ओमान की खाड़ी में MT जलवीर पर अमेरिकी मिसाइल हमला, भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने स्वीकार किया है कि उसने ओमान की खाड़ी में गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी जलवीर को निशाना बनाया। अमेरिकी दावे के अनुसार, जहाज ईरानी नाकाबंदी का उल्लंघन कर ईरानी तेल का परिवहन कर रहा था और चालक दल ने अमेरिकी बलों के निर्देशों का बार-बार पालन करने से इनकार किया। यह इस सप्ताह अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का शिकार बनने वाला तीसरा वाणिज्यिक जहाज है।
हमले का विवरण
सेंटकॉम के बयान के अनुसार, जब एमटी जलवीर के चालक दल ने बार-बार दिए गए निर्देशों की अनदेखी की, तो एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाते हुए दो हेलफायर मिसाइलें दागीं, जिससे जहाज निष्क्रिय हो गया। इससे पहले सोमवार को पालाउ-ध्वज वाले एमटी मैरीवेक्स और मंगलवार को एमटी सेट्टेबेलो को भी इसी प्रकार निशाना बनाया गया था। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि मैरीवेक्स ईरानी बंदरगाह की ओर जा रहा था, जबकि सेट्टेबेलो ईरानी तेल ले जा रहा था।
भारतीय नाविकों की मौत और भारत का विरोध
10 जून को एमटी सेट्टेबेलो पर हुए अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई। इसके बाद एमटी जलवीर पर हुए हमले में भी भारतीय नाविक सवार थे। इन घटनाओं के बाद भारत ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप-प्रमुख को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया और गहरी आपत्ति जताई। एमटी मैरीवेक्स पर हुए हमले के बाद 24 नाविकों को बचाया गया था।
नाकाबंदी का व्यापक दायरा
अमेरिकी सेना के अनुसार, 13 अप्रैल को नाकाबंदी शुरू होने के बाद से अब तक निर्देशों का पालन न करने वाले कुल नौ जहाजों को निष्क्रिय किया जा चुका है। इसके अलावा 135 जहाजों को मार्ग बदलने पर मजबूर किया गया, जबकि मानवीय सहायता से जुड़े 42 जहाजों को बिना रोकटोक गुजरने की अनुमति दी गई। यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ लागू नाकाबंदी को लागू करने के अमेरिकी प्रयासों का हिस्सा बताई जा रही है।
आगे की स्थिति
भारत-अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर कूटनीतिक तनाव बढ़ने के संकेत हैं, क्योंकि भारतीय नाविकों की जान जाने का मामला अब द्विपक्षीय संबंधों पर असर डाल सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब ओमान की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएँ पहले से ही बढ़ी हुई हैं और ईरान पर अमेरिकी दबाव की नीति नए मोड़ पर है।