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यमन में 22 भारतीय नाविक सोमाली डाकुओं के कब्जे में, 20 अगस्त से परिवारों से संपर्क टूटा

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यमन में 22 भारतीय नाविक सोमाली डाकुओं के कब्जे में, 20 अगस्त से परिवारों से संपर्क टूटा

सारांश

यमन के समुद्र में दो जहाजों के अपहरण के बाद 22 भारतीय नाविक सोमाली डाकुओं की कैद में हैं और 20 अगस्त से परिवारों से संपर्क टूटा है। अप्रैल से कुल 30 से अधिक भारतीय नाविक बंधक हैं। FSUAI सरकार से ठोस बचाव योजना की माँग कर रहा है।

मुख्य बातें

यमन के समुद्री क्षेत्र में दो जहाजों के अपहरण के बाद 22 भारतीय नाविक सोमाली समुद्री डाकुओं की गिरफ्त में हैं।
20 अगस्त की शाम 6 बजे के बाद से बंधक नाविकों का अपने परिवारों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
FSUAI महासचिव मनोज यादव के अनुसार, अप्रैल से अब तक 30 से अधिक भारतीय नाविक सोमाली डाकुओं की कैद में हैं।
विदेश मंत्रालय और सीरिया स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय सरकार के साथ समन्वय कर रहे हैं।
FSUAI ने ईरान और अमेरिकी नौसेना पर भरोसे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

यमन के समुद्री क्षेत्र में दो जहाजों के अपहरण के बाद 22 भारतीय नाविक सोमाली समुद्री डाकुओं की गिरफ्त में हैं। फेडरेशन ऑफ सीफेयरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया (FSUAI) के महासचिव मनोज यादव के अनुसार, 20 अगस्त की शाम करीब 6 बजे से इन नाविकों का अपने परिवारों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे उनके परिजनों में गहरी दहशत फैल गई है। FSUAI ने पुष्टि की है कि संगठन अब भारत सरकार के बचाव प्रस्ताव का इंतजार कर रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

FSUAI महासचिव मनोज यादव ने बताया कि यमन के समुद्र में दो जहाज हाईजैक हुए, जिन पर सवार सभी 22 क्रू मेंबर भारतीय नागरिक हैं। परिवारों ने संगठन को बताया कि 20 अगस्त की शाम के बाद से उनके नाविक रिश्तेदार मोबाइल फोन पर संपर्क में नहीं आ रहे। इससे पहले, क्रू मेंबर नियमित रूप से परिवारों से बात कर रहे थे। मीडिया में खबरें आने के बाद परिजन और भी भयभीत हो गए तथा FSUAI से इस मुद्दे को सही अधिकारियों के सामने उठाने की अपील की।

अप्रैल से बंधक हैं 30 से अधिक भारतीय नाविक

मनोज यादव ने यह भी खुलासा किया कि यह घटना अकेली नहीं है। उनके अनुसार, अप्रैल से सोमाली समुद्री डाकुओं ने कई जहाजों को हाईजैक कर रखा है, जिनमें भारतीय क्रू मेंबर सवार थे। इस समय 30 से अधिक भारतीय नाविक इन डाकुओं की कैद में हैं। यादव ने स्पष्ट किया कि यह कोई नई प्रवृत्ति नहीं है — पिछले अनुभवों के आधार पर समुद्री डाकू फिरौती की माँग करते हैं, परंतु मौजूदा संकट में प्राथमिकता बंधकों की सुरक्षा है।

सरकार की प्रतिक्रिया और समन्वय

FSUAI ने विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग का हवाला देते हुए बताया कि सरकार इस मामले को फॉलो कर रही है। इसके अलावा, सीरिया स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि वे स्थानीय सरकार के साथ समन्वय कर रहे हैं। यादव ने कहा कि यह सकारात्मक है, लेकिन अब यह स्पष्ट होना ज़रूरी है कि आगे की कार्रवाई क्या होगी — क्या सरकार स्थानीय प्रशासन के प्रस्ताव का इंतजार करेगी या अपने पूर्व अनुभवों के आधार पर स्वतंत्र रूप से कदम उठाएगी।

