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शारदीय नवरात्र 2026: दुर्गा सप्तशती पाठ के संपूर्ण नियम, विधि और ज़रूरी सावधानियाँ

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शारदीय नवरात्र 2026: दुर्गा सप्तशती पाठ के संपूर्ण नियम, विधि और ज़रूरी सावधानियाँ

सारांश

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहा है। इन 9 पावन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ सबसे प्रमुख अनुष्ठान है — 700 श्लोकों वाले इस ग्रंथ की पूर्ण विधि, त्र्यंगम-नवांगम पद्धति और ज़रूरी सावधानियाँ जानें।

मुख्य बातें

शारदीय नवरात्र 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है; पर्व 9 दिनों तक चलेगा।
दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं; यह मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है जिसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की बताई जाती है।
पाठ की दो प्रमुख विधियाँ हैं — त्र्यंगम और नवांगम ; इन्हें एक, तीन या सात बैठकों में पूरा किया जा सकता है।
पाठ सदैव दुर्गा कवच से आरंभ करें; माता की प्रतिमा के सामने दीया जलाएं और समापन पर आरती व क्षमा-याचना करें।
पाठ के दिनों में मांसाहार, मदिरा, लहसुन-प्याज का सेवन और मन में नकारात्मक भाव रखना वर्जित माना जाता है।

शारदीय नवरात्र 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है और इस पावन पर्व पर दुर्गा सप्तशती का पाठ सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों में से एक माना जाता है। 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रतिदिन इस पाठ के श्रवण या वाचन से साहस, आध्यात्मिक सुरक्षा और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

दुर्गा सप्तशती क्या है और इसका महत्व

दुर्गा सप्तशती को 'देवी माहात्म्य' और 'चंडी पाठ' के नाम से भी जाना जाता है। यह मार्कंडेय पुराण का अभिन्न अंग है, जिसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की बताई जाती है। इस ग्रंथ में कुल 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं। 'सप्त' अर्थात 'सात' और 'शत' अर्थात 'सौ' — इसी संयोग से इसे 'सप्तशती' कहा गया है। ग्रंथ में महिषासुर सहित अनेक असुरों पर मां दुर्गा की विजय का विस्तृत वर्णन मिलता है।

धार्मिक परंपरा में इस पाठ को नवरात्र के एक, तीन या सात बैठकों में पूरा करने का विधान है। पाठ के लिए त्र्यंगम और नवांगम — ये दो प्रमुख पारंपरिक विधियाँ प्रचलित हैं। गौरतलब है कि यह पाठ केवल नवरात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी शुभ अवसर पर इसका विधिवत पाठ किया जा सकता है।

पाठ विधि — कैसे करें सही आरंभ

मान्यताओं के अनुसार, पाठ से पूर्व स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र धारण करना अनिवार्य है। पूर्व दिशा में लाल वस्त्र बिछाकर उस पर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। पूजा स्थल को शुद्ध कर कुमकुम, चावल और पुष्प से देवी की स्तुति करें। माथे पर रोली लगाएं और तत्वों की शुद्धि के लिए चार बार आचमन करें।

पाठ का आरंभ सदैव दुर्गा कवच से करें — धार्मिक मान्यता है कि दुर्गा कवच के पाठ के बिना सप्तशती का पाठ आरंभ नहीं करना चाहिए। देवी की प्रतिमा के सामने दीया अवश्य प्रज्वलित करें।

पाठ की समाप्ति और प्रसाद विधि

नियमित पाठ पूरा होने के पश्चात आरती करना आवश्यक है और माता दुर्गा से क्षमा-याचना करनी चाहिए। आरती के उपरांत भोग या प्रसाद अर्पित करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार माता दुर्गा को बताशे का भोग अत्यंत शुभ माना जाता है। आरती के बाद प्रसाद का वितरण करें और घर की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

ज़रूरी सावधानियाँ और नियम

दुर्गा सप्तशती की पुस्तक को लाल कपड़े से ढकी चौकी पर ही रखें। पाठ के दिनों में मांसाहारी भोजन, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित माना जाता है। पाठ के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य तथा शारीरिक और मानसिक पवित्रता का पालन आवश्यक है।

पाठ के समय मन में किसी के प्रति नकारात्मक या कटु भाव नहीं रखने चाहिए। माना जाता है कि श्रद्धा और समर्पण के साथ किया गया यह पाठ भक्त के जीवन में आंतरिक शक्ति, मानसिक शांति और सुरक्षा का भाव उत्पन्न करता है।

आम जनता पर असर और आगे का पर्व-क्रम

इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ होकर 9 दिनों तक चलेगा। देशभर के घरों और मंदिरों में देवी आराधना के साथ दुर्गा सप्तशती के पाठ का आयोजन होगा। धार्मिक परंपराओं में आस्था रखने वाले श्रद्धालु इन नियमों का पालन कर इस पर्व को और अधिक फलदायक बना सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की सदियों पुरानी मौखिक और लिखित परंपरा का जीवित दस्तावेज़ है — जिसमें स्त्री-शक्ति की केंद्रीयता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब आधुनिक जीवनशैली में त्योहारों की रस्मी प्रासंगिकता तो बढ़ रही है, लेकिन विधि-विधान की गहरी समझ घटती जा रही है। पाठ के नियमों का सार्वजनिक प्रसार इस परंपरा की पुनः जड़ों की ओर वापसी है — जो केवल धर्म नहीं, सामूहिक सांस्कृतिक स्मृति को भी सजीव रखती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती क्या है और इसे नवरात्र में क्यों पढ़ा जाता है?
दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण का एक भाग है जिसमें 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं और यह महर्षि वेदव्यास की रचना बताई जाती है। इसे नवरात्र में इसलिए पढ़ा जाता है क्योंकि इसमें मां दुर्गा की शक्ति और महिषासुर पर उनकी विजय का वर्णन है, जो भक्ति, साहस और आंतरिक शक्ति को प्रेरित करता है।
शारदीय नवरात्र 2026 कब से शुरू हो रही है?
शारदीय नवरात्र 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है। यह पर्व 9 दिनों तक चलेगा, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी।
दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे शुरू करें?
पाठ से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, पूर्व दिशा में लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और दीया जलाएं। पाठ सदैव दुर्गा कवच से आरंभ करना चाहिए — धार्मिक मान्यता है कि कवच पाठ के बिना सप्तशती का पाठ नहीं करना चाहिए।
दुर्गा सप्तशती पाठ की त्र्यंगम और नवांगम विधि में क्या अंतर है?
त्र्यंगम और नवांगम दुर्गा सप्तशती की दो पारंपरिक पाठ पद्धतियाँ हैं जिन्हें भक्त अपनी श्रद्धा, समय और अवसर के अनुसार चुन सकते हैं। दोनों विधियाँ नवरात्र में एक, तीन या सात बैठकों में पूरी की जा सकती हैं।
दुर्गा सप्तशती पाठ के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पाठ के दिनों में मांसाहारी भोजन, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित माना जाता है। इसके साथ ही पूर्ण ब्रह्मचर्य, शारीरिक और मानसिक पवित्रता का पालन तथा किसी के प्रति नकारात्मक भाव न रखना भी आवश्यक बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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