27 जुलाई 2026
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एमटी सेट्टाबेलो हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत, एफएसयूआई बोला — खाड़ी में 18,000 नाविक खतरे में

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एमटी सेट्टाबेलो हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत, एफएसयूआई बोला — खाड़ी में 18,000 नाविक खतरे में

सारांश

तीन दिन में तीन जहाज, तीन भारतीय नाविकों की जान — और खाड़ी में अभी भी 18,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं। एफएसयूआई महासचिव मनोज यादव का कहना है कि नाविक खुद को बचाने के लिए एआईएस बंद कर रहे हैं, लेकिन यही कदम संकट में उन्हें और अदृश्य बना देता है।

मुख्य बातें

एमटी सेट्टाबेलो पर 11 जून को हुए कथित मिसाइल हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत हुई — आदित्य शर्मा (हिमाचल प्रदेश), शिवानंद चौरसिया (देवरिया, उत्तर प्रदेश) और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश (आंध्र प्रदेश)।
जहाज पर 28 क्रू सदस्य थे — 24 भारतीय , 2 पाकिस्तानी , 1 रूसी , 1 यूक्रेनी ।
तीन दिनों में तीन जहाजों — एमटी मैरिवेक्स, एमटी सेट्टाबेलो, एमटी जलवीर — पर हमले हुए।
नाविक हमले के डर से एआईएस (ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) बंद कर रहे हैं, जिससे संपर्क और बचाव दोनों मुश्किल हो रहे हैं।
खाड़ी क्षेत्र में अभी भी 18,000 भारतीय नाविक तैनात हैं — एफएसयूआई ने उनकी सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई।
एफएसयूआई , ओमान स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में है और स्थानीय एजेंसियों से जानकारी जुटा रहा है।

मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार, 11 जून को व्यापारिक जहाज एमटी सेट्टाबेलो पर हुए कथित मिसाइल हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी 18,000 भारतीय नाविक तैनात हैं और तीन दिनों में तीन जहाजों पर हमले के बाद उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।

तीन दिन, तीन हमले — क्या हुआ

यादव के अनुसार, पिछले तीन दिनों में एमटी मैरिवेक्स, एमटी सेट्टाबेलो और एमटी जलवीर — तीनों व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए, और तीनों पर भारतीय नाविकों की उल्लेखनीय संख्या थी। उन्होंने बताया, 'सबसे पहले एमटी मैरिवेक्स पर हमला हुआ। उसके सभी 24 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था।' इसके बाद बुधवार को एमटी सेट्टाबेलो पर हमले की पुष्टि हुई। जहाज पर कुल 28 क्रू सदस्य थे — 24 भारतीय, 2 पाकिस्तानी, 1 रूसी और 1 यूक्रेनी नागरिक।

मृतकों की पहचान

इस हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों की पहचान सामने आई है। पहले हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा, दूसरे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया, और तीसरे आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश हैं। यादव ने बताया कि बुधवार शाम जहाज की संचालक कंपनी ने पहले दो मौतों की पुष्टि की थी और चीफ इंजीनियर को लापता बताया था।

हमले की प्रकृति और संचार बाधा

एफएसयूआई महासचिव के अनुसार, संबंधित पक्षों से मिली जानकारी के अनुसार जहाज पर कथित तौर पर मिसाइल से हमला किया गया, जिससे इंजन रूम को सर्वाधिक क्षति पहुँची। हमले के बाद जहाज की आंतरिक संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई, जिससे बचाव दलों को सटीक जानकारी मिलने में भारी कठिनाई हुई। यादव ने यह भी बताया कि एमटी सेट्टाबेलो से अमेरिका की ओर से केवल एकतरफा संपर्क साधा गया। उन्होंने सवाल उठाया, 'क्या अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि वो स्पीडबोट या चॉपर से वहाँ पहुँचे और प्रत्यक्ष रूप से निगरानी करते?'

एआईएस बंद — नाविक खुद को छुपा रहे हैं

यादव ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में कई जहाज अपना ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) जानबूझकर बंद कर रहे हैं। उनके शब्दों में, 'एआईएस सिस्टम को कई जहाजों में बंद कर रखा है ताकि उनके जहाज को कोई ट्रेस न करे और अटैक कर दे। ये लोग अपनी सुरक्षा की वजह से अपनी पहचान छुपा रहे हैं जिससे आईआरजीसी या अमेरिका से बचे रहें।' एआईएस के बंद रहने से बाहरी एजेंसियों और परिजनों के लिए नाविकों से संपर्क करना लगभग असंभव हो जाता है। गौरतलब है कि यही तकनीकी कदम — जो सुरक्षा के लिए उठाया जा रहा है — संकट के समय बचाव अभियानों को और जटिल बना देता है।

