यमन-सोमालिया तट पर समुद्री लुटेरों ने दो जहाज अगवा किए, 22 भारतीय नाविक सुरक्षित: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय ने 21 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि यमन और सोमालिया के तट के निकट सशस्त्र समुद्री लुटेरों द्वारा अपहृत दो वाणिज्यिक जहाजों में सवार 22 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार की प्रेस वार्ता में बताया कि सरकार संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, 'दो जहाज हैं; दोनों पर विदेशी झंडे लगे हैं और उन पर भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें कुल 22 — एक जहाज पर 16 और दूसरे पर छह — भारतीय हैं। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, ये 22 नाविक सुरक्षित हैं और हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।'
पहला जहाज: एमटी सिबू 1, अदन की खाड़ी
20 अगस्त को इरिट्रिया के ध्वज वाले तेल उत्पाद टैंकर 'एमटी सिबू 1' (जिसे 'सीमल' के नाम से भी जाना जाता है) पर अदन की खाड़ी में यमन के तट से करीब 30 समुद्री मील दूर हमला हुआ। कथित तौर पर इस जहाज पर 16 भारतीय नाविक सवार थे।
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) सेंटर के अनुसार, जहाज ने पश्चिम की ओर जाते समय एक अनधिकृत पोत के नज़दीक आने पर डिस्ट्रेस कॉल भेजी थी। UKMTO ने बताया कि छह हथियारबंद लुटेरों ने टैंकर पर कब्जा करने के बाद उसे सोमालिया की ओर मोड़ दिया।
दूसरा जहाज: एम/वी लुतुफ, पुंटलैंड तट
17 अगस्त को कैमरून के ध्वज वाले पोत 'एम/वी लुतुफ' को सोमालिया के पुंटलैंड तट के निकट अगवा किया गया। इस पोत के 10 सदस्यीय चालक दल में छह भारतीय शामिल हैं। कथित तौर पर पोलर मूवमेंट शिपिंग के इस पोत पर मोगादिशू स्थित तुर्की के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार, संचार और सैटेलाइट उपकरण ले जाए जा रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार, आठ समुद्री लुटेरों ने पोत को पुंटलैंड के डंगोरोयो जिले में गारमाल के पास तट की ओर ले जाया। माना जा रहा है कि ये लुटेरे उसी गिरोह से जुड़े हैं जिसने अप्रैल में एम/वी स्वार्ड के अपहरण में भाग लिया था।
सरकार की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार नाविकों की सुरक्षित वापसी के लिए सभी संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती की घटनाएँ एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आगे क्या होगा
दोनों जहाजों की स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पहले भी कई बार भारतीय नाविकों को समुद्री लुटेरों के हमलों का सामना करना पड़ा है, और नौसेना तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियाँ इस मामले में सक्रिय हैं। स्थिति में कोई भी नया घटनाक्रम सामने आने पर विदेश मंत्रालय द्वारा अद्यतन जानकारी दिए जाने की संभावना है।