तेलंगाना डीसीए का आश्वासन: 20 मई के बंद में भी मिलेंगी जरूरी और जीवनरक्षक दवाएँ
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना औषधि नियंत्रण प्रशासन (डीसीए) ने 20 मई 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी मेडिकल बंद के दौरान राज्यभर में आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। यह बंद अखिल भारतीय रसायनज्ञ एवं औषध विक्रेता संगठन (एआईओसीडी) द्वारा दवा नियमों में हालिया संशोधनों और ऑनलाइन फार्मेसी के संचालन के विरोध में बुलाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
डीसीए के महानिदेशक अविनाश मोहंती ने बताया कि एआईओसीडी की तेलंगाना इकाई के साथ हुई बैठक में यह तय किया गया कि अस्पतालों से जुड़ी मेडिकल दुकानें बंद के दौरान भी आम जनता की सुविधा के लिए खुली रहेंगी। इसके अलावा, अपोलो फार्मेसी और मेडप्लस जैसी कॉर्पोरेट मेडिकल दुकानों को भी संचालित रखने की सलाह दी गई है।
एआईओसीडी की जिला इकाइयाँ आपात स्थिति में स्थानीय मेडिकल स्टोरों से दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए ड्रग इंस्पेक्टरों के लगातार संपर्क में रहेंगी। विभाग के सभी फील्ड अधिकारियों को सतर्क रहने और दवाओं की उपलब्धता या जन शिकायतों से जुड़े मामलों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
बंद का कारण और पृष्ठभूमि
हैदराबाद केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन और एआईओसीडी ने बुधवार, 20 मई को मेडिकल स्टोर बंद रखने की घोषणा की है। संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी और डिजिटल मेडिसिन प्लेटफॉर्म के अनियंत्रित संचालन से दवाओं के दुरुपयोग, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ने और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। यह विरोध हालिया दवा नियम संशोधनों के खिलाफ भी है, जिन्हें केमिस्ट संगठन अपने व्यापार के लिए नुकसानदेह मानते हैं।
आम जनता पर असर और राहत उपाय
मोहंती ने स्पष्ट किया कि यदि 20 मई को आवश्यक या आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता में कोई समस्या आती है, तो नागरिक संबंधित स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर या डीसीए के सहायक निदेशक से तुरंत संपर्क कर सकते हैं। डीसीए अधिकारियों के संपर्क नंबर और कार्यालयों के पते विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के 'की कॉन्टैक्ट्स' सेक्शन में उपलब्ध हैं।
इसके अतिरिक्त, दवाओं की जानकारी या सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 599 6969 पर भी संपर्क किया जा सकता है। राज्यभर में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन फार्मेसी के अनियंत्रित विस्तार को लेकर केमिस्ट संगठनों की चिंताएँ पूरी तरह निराधार नहीं हैं — एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पहले से ही भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि बंद जैसे कदम उन मरीजों को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं जो पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
क्या होगा आगे
डीसीए ने सभी हितधारकों से बंद के दौरान आम जनता तक दवाओं की निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करने में सहयोग करने की अपील की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार ऑनलाइन फार्मेसी विनियमन पर केमिस्ट संगठनों की माँगों पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह विवाद देशभर के लाखों दवा विक्रेताओं की आजीविका और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य से जुड़ा है।