पंजाब जनगणना में अपमानजनक शब्दों पर एनसीएससी सख्त, 15 दिन में रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने मंगलवार, 19 मई 2026 को पंजाब की जनगणना प्रक्रिया में अनुसूचित जातियों की सूची में अपमानजनक एवं आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल की शिकायत पर गंभीर संज्ञान लिया। आयोग ने संबंधित विभागों को 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
शिकायत की पृष्ठभूमि
यह शिकायत राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने एनसीएससी के अध्यक्ष किशोर मकवाना को सौंपी। शिकायत के अनुसार, जनगणना प्रक्रिया के दौरान वाल्मीकि समुदाय के संदर्भ में अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे समुदाय के सदस्यों में गहरा रोष है। यह मामला अनुसूचित जातियों की संवैधानिक गरिमा से सीधे जुड़ा होने के कारण आयोग ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया।
आयोग के नोटिस और निर्देश
एनसीएससी ने जनगणना कार्य निदेशालय, पंजाब के निदेशक और सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग, पंजाब सरकार के प्रधान सचिव को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं। दोनों अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर इस मामले में उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। आयोग अध्यक्ष मकवाना ने स्पष्ट किया कि प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आयोग अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा, 'अनुसूचित जातियों के सम्मान, अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।' उन्होंने यह भी कहा कि आयोग संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और उठाए गए कदमों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब में अनुसूचित जातियों के कल्याण को लेकर आयोग पहले से ही चिंता जता चुका है।
पंजाब में एससी कल्याण पर पहले से चल रही निगरानी
गौरतलब है कि इससे पहले मार्च 2026 में एनसीएससी ने चंडीगढ़ में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ दो दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद पंजाब में अनुसूचित जातियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। मकवाना ने उस समय कहा था कि पंजाब में अनुसूचित जातियों की स्थिति के लिए 'तत्काल सुधारात्मक कदमों' की आवश्यकता है।
आयोग ने तब कई मुद्दों को उजागर किया था — छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितताएँ, केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं का लागू न होना, एससी छात्रों के बीच स्कूल छोड़ने की बढ़ती दरें और अत्याचार निवारण तंत्र में कमियाँ। इसके अलावा, आयोग के अनुसार, कथित तौर पर कई शिकायतों को पुलिस थानों में बिना एफआईआर दर्ज किए ही खारिज कर दिया गया था — जो एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम का उल्लंघन है।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें पंजाब सरकार के जवाब पर हैं। 15 दिनों की समय-सीमा समाप्त होने के बाद एनसीएससी प्राप्त रिपोर्ट की समीक्षा कर अगले कदम तय करेगा। यह मामला केवल भाषाई संवेदनशीलता तक सीमित नहीं — यह पंजाब में अनुसूचित जाति समुदायों के व्यापक संस्थागत संरक्षण की परीक्षा भी है।