड़ता है। मुख्यधारा मीडिया इस विभाजन को 'भारतीय समुदाय की पहचान' की बहस में समेटता है, जबकि असल खबर यह है कि ये उम्मीदवार अपनी जातीय पृष्ठभूमि से परे, स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं — और यही उनकी राजनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी मिडटर्म 2026 में भारतीय मूल के कौन-कौन से प्रमुख उम्मीदवार हैं?
प्रमुख उम्मीदवारों में ओहियो से रिपब्लिकन गवर्नर उम्मीदवार विवेक रामास्वामी, न्यूयॉर्क से रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी, वर्जीनिया से डेमोक्रेटिक सांसद सुहास सुब्रमण्यम, कैलिफोर्निया से सांसद रो खन्ना, टेक्सास से पूजा सेठी और फ्लोरिडा से पिया दांडिया शामिल हैं। ये उम्मीदवार दोनों प्रमुख दलों में फैले हैं और अलग-अलग राज्यों में चुनाव लड़ रहे हैं।
विवेक रामास्वामी ने ओहियो में किन मुद्दों पर प्रचार किया?
रामास्वामी ने संपत्ति कर में तत्काल कटौती, सड़कों पर कानून-व्यवस्था बहाल करने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर बिजली बिल कम करने का वादा किया। उन्होंने क्लीवलैंड और टोलेडो में प्रचार कर एक्स पर लिखा कि यह 'सामान्य समझ और पागलपन के बीच का फैसला है।'
डेमोक्रेटिक भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने किन मुद्दों को चुनावी एजेंडा बनाया?
डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों को केंद्र में रखा। रो खन्ना ने ईरान युद्ध बजट खत्म करने की वकालत की, सुहास सुब्रमण्यम ने जनता के लिए काम करने वाली कांग्रेस चुनने का आह्वान किया, पूजा सेठी ने नफरत के विरुद्ध आवाज उठाई और पिया दांडिया ने बच्चों के भविष्य को मुद्दा बनाया।
सरिता कोमाटिरेड्डी न्यूयॉर्क में किस पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं?
सरिता कोमाटिरेड्डी न्यूयॉर्क में मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स को रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में चुनौती दे रही हैं। उन्होंने अपराध, बेघर लोगों की समस्या और धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी के लिए जेम्स को जिम्मेदार ठहराया है।
भारतीय मूल के उम्मीदवारों का दोनों दलों में होना क्या दर्शाता है?
यह स्थिति दर्शाती है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय अब किसी एक दल तक सीमित नहीं है और अमेरिकी राजनीति की मुख्यधारा में उसकी विविध भागीदारी है। उम्मीदवार अपनी जातीय पहचान से आगे बढ़कर स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी-अपनी पार्टी की विचारधारा के अनुरूप प्रचार कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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