19 अक्टूबर 2026
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महानवमी पर हरिद्वार के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव बोले — नवरात्रि आत्मशुद्धि और राष्ट्रीय एकता का पर्व

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महानवमी पर हरिद्वार के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव बोले — नवरात्रि आत्मशुद्धि और राष्ट्रीय एकता का पर्व

सारांश

महानवमी पर हरिद्वार के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव का संदेश — नवरात्रि सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, नारी सम्मान और राष्ट्रीय एकता का जीवंत उत्सव है। नवदुर्गा की नौ शक्तियाँ हमें साहस, संयम और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देती हैं।

मुख्य बातें

महानवमी पर देशभर में मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना 19 अक्टूबर 2026 को की जा रही है।
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने नवरात्रि को आत्मशुद्धि, आत्मबल और संकल्प शक्ति जागृत करने का अवसर बताया।
धर्माचार्य ने कन्या पूजन को नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान का सर्वोच्च प्रतीक कहा।
नवरात्रि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक मनाया जाने वाला पर्व भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश देता है।
महामंडलेश्वर ने कहा — नारी परिवार व समाज की आधारशिला है, उसके सम्मान की रक्षा प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व।

शारदीय नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन महानवमी पर देशभर में मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना श्रद्धापूर्वक की जा रही है। इस पावन अवसर पर हरिद्वार के著名 धर्माचार्य महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा कि नवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मबल, सकारात्मकता और संकल्प शक्ति को जागृत करने का अद्वितीय अवसर है। 19 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार से दिए गए उनके इस संदेश में नारी सम्मान, सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के तीन केंद्रीय सूत्र उभरकर सामने आए।

नवदुर्गा की नौ शक्तियों का आध्यात्मिक संदेश

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने बताया कि नवदुर्गा की नौ शक्तियाँ मनुष्य को जीवन में साहस, संयम और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उनके अनुसार नवरात्रि के नौ दिन साधना, आराधना और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति पहचानने का संदेश देते हैं।

उन्होंने कहा, 'हिंदू संस्कृति में नवरात्रि के त्योहार का विशेष महत्व है। यह दिव्य नारी शक्ति के नौ रूपों पर केंद्रित है। इन ऊर्जाओं को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने से हम अधिक सशक्त और दृढ़निश्चयी बनते हैं, साथ ही ईश्वर, महिलाओं और माताओं के प्रति हमारी संवेदनशीलता और भक्ति गहरी होती है।'

नारी सम्मान और कन्या पूजन का महत्व

महामंडलेश्वर ने कन्या पूजन को नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और संवेदनशीलता का सर्वोच्च प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में कन्या को देवी स्वरूप मानकर उसकी पूजा करना मातृशक्ति के महत्व को रेखांकित करता है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह त्योहार आत्म-शुद्धि, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक जागृति का समय है। यह नई पीढ़ी को महिलाओं का सम्मान करने का संदेश देता है। साल में दो बार मनाए जाने वाले इन नौ दिनों के उत्सव के माध्यम से महिलाओं का सम्मान करके समाज में एक नई चेतना और शक्ति का संचार होता है।'

महामंडलेश्वर ने यह भी जोड़ा कि नारी परिवार और समाज की आधारशिला है और उसके सम्मान व गरिमा की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

नई पीढ़ी और सनातन संस्कृति का संबंध

धर्माचार्य ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह पर्व नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा भी देता है। गौरतलब है कि ऐसे धार्मिक आयोजन आधुनिक पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माने जाते हैं।

राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता का संगम

महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा कि नवरात्रि का पर्व देश के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश देता है। उनके अनुसार ऐसे पर्व सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर शारदीय नवरात्रि 2026 की धूम है और लाखों श्रद्धालु माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना में लीन हैं। महानवमी के साथ नौ दिनों की इस साधना-यात्रा का समापन होगा और इसके बाद विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मनाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब धार्मिक नेताओं का यह स्वर सनातन परंपरा में निहित समानता के मूल्यों को उजागर करता है। हालाँकि, इस संदेश की असली कसौटी यह होगी कि ये विचार नवरात्रि की नौ रातों तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक व्यवहार में भी परिलक्षित हों। आस्था और आचरण के बीच की यह खाई भारतीय समाज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा का क्या महत्व है?
महानवमी शारदीय नवरात्रि का नौवाँ और अंतिम दिन है, जब मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। सनातन मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री अष्ट सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी हैं और उनकी आराधना से साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव कौन हैं?
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव हरिद्वार के प्रतिष्ठित धर्माचार्य हैं। वे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए जाने जाते हैं।
नवरात्रि में कन्या पूजन क्यों किया जाता है?
सनातन परंपरा में कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है। महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव के अनुसार कन्या पूजन नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक है, जो मातृशक्ति के महत्व को दर्शाता है।
नवरात्रि राष्ट्रीय एकता से कैसे जुड़ी है?
महामंडलेश्वर के अनुसार नवरात्रि देश के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक समान श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश देती है और सामाजिक सद्भाव व भाईचारे को मजबूत करती है।
नवरात्रि के बाद कौन-सा प्रमुख त्योहार आता है?
महानवमी यानी नवरात्रि के समापन के अगले दिन विजयादशमी (दशहरा) मनाया जाता है। यह असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है और पूरे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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