एमटी सेट्टाबेलो हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत, एफएसयूआई बोला — खाड़ी में 18,000 नाविक खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार, 11 जून को व्यापारिक जहाज एमटी सेट्टाबेलो पर हुए कथित मिसाइल हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी 18,000 भारतीय नाविक तैनात हैं और तीन दिनों में तीन जहाजों पर हमले के बाद उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
तीन दिन, तीन हमले — क्या हुआ
यादव के अनुसार, पिछले तीन दिनों में एमटी मैरिवेक्स, एमटी सेट्टाबेलो और एमटी जलवीर — तीनों व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए, और तीनों पर भारतीय नाविकों की उल्लेखनीय संख्या थी। उन्होंने बताया, 'सबसे पहले एमटी मैरिवेक्स पर हमला हुआ। उसके सभी 24 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था।' इसके बाद बुधवार को एमटी सेट्टाबेलो पर हमले की पुष्टि हुई। जहाज पर कुल 28 क्रू सदस्य थे — 24 भारतीय, 2 पाकिस्तानी, 1 रूसी और 1 यूक्रेनी नागरिक।
मृतकों की पहचान
इस हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों की पहचान सामने आई है। पहले हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा, दूसरे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया, और तीसरे आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश हैं। यादव ने बताया कि बुधवार शाम जहाज की संचालक कंपनी ने पहले दो मौतों की पुष्टि की थी और चीफ इंजीनियर को लापता बताया था।
हमले की प्रकृति और संचार बाधा
एफएसयूआई महासचिव के अनुसार, संबंधित पक्षों से मिली जानकारी के अनुसार जहाज पर कथित तौर पर मिसाइल से हमला किया गया, जिससे इंजन रूम को सर्वाधिक क्षति पहुँची। हमले के बाद जहाज की आंतरिक संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई, जिससे बचाव दलों को सटीक जानकारी मिलने में भारी कठिनाई हुई। यादव ने यह भी बताया कि एमटी सेट्टाबेलो से अमेरिका की ओर से केवल एकतरफा संपर्क साधा गया। उन्होंने सवाल उठाया, 'क्या अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि वो स्पीडबोट या चॉपर से वहाँ पहुँचे और प्रत्यक्ष रूप से निगरानी करते?'
एआईएस बंद — नाविक खुद को छुपा रहे हैं
यादव ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में कई जहाज अपना ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) जानबूझकर बंद कर रहे हैं। उनके शब्दों में, 'एआईएस सिस्टम को कई जहाजों में बंद कर रखा है ताकि उनके जहाज को कोई ट्रेस न करे और अटैक कर दे। ये लोग अपनी सुरक्षा की वजह से अपनी पहचान छुपा रहे हैं जिससे आईआरजीसी या अमेरिका से बचे रहें।' एआईएस के बंद रहने से बाहरी एजेंसियों और परिजनों के लिए नाविकों से संपर्क करना लगभग असंभव हो जाता है। गौरतलब है कि यही तकनीकी कदम — जो सुरक्षा के लिए उठाया जा रहा है — संकट के समय बचाव अभियानों को और जटिल बना देता है।
घटनास्थल को लेकर विरोधाभास
रिपोर्टों के अनुसार, हमले के वक्त जहाज की सटीक स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ पक्षों का कहना है कि जहाज ओमान के तट के पास स्थिर था, जबकि अन्य का दावा है कि वह ईरान की ओर बढ़ रहा था। यादव ने कहा, 'जितना हमें पता है जहाज खड़ा था — अभी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकते।' एफएसयूआई, ओमान स्थित भारतीय दूतावास के लगातार संपर्क में है और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटा रहा है।
आगे का खतरा — 18,000 नाविकों की चिंता
यादव ने आगाह किया कि खाड़ी में अभी भी 18,000 भारतीय नाविक सक्रिय हैं। उनके अनुसार, 'निश्चित तौर पर ये डर पैदा करता है। अब जो हुआ है, हो सकता है अमेरिका को जवाब देने के लिए ईरान की ओर से कोई कार्रवाई हो और फिर बेगुनाह इसका निशाना बनें।' उन्होंने यह भी कहा, 'कमर्शियल वेसल्स पर हमला नहीं किया जाना चाहिए था — इन जहाजों में हथियार नहीं होते।' भारत सरकार इन हमलों की लगातार निंदा करती रही है, लेकिन समुद्री क्षेत्र में बढ़ता तनाव भारतीय नाविकों के लिए एक गंभीर और तत्काल खतरा बना हुआ है।