परिवारों की स्थिति और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ

FSUAI महासचिव ने बताया कि बंधक नाविकों के परिवारों ने संगठन को कई ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपी हैं, लेकिन उन्हें सार्वजनिक करना जहाज पर मौजूद नाविकों की सुरक्षा के लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य परिस्थिति नहीं है — नाविकों को बंदूक की नोंक पर रखा गया है और एक कमरे में बंद कर दिया गया है। परिवार स्पष्ट रूप से भय और मानसिक दबाव में हैं।

ईरान और अमेरिकी नौसेना पर सवाल

मनोज यादव ने बताया कि 22 अप्रैल को एक जहाज पर हुए हमले का वीडियो उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया था, जिसमें छोटी नावें एक जहाज को घेरकर एक घंटे से अधिक समय तक लगातार फायरिंग करती दिखीं। उस जहाज पर 21 भारतीय नाविक और 1 वियतनामी नागरिक सवार थे। यादव ने यह भी कहा कि ईरान और अमेरिकी नौसेना पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि दोनों देशों ने ऐसे मौकों पर भारतीय नाविकों की जान जोखिम में डाली, जबकि उन्हें जहाज पर भारतीय क्रू की उपस्थिति की जानकारी थी। यह गंभीर कूटनीतिक और सुरक्षा प्रश्न खड़ा करता है।

FSUAI अब सरकार से ठोस और त्वरित कार्रवाई की माँग कर रहा है, ताकि बंधक नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सार्वजनिक दबाव के बिना मामला सुर्खियों में नहीं आया। FSUAI का यह सवाल कि ईरान और अमेरिकी नौसेना पर कैसे भरोसा किया जाए, वास्तव में हिंद महासागर में भारत की कूटनीतिक स्वायत्तता की सीमाओं को रेखांकित करता है। विदेश मंत्रालय की 'फॉलो कर रहे हैं' वाली भाषा आश्वस्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है जब नाविक बंदूक की नोंक पर बंद कमरों में हों। सरकार को स्पष्ट बचाव रोडमैप सार्वजनिक करना होगा, अन्यथा यह मामला कूटनीतिक निष्क्रियता का प्रतीक बन जाएगा।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यमन में भारतीय नाविकों को किसने बंधक बनाया है?
सोमाली समुद्री डाकुओं ने यमन के समुद्री क्षेत्र में दो जहाजों को हाईजैक कर 22 भारतीय नाविकों को बंधक बना लिया है। FSUAI के अनुसार, अप्रैल से अब तक इन डाकुओं की कैद में 30 से अधिक भारतीय नाविक हैं।
FSUAI क्या है और इस मामले में इसकी भूमिका क्या है?
FSUAI यानी फेडरेशन ऑफ सीफेयरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया भारतीय नाविकों का प्रमुख संगठन है। बंधक नाविकों के परिवारों ने FSUAI से मदद माँगी है और संगठन ने विदेश मंत्रालय तथा संबंधित अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया है।
20 अगस्त के बाद से परिवारों से संपर्क क्यों टूटा?
FSUAI महासचिव मनोज यादव के अनुसार, 20 अगस्त की शाम करीब 6 बजे के बाद से बंधक नाविकों ने परिवारों से मोबाइल फोन पर बात करना बंद कर दिया। इससे पहले वे नियमित रूप से संपर्क में थे, लेकिन अचानक संपर्क टूटने से परिजनों में दहशत फैल गई।
भारत सरकार इस मामले में क्या कदम उठा रही है?
विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि वह इस मामले को फॉलो कर रहा है। सीरिया स्थित भारतीय दूतावास ने भी जानकारी दी है कि वे स्थानीय सरकार के साथ समन्वय कर रहे हैं। FSUAI अब सरकार से ठोस बचाव प्रस्ताव और स्पष्ट कार्ययोजना की माँग कर रहा है।
क्या ईरान या अमेरिकी नौसेना भारतीय नाविकों को बचाने में मदद कर सकती है?
FSUAI महासचिव मनोज यादव ने इस पर गंभीर संदेह जताया है। उनके अनुसार, दोनों देशों ने अतीत में ऐसे हमलों के दौरान भारतीय नाविकों की जान को जोखिम में डाला, जबकि उन्हें जहाज पर भारतीय क्रू की उपस्थिति की जानकारी थी। इसलिए इन पर भरोसा करना मुश्किल है।
राष्ट्र प्रेस
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