नवरात्रि चतुर्थी पर कालकाजी मंदिर में हजारों भक्त, मां कूष्मांडा के दर्शन को रात 2 बजे से लगी कतारें
सारांश
मुख्य बातें
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन, 14 अक्टूबर 2026 को, नई दिल्ली के ऐतिहासिक कालकाजी मंदिर में मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। मध्यरात्रि से ही आरती और पूजन का क्रम शुरू हो गया था, जिसके बाद रात लगभग ढाई बजे से मंदिर के पट आम भक्तों के लिए खोल दिए गए और सुबह तक लंबी कतारें बनी रहीं।
मध्यरात्रि आरती के बाद खुले मंदिर के पट
कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि नवरात्रि के दौरान मां की आरती मध्यरात्रि में संपन्न कराई जाती है। उन्होंने कहा, 'नवरात्रि पर मध्यरात्रि में मां की आरती और पूजा की जाती है। इसके बाद भक्तों के लिए मंदिर के पट खोल दिए जाते हैं। आज भी करीब दो बजे मां की आरती हुई और ढाई बजे के आसपास दर्शन के लिए पट खोल दिए गए। तब से लगातार भक्त मां के दर्शन कर रहे हैं।' यह परंपरा कालकाजी मंदिर में वर्षों से चली आ रही है, जो इसे दिल्ली के सबसे भव्य नवरात्रि उत्सव स्थलों में से एक बनाती है।
तीन अलग मार्गों से दर्शन की व्यवस्था
भक्तों की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस बार मंदिर प्रशासन ने तीन अलग-अलग दर्शन मार्ग निर्धारित किए हैं। पहला मार्ग मां के पुराने स्थान की दिशा से, दूसरा मार्ग कमल मंदिर की ओर से और तीसरा मार्ग विशेष रूप से वीआईपी पास धारकों के लिए आरक्षित किया गया है।
महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार, दो निकास द्वार भी बनाए गए हैं ताकि भक्तों को बाहर निकलने में असुविधा न हो और भीड़ का दबाव नियंत्रित रहे। गौरतलब है कि कालकाजी मंदिर में नवरात्रि के दौरान दिल्ली-एनसीआर के अतिरिक्त दूरदराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि नवरात्रि के पूरे पर्वकाल में मंदिर परिसर के भीतर एक अस्थायी पुलिस चौकी स्थापित की गई है। इसमें अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी तैनात हैं।
इसके अलावा कई स्वयंसेवी संस्थाओं के वॉलंटियर्स भी भक्तों को सुचारू दर्शन कराने में सहयोग कर रहे हैं। यह ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब भारी भीड़ में दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है — इसलिए बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था जरूरी हो जाती है।
मां कूष्मांडा का महत्व
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की उपासना की जाती है, जिन्हें सृष्टि की आदि-स्वरूपा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों को आरोग्य, यश और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस दिन विशेष भोग और अनुष्ठान का विधान है।
आगे के दिनों की तैयारी
मंदिर प्रशासन के अनुसार, नवरात्रि के शेष दिनों में भी इसी प्रकार की व्यवस्थाएँ बनाए रखी जाएंगी। अष्टमी और नवमी के दिन भीड़ के और अधिक बढ़ने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त प्रबंध किए जाने की योजना है। कालकाजी मंदिर की प्रशासनिक टीम भक्तों से अपील कर रही है कि वे वीआईपी पास के बिना आरक्षित मार्ग का उपयोग न करें, ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।