घटनास्थल को लेकर विरोधाभास

रिपोर्टों के अनुसार, हमले के वक्त जहाज की सटीक स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ पक्षों का कहना है कि जहाज ओमान के तट के पास स्थिर था, जबकि अन्य का दावा है कि वह ईरान की ओर बढ़ रहा था। यादव ने कहा, 'जितना हमें पता है जहाज खड़ा था — अभी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकते।' एफएसयूआई, ओमान स्थित भारतीय दूतावास के लगातार संपर्क में है और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटा रहा है।

आगे का खतरा — 18,000 नाविकों की चिंता

यादव ने आगाह किया कि खाड़ी में अभी भी 18,000 भारतीय नाविक सक्रिय हैं। उनके अनुसार, 'निश्चित तौर पर ये डर पैदा करता है। अब जो हुआ है, हो सकता है अमेरिका को जवाब देने के लिए ईरान की ओर से कोई कार्रवाई हो और फिर बेगुनाह इसका निशाना बनें।' उन्होंने यह भी कहा, 'कमर्शियल वेसल्स पर हमला नहीं किया जाना चाहिए था — इन जहाजों में हथियार नहीं होते।' भारत सरकार इन हमलों की लगातार निंदा करती रही है, लेकिन समुद्री क्षेत्र में बढ़ता तनाव भारतीय नाविकों के लिए एक गंभीर और तत्काल खतरा बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस खामोश संकट की तस्वीर है जिसे भारत की विदेश नीति अब तक पर्याप्त तत्परता से नहीं संबोधित कर पाई है। एआईएस बंद रखने का विरोधाभास गहरा है: नाविक खुद को बचाने के लिए अदृश्य हो रहे हैं, लेकिन यही अदृश्यता संकट में उनके बचाव को असंभव बना देती है। 18,000 भारतीय नाविकों की उपस्थिति और कमर्शियल जहाजों पर बढ़ते हमलों के बावजूद, अमेरिका की 'एकतरफा संपर्क' की सीमा पर उठाए गए सवाल यह दर्शाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी का ढाँचा कितना खोखला साबित हो रहा है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमटी सेट्टाबेलो पर हमले में कौन से भारतीय नाविक मारे गए?
हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई — हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा, उत्तर प्रदेश के देवरिया से इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया, और आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश। बुधवार शाम कंपनी ने पहले दो मौतों की पुष्टि की थी और चीफ इंजीनियर को लापता बताया था।
एआईएस सिस्टम बंद करने से नाविकों को क्या खतरा है?
एफएसयूआई महासचिव मनोज यादव के अनुसार, नाविक हमले से बचने के लिए जहाज का ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) बंद कर देते हैं ताकि कोई उन्हें ट्रेस न कर सके। लेकिन इसी वजह से संकट की स्थिति में बाहरी बचाव दल और परिजन उनसे संपर्क नहीं कर पाते, जिससे राहत अभियान जटिल हो जाता है।
तीन दिनों में कितने जहाजों पर हमले हुए और क्या भारतीय नाविक सुरक्षित हैं?
तीन दिनों में एमटी मैरिवेक्स, एमटी सेट्टाबेलो और एमटी जलवीर — तीन जहाजों पर हमले हुए। एमटी मैरिवेक्स के सभी 24 नाविकों को सुरक्षित बचाया गया, जबकि एमटी सेट्टाबेलो में 3 भारतीयों की मौत हुई। एमटी जलवीर पर हमले की खबर गुरुवार को आई, उसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
खाड़ी क्षेत्र में अभी कितने भारतीय नाविक हैं और उनकी स्थिति क्या है?
एफएसयूआई के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में अभी भी 18,000 भारतीय नाविक तैनात हैं। मनोज यादव ने कहा कि तीन दिनों में हुई घटनाओं के बाद उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और आगे और हमलों की आशंका बनी हुई है।
हमले के वक्त एमटी सेट्टाबेलो कहाँ था और घटना की परिस्थितियाँ क्या हैं?
घटनास्थल को लेकर अलग-अलग दावे हैं — कुछ पक्षों का कहना है जहाज ओमान के तट के पास स्थिर था, जबकि अन्य का दावा है वह ईरान की ओर बढ़ रहा था। मनोज यादव ने कहा कि जहाज खड़ा था, लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कथित तौर पर मिसाइल से हमला हुआ जिससे इंजन रूम को सर्वाधिक नुकसान पहुँचा।
राष्ट्र प्रेस
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