एमटी सेट्टेबेलो हमला: तीन भारतीय नाविकों की मौत, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को बताया 'समुद्री डकैती'
सारांश
मुख्य बातें
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी बलों द्वारा पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर की गई कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 12 जून 2026 को इसकी आधिकारिक पुष्टि की, जबकि ईरान ने इस घटना को 'सशस्त्र डकैती और राज्य-स्तरीय समुद्री लूट' करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका को जवाबदेह ठहराने की माँग की है।
क्या हुआ एमटी सेट्टेबेलो के साथ
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, पलाऊ के झंडे वाले टैंकर एमटी सेट्टेबेलो को तब निशाना बनाया गया जब उसके चालक दल ने ओमान की खाड़ी से गुजरते समय अमेरिकी बलों के निर्देशों को बार-बार नजरअंदाज किया। टैंकर पर कथित तौर पर ईरानी तेल लादा हुआ था।
जहाज पर सवार 24 नाविकों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन को शुरू में लापता बताया गया था। बाद में उनके शव मिलने और पहचान होने के बाद मौत की पुष्टि की गई।
केंद्रीय मंत्री सोनोवाल की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, 'पलाऊ के झंडे वाले एमटी सेट्टेबेलो पर हुई दुखद घटना के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। दुख की बात है कि शुरू में लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों के शव मिलने और उनकी पहचान होने के बाद अब उनकी मौत की पुष्टि हुई है।'
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचाए गए भारतीय नाविकों को जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए और मृत नाविकों के पार्थिव शरीर भी शीघ्र उनके परिवारों तक पहुँचाए जाएँ।
ईरान का तीखा बयान
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'अमेरिका की ओर से भारतीय वाणिज्यिक जहाजों पर किए गए क्रूर हमले, जिनमें तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, इस बात का साफ सबूत हैं कि अमेरिका की मौजूदा नीति सशस्त्र डकैती और राज्य-स्तरीय समुद्री लूट जैसी है।'
बाघेई ने मारे गए भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया कि वह अमेरिका को उसके 'कानून-विरोधी व्यवहार' के लिए जवाबदेह ठहराए, जो 'वैश्विक शांति, सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता को खतरे में डाल रहा है।'
भारत का कड़ा विरोध
भारत के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जैसन मीक्स को तलब कर इस घटना पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के बीच समुद्री सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा बनती जा रही है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह घटना हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में हुई है, जहाँ ईरानी तेल की आवाजाही पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं। भारत सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह राजनयिक चैनलों के ज़रिए मृत नाविकों के परिजनों को मुआवज़ा दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दबाव बनाएगी।