अमेरिकी मिडटर्म से पहले भारतीय मूल के उम्मीदवारों की अंतिम अपील: रिपब्लिकन का फोकस अपराध-महंगाई, डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से ठीक एक दिन पहले 3 नवंबर 2026 को भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने अपनी अंतिम चुनावी अपील पेश की। रिपब्लिकन खेमे ने अपराध, महंगाई और कानून-व्यवस्था को केंद्र में रखा, जबकि डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को मुख्य मुद्दा बनाया। दोनों दलों में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की यह बँटी हुई रणनीति अमेरिका के व्यापक राजनीतिक ध्रुवीकरण की साफ तस्वीर पेश करती है।
रिपब्लिकन उम्मीदवारों की रणनीति
ओहियो में रिपब्लिकन की ओर से गवर्नर पद के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने क्लीवलैंड में अपने राज्यव्यापी प्रचार अभियान का समापन किया। उन्होंने 'संपत्ति कर में तत्काल कटौती, सड़कों पर कानून का शासन बहाल करने और ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर बिजली के बिल कम करने' का वादा किया।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर रामास्वामी ने लिखा, 'यह दाएं और बाएं की लड़ाई नहीं है। यह सही और गलत के बीच का चुनाव है। यह सामान्य समझ और पागलपन के बीच का फैसला है।' टोलेडो में प्रचार के बाद उन्होंने यह भी कहा कि गवर्नर बनने पर ओहियो के लोगों के हित उनकी एकमात्र जिम्मेदारी होगी।
न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी ने अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स को चुनौती दी है। उन्होंने अंतिम प्रचार दौर में बफेलो, रोचेस्टर, सिरैक्यूज और बिंघमटन का दौरा कर लॉन्ग आइलैंड में अभियान समाप्त किया। कोमाटिरेड्डी ने अपराध, बेघर लोगों की समस्या और धोखाधड़ी के मामलों को लेकर मौजूदा अटॉर्नी जनरल को घेरा।
एक्स पर उन्होंने लिखा, 'लेटिटिया जेम्स के कार्यकाल में ये समस्याएं बढ़ी हैं और वह इनमें बदलाव नहीं करना चाहतीं।' भारतीय प्रवासियों की बेटी कोमाटिरेड्डी ने अपने अभियान में अमेरिकी सपने और आप्रवासी परिवारों के संघर्ष को भी जगह दी। उनकी टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'लोग इस देश में इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि मेहनत करके वे अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन बना सकते हैं।'
डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का ट्रंप-केंद्रित संदेश
वर्जीनिया से कांग्रेस सदस्य सुहास सुब्रमण्यम ने एक्स पर लिखा, 'कल हम ऐसी कांग्रेस चुनेंगे जो राष्ट्रपति के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए काम करेगी।' उनका यह संदेश सीधे ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर निशाना था।
कैलिफोर्निया के कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने प्रचार के अंतिम सप्ताहांत में ईरान के साथ जारी युद्ध का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स ईरान में युद्ध के लिए निर्धारित बजट को शून्य करने के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। खन्ना ने यह भी उल्लेख किया कि ट्रंप उन्हें चार बार 'हल्का नेता' कह चुके हैं।
नफरत और बच्चों के भविष्य पर जोर
टेक्सास के स्टेट हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पूजा सेठी ने भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नफरत के मुद्दे को अपने अंतिम संदेश का हिस्सा बनाया। उन्होंने लिखा, 'हम डराए नहीं जाएंगे, हम चुप नहीं रहेंगे। टेक्सास में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।'
फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने बच्चों के भविष्य को अपना चुनावी मुद्दा बनाया। उनके चुनाव क्षेत्र में बाहरी संगठनों की ओर से बड़े पैमाने पर चुनावी खर्च किया गया है। मतदान से एक दिन पहले उन्होंने लिखा कि बच्चों के योग्य भविष्य के लिए संघर्ष करने का अब केवल एक दिन बचा है।
भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों का व्यापक संदर्भ
भारतीय मूल के उम्मीदवारों की यह बँटी रणनीति अमेरिकी राजनीति में उनकी बढ़ती उपस्थिति और विविधता को दर्शाती है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय दोनों प्रमुख दलों में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। गौरतलब है कि ये उम्मीदवार एक ही समुदाय से आते हुए भी बिल्कुल अलग-अलग राजनीतिक एजेंडे के साथ मतदाताओं के सामने हैं।
चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि इनमें से कितने उम्मीदवार अपनी-अपनी रणनीति को मतों में बदलने में सफल रहे और अमेरिकी संसद में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व किस दिशा में जाता